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सिखों के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव व उनके सिद्धांत | 10 Principles of Guru Nanak In Hindi

सिखों के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव व उनके सिद्धांत | 10 Principles of Guru Nanak In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-7 months ago
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पौराणिक इतिहास से भारतीय संस्कृति में गुरु को एक महान दर्जा दिया गया है। व्यक्ति के जीवन में माता-पिता के बाद गुरु ही होता है जो उसे सही रास्ते व जीवन में आगे बढ़ने के लिए उसके अंदर जीवन की महत्वपूर्ण बातों का संचार करता है। वेदों में गुरु को सम्मान देते हुए मंत्रो श्लोको का उल्लेख मिलता है “ गुरुर्परमब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नमः यानी गुरु का पद भगवान के रुप के समान है। गुरु ही होता है जो सही मार्ग के साथ बुराइयों का अंत करने का विश्वास पैदा करता है।

कौन होता है ? गुरु शब्द का अर्थ

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गुरु जो उजाले में प्रकाश जैसा होता है हर तरफ रौशनी की तरह प्रेम भाव व एकजुटता का संदेश का प्रसार करता है। इस सही रास्ते पर चलने को प्रेरित करने में एक नाम धर्मगुरु गुरु नानक देव का भी आता है। गुरु नानक ने मुर्ति पूजा को छोड़ अपने मन भाव से भगवान की भक्ति पर विश्वास किया। गुरु नानक कहते है इंसान को अपने मन से भक्ति करनी चाहिए ना की हर रोज मंदिर मे जाकर। नानक देव वो धर्मगुरु या धर्मरक्षक थे जिनमें योगी, दार्शनिक, गृहस्थ, समाज सुधारक , कवि व एक सच्चे देशभक्त के गुण नजर आते थें। महान गुरु, गुरु नानक का जन्म 15 अप्रेल 1469 को उत्तरी पंजाब में स्थित तलवंडी गांव में ( इस समय पाकिस्तान ननकाना ) में खत्रीकुल हिन्दू परिवार में हुआ था।

गुरु नानक का जन्म के बाद नामकरण नानक उनकी बड़ी बहन नानकी के नाम पर दिया गया था। गुरु नानक साहब के के पिता का नाम मेहता कालम व माता का नाम तृप्ता देवी था। पिता मेहता तलवंडी में ही पटवारी थें । गुरु नानक बचपन से ही सांसारिक गतिविधियों से दुखी रहते थे उनका लगाव बचपन से ही सांसारिक मौह से दूर आध्यात्म की और था।

10 Principles of Guru Nanak In Hindi

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उन्हें जब घर के पशु चराने भेजा जाता तब व इस दौरान वो कई घंटो तक ध्यान में खो जाते थें। इस भक्ति के चलते एक दिन उनके पशुओं ने कई खेतों में नुकसान कर दिया उनकी शिकायत पिता तक जब पहुंची तब उन्हें खुब डांट पड़ी। लेकिन जब इस बर्बाद हुई फसल को गांव का मुखिया देखने पहुंचे तो वो फसल बिलकुल सही थी। गुरु नानक का बचपन में यह पहला चमत्कार था। बस यही से वो एक संन्यासी बन गए।

पिता ने लगा दिया कारोबार में

गुरु नानक का आध्यात्मिकता की और लगातार लगाव के चलते उनके पिता ने उनका ध्यान व विचार बदलने के लिए काम पर लगा दिया। लेकिन गुरु नानक का भक्ति व आध्यात्मिकता से फिर भी दूर नही हुए वो अपने परोपकारी भाव व लोगो के प्रति दया के चलते जो भी काम करके पैसो कमाते उन पैसो से वो गरीब अनाथ बेघर लोगो को भोजन कर देते है। गुरु नानक साहब की इसी प्रकिया से जिन गरीब लोगो को भोजन नही मिल पाता उनके लिए लंगर की शुरुआत हुई।

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सिखों के प्रथम धर्म गुरु, गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन काल में 10 महत्वपुर्ण व समाज कल्याणकारी शिद्धांत दिए जिनकी हमें पालना करनी चाहिए।

1. ईश्वर एक है।
2. जगत का कर्ता सब जगह और प्राणी हर प्राणी मात्र में विलीन है।
3. सदैव एक ही ईश्वर की भक्ति करो।
4. जीवन में ईमानदारी के साथ ही अपना पेट भरना चाहिए।
5. कोई भी किसी भी प्रकार का बुरा कार्य करने ना सोचे ना ही किसी को सताएं
6. सभी स्त्री व पुरुष एक समान है
7. भोजन शरीर को जिंदा रखने के लिए आवश्यक है। पर लोभ-लालच व संगृवत्ति बुरी हैं।
8. सदा प्रसन्न रहना चाहिए। ईश्वर से सदा अपने क्षमाशीलता मांगना चाहिए।
9. मेहनत व ईमानदारी से कमाई से उसमें से जरुरतमंद को भी देना चाहिए।
10. सर्वशक्तिमान ईश्वर की भक्ति करने वालों को किसी का भय नही रहता। - गुरु नानक देव 

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