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इस समाज की महिलाएं पिलाती है हिरन के बच्चों को दूध । Bishnoi Samaj Information in Hindi

इस समाज की महिलाएं पिलाती है हिरन के बच्चों को दूध । Bishnoi Samaj Information in Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-7 months ago
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बिश्नोई समाज के लोगो ने ही दिया था खेजड़ली आंदोलन बलिदान | Bishnoi Samaj In Hindi

दोस्तों हम जब भी किसी धार्मिक कार्यक्रम या इनसे जुड़े किसी कार्यक्रम में जाते है तब हमें ये सुनने को मिलता है की जानवरों पर दया करो उनकी हत्या मत करो लेकिन दोस्तों सभी लोग इस बात पर अमल नहीं करते है और उस बात को वहीं पर भूल जाते है । लेकिन दोस्तों राजस्थान में एक ऐसा समाज है जो जानवरों के रक्षा के लिए खुद को पूर्ण न्योछावर कर देते है। ऐसा बताया जाता है की राजस्थान में बिश्नोई समाज के लोग  करीब 500 सालो से जानवरों को अपने बच्चे की तरह पाल रहे है।

बिश्नोई समाज की महिलाएं जानवरों को अपने बच्चो की तरह पालती है व इनकी सभी जरूरतों का ध्यान रखती है। यहां की महिलाएं ही नहीं पुरुष भी गांव में लावारिस घूम रहे हिरण के बच्चों को अपने घर में लाकर अपने परिवार की तरह उनको पालते है। दोस्तों यहां की महिलाएं खुद को हिरन की बच्चे की माँ भी कहती है।

बिश्नोई समाज के गुरु व नियम

दोस्तों राजस्थान में बिश्नोई समाज के लोग जौधपुर ज़िले में सबसे ज्यादा निवास करते है। इस समाज को ये नाम भगवान विष्णु से मिला है । ये लोग पर्यावरण की देखरेख और इसकी पूजा भी करते है। ये लोग ज्यादातर जंगल और रेगिस्तानी इलाके में ज्यादा रहते है। यहां के बच्चे हिरन के छोटे बच्चो के साथ खेलकर ही बड़े होते है । बिश्नोई समाज के लोग हिन्दू गुरु श्री जम्भेश्वर भगवान को सबसे ज्यादा मानते है। दोस्तों इस समाज के लोग उनके द्वारा बताएं गए 29 नियमों का पालन करते है।

खेजड़ी बचाने के लिए हो गए 363 लोग शहीद

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दोस्तों आपने खेजड़ली आंदोलन का नाम सुना होगा ये आंदोलन राजस्थान के जौधपुर के खेजड़ली गांव में साल 1736 में हुआ था। इस आंदोलन में खेजड़ी की रक्षा करते हुए बिश्नोई समाज के लोगो के 363 लोगो ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे । उस समय घने पेड़ो के कारण इस गांव में चारो तरफ हरियाली थी। एक दरबार के आदेश के बाद कुछ लोग खेजड़ली में खेजड़ी के पेड़ काटने पहुंचे । जब इस बात का पता गांव के लोगो को लगा तब सभी ने इसका विरोध किया। गांव के लोगो ने उन्हें आग्रह किया की वो पेड़ नहीं काटे लेकिन वो लोग नहीं माने। तभी खेजड़ली की अमृतादेवी बिश्नोई उन लोगो को गुरु जम्भेश्वर महाराज सौगंध दी और वहीं पेड़ से चिपक गई । अमृतादेवी को देख खेजड़ली के सभी लोग पेड़ो से लिपट गए। इस संघर्ष में खेजड़ी की रक्षा करते हुए अपने प्राण दे दिए । इस बलिदान के लिए इन लोगो को शहीद का दर्जा दिया गया और इनकी याद में हर साल खेजड़ली गांव में एक मेला लगता है। यहां अमृता देवी का एक केंद्र बनाया गया है जहां राज्य की सरकार और अन्य विभाग पुरस्कार वितरण करते है|

बचपन गुजर जाता है हिरन के बच्चों के साथ

Source adevarul.ro

दोस्तों इस गांव में रहने वाली 21 वर्षीय  रोशनी बिश्नोई बताती है की " में बचपन से ही हिरन के बच्चों के साथ खेल कूद कर बड़ी हुई हु" मेरा घर में ये काम रहता है की इन हिरन के बच्चों को घर में किसी तरह की कोई समस्या नहीं हो इस बात का खास ख्याल में रखती हु।

हिरन शिकार मामला 1998

Source images.indianexpress.com

साल 1998 में एक फिल्म की सूटिंग के दौरान हिरन शिकार मामले में बॉलीवुड के लोकप्रिय हीरो सलमान खान को भी इस समाज के आक्रोश का सामना करना पड़ा । जब तक ये मामला कोर्ट में चल रहा था तब तक सलमान खान का राजस्थान में आना मुश्किल हो गया था। और हिरन शिकार मामले में कई बार सलमान खान जेल भी जाना पड़ा  है।