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होलीका के दहन से जानिए कैसा होगा आपका भविष्य...

होलीका के दहन से जानिए कैसा होगा आपका भविष्य...

In : Meri kalam se By storytimes About :-2 years ago
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fortune telling

प्राचीन समय में होली के पर्व पर होलिकादहन के उपरांत उठते हुए धुएं को देखकर भविष्य कथन किया जाता था। यदि होलिका दहन से उठा धुआं पूर्व दिशा की ओर जाता है तब यह राज्य, राजा व प्रजा के लिए सुख-संपन्नता का कारक होता है। यदि होलिका का धुआं दक्षिण डायरेक्शन की ओर जाता है तब यह राज्य, राजा व प्रजा के लिए डिफीकल्टी का सिग्नल देता है।यदि होली (holi) का धुआं पश्चिम डायरेक्शन की ओर जाता है तब राज्य में पैदावार की कमी व अकाल की आशंका होती है। जब होलिकादहन का धुआं उत्तर डायरेक्शन की ओर जाए तो राज्य में पैदावार अच्छी होती है और राज्य धन-धान्य से भरपूर रहता है। लेकिन यदि होली का धुआं सीधा आकाश में जाता है तब यह राजा के लिए समस्या का कारण होता है|

होली के पर्व के पीछे भी एक सशक्त वैज्ञानिक आधार है।

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हमारे सनातन धर्म से जुड़ी हुईं अनेक परंपराएं व पर्व भले किसी न किसी पौराणिक कथा से संबंधित हों लेकिन अधिकांश वे किसी न किसी वैज्ञानिक आधार से संबंधित अवश्य होती हैं।  जब शीत ऋतु विदा ले रही होती है और ग्रीष्म ऋतु का आगमन हो रहा होता है। इसे दो ऋतुओं का 'संधिकाल' कहा जाता है। यह 'संधिकाल' अनेक रोगों व बीमारियों को जन्म देने वाले रोगाणुओं का जनक होता है।

होली का पर्व अक्सर इस समय क्यों मनाया जाता है.

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आपने अक्सर देखा होगा कि इस काल में आम जनमानस रोगो (Mass disease) का शिकार अधिक होते है, क्योंकि वातावरण में इस 'संधिकाल' से उत्पन्न रोगाणुओं की संख्या अधिक मात्रा में होती है। इन रोगाणुओं को समाप्त करने के लिए प्रचंड अग्नि के हीट की रिक्वायरमेंट होती है। इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इस समय होलिकादहन किया जाता है जिससे कि वातावरण में पर्याप्त ताप व धुआं उत्पन्न हो, जो विषैले रोगाणुओं (Toxic microbes) का नाश कर सके।

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शास्त्रोक्त मान्यतानुसार होलिकादहन भद्रा के उपरांत ही करना चाहिए। भद्रा में होलिकादहन करने से राज्य, राजा व प्रजा पर संकट आते हैं।इस वर्ष होलिकादहन 1 मार्च 2018, गुरुवार को किया जाएगा। इस दिन भद्रा सायंकाल 7 बजकर 39 मिनट तक रहेगी अर्थात होलिकादहन 7 बजकर 39 मिनट के पश्चात ही किया जाना श्रेयस्कर रहेगा।