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'महिलाओ' में आया नया बदलाव, वो भी करेगी अब 'Lineman' का काम

'महिलाओ' में आया नया बदलाव, वो भी करेगी अब 'Lineman' का काम

In : Viral Stories By storytimes About :-1 year ago
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"महिलाओ" में आया नया बदलाव, वो भी करेगी अब "Lineman" का काम
अब तक आपने लाइनमैन के रूप में पुरुषों को ही विद्युत लाइन दुरुस्त करते हुए देखा होगा। ऊंचे खंभों पर रस्सी के सहारे लटक कर हाई वोल्टेज विद्युत लाइनों को सुधारना कोई आसान काम नहीं है। शायद इसी कारण यह काम को अंजाम दे सकती हैं। लेकिन अब आप महिलाओं को भी यह कठिन कार्य करते हुए देख सकते हैं। 

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पहले बैच में 19 युवतियों की नियुक्ति

मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने पहले चरण में 19 युवतियों को लाइन स्टाफ में नियुक्ति दी है। प्रशिक्षण के बाद विभिन्न जोन व वितरण केंद्रों में इनकी तैनाती भी कर दी गई है। कंपनी के प्रबंध निदेशक आकाश त्रिपाठी के मुताबिक, हमने सोचा कि क्यों न नया प्रयोग किया जाए। युवतियों ने इसमें रुचि दिखाई। लाइन परिचारिका (एलए) पद की परीक्षा दी और चयनित हुईं। उन्हें फिजिकल फिटनेस की परीक्षा भी देनी पड़ी। इस तरह पहले बैच में कुल 19 युवतियों का चयन लाइन परिचारिका पद के लिए हुआ। 

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चुनौती स्वीकार की

पहले यह काम थोड़ा कठिन लगा। लेकिन अवसर सामने था और अपने पैरों पर खड़ा हो परिवार का आर्थिक सहयोग करना था। लिहाजा चुनौती स्वीकारी। फिर सब आसान लगने लगा।

अंकिता पाटिल, बैतूल 

हम युवतियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। वे यह काम क्यों नहीं कर सकती हैं। आने वाले समय में इन पदों पर महिलाओं की संख्या और बढ़ाई जाएगी। 

एसके गुजराती, अधीक्षण यंत्री, मप्र विद्युत वितरण

कंपनी, पश्चिम क्षेत्र 

हम क्यों नहीं कर सकते

आज महिलाएं सभी क्षेत्रों में काम कर रही हैं। हम विद्युत लाइन से जुड़ा काम क्यों नहीं कर सकते। काम में थोड़ा जोखिम तो उठाना ही पड़ता है। जो जिम्मेदारी हमें दी जाएगी, उसे पूरा करेंगे।

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किरण आर्य, छिंदवाड़ा

साहस के साथ करेंगे काम

खंभे पर चढ़कर लाइन सुधारने का काम महिलाएं भी कर सकती हैं, ये कोई सोच भी नहीं सकता था। पहले हमें भी ये काम थोड़ा चुनौती भरा लगा। मगर प्रशिक्षण लेने के दौरान सब सामान्य हो गया।

इंदु कुमरे, बैतूल 

ठान लो तो कुछ मुश्किल नहीं

मन में "ठान" लें तो कोई काम "मुश्किल" नहीं है। "काम" में तो "जोखिम" है, लेकिन सही "प्रशिक्षण" और "सावधानी" से काम करेंगे तो कोई "दिक्कत" नहीं आएगी। 

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मोना कतिया, करेली

नहीं किसी से कम

अधिकारियों के मुताबिक, इनके हौसले बुलंद हैं। ये लाइनमैन से कमतर नहीं हैं। प्रथम बैच में रोशनी अश्ने, मोनिका रायकवार, देवशीली पांचे, दीक्षा पटेल, कश्मा भगत, सपना साहू, प्रिया पंवार, वर्षा मार्कों, इंदु कुमरे, पूजा मुडिया, रीना बालुंदा, किरन आर्शीया, संध्या बांकरिया, लता पिपरिया, अंकिता पाटिल, मोना कतिया, किरण आर्य, वर्षा धोके, निधि शिवरे शामिल हैं। 

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कड़ी मेहनत कर पूरा किया प्रशिक्षण

उज्जैन विद्युत प्रभाग में कंपनी प्रबंधक रीना के अनुसार यहां पांच महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया। लाइन परिचारिकाओं ने कड़ी मेहनत और लगन से विद्युत लाइनों को ठीक करना, शिकायत पर फॉल्ट को सुधारना, ट्रांसफॉर्मर आदि का मेटनेंस करना और खंभे पर चढ़कर जंपर ठीक करने का प्रशिक्षण लिया। इसके अलावा इन्होंने बिजली बिलों की रिकवरी, फोटो मीटर रीडिंग जानने, रिमोट डिस्कनेक्शन यूनिट के मोबाइल से संचालन करने आदि का काम भी सीखा।