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लड़कियां ये 12 टिप्स अपनाकर कर सकती है अपना वजन कंट्रोल, और पा सकती फिट एंड स्लीम बॉडी...

लड़कियां ये 12 टिप्स अपनाकर कर सकती है अपना वजन कंट्रोल, और पा सकती फिट एंड स्लीम बॉडी...

In : HEALTH AND FITNESS By storytimes About :-1 year ago
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Fit and slim body

अब वजन कम करने के लिए महीनो (Months) का इंतजार क्यों? लड़कियां बस ये 13 नुस्खे अपना लें और छरहरी काया पाएं, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 (2015-16) कहता है कि चंडीगढ़ की 41.5 प्रतिशत महिलाएं ओवरवेट हैं। ये आंकड़ा पूरे उत्तर भारत में सबसे ज्यादा है। ओवरवेट (Overweight) से कई गंभीर बीमारियों के बढ़ने की आशंका है। दूसरी तरफ  एनीमिया, विटामिन डी और विटामिन बी-12 की कमी उन्हें थकान, दर्द और मांसपेशियों से संबंधित बीमारियों की ओर धकेलता है।

प्राणायाम

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प्राणायाम जरूर करें: कपाल भाति प्राणायाम (Pranayama) का एक प्रकार है। इससे एसिडिटी, गैसट्रिक व पेट से संबंधित बीमारियां दूर होती हैं। रोजाना एक हजार बार कपालभाति करना चाहिए। इसमें करीब 10-15 मिनट का वक्त लगता है। इसके करने से फेफड़े भी मजबूत होते हैं। वजन कंट्रोल होता है। अस्थमा रोगियों के लिए ये रामबाण है।

सूर्य नमस्कार

इसके 12 आसन्न होते हैं। ये शरीर के एक-एक अंग पर असर (Impact) डालता है। इसके करने से पाचन तंत्र, मस्तिष्क में चेतना, वेट कंट्रोल, रक्तसंचार में तेजी, शरीर में लचीलापन और मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। जिनकी उम्र ज्यादा है, उन्हें पांच से दस बार करना चाहिए। जो यंग हैं, वे 100 तक कर सकते हैं।

कम आठ से दस बार उतरे चढ़े

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पहली मंजिल पर रहते हैं तो कम से कम 8 से 10 बार उतरे चढ़े। दूसरी मंजिल (Floor) के लिए पांच से सात बार। इससे भी आप फिट रह सकते हैं। घर पर पोंछा लगा सकते हैं। इससे भी शरीर दुरस्त रहता है। 45 मिनट में पांच KM चले। हफ्ते में कम से कम 5 बार जरूर करें। इससे वेट और बीपी काबू रहेगा। सुबह का नाश्ता (Breakfast) जरूर करें। कैंसर की समय-समय पर स्क्रीनिंग कराते रहे।

खाना सही समय पर खाये

रात का खाना सोने से 2 से ढाई घंटे पहले खाना चाहिए। इससे खाना पच जाता है। देरी से खाना खाने से नींद भी ठीक नहीं आती और खाना नहीं पचता है। खाने में सलाद और फल (fruits) को जरूर शामिल करें। रात के वक्त खाने में नमक (Solt) कम खाएं। आठ से दस गिलास पानी पीएं। इससे न तो ज्यादा पीएं और न ही कम पीएं। हो सके तो सुबह पानी की शुरुआत गुनगुने पानी से करें।

खून की कमी

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भारतीय महिलाओं में अक्सर आयरन (Iron) की कमी होती है। इससे शरीर में थकान और सांस लेने में दिक्कत आती है। कई बार हीमोग्लोबिन नार्मल होता है तो लोग समझते हैं कि खून की कमी नहीं है। इसके लिए फेरिटेन लेवल का टेस्ट करवाना चाहिए। महिलाओं में इसका नार्मल लेवल 11-307 नैनोग्राम पर मिली होता है। नार्मल से कम आने पर आयरन की गोलियां (Tablets) लें। कम से कम 6 महीने तक खाएं, लेकिन डाक्टर की सलाह पर ही।

विटामिन बी-12

यह एक महत्वपूर्ण विटामिन है। खानपान में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होने से अक्सर भारतीय महिलाओं में इसकी कमी होती है। इससे शरीर के अंदर आक्सीजन की मात्रा पूरी तरह से पहुंच पाती हैं। इससे महिलाओं में थकान (Fatigue) आती है और कार्य क्षमता प्रभावित होती है। इसे चेक कराएं। यदि लेवल कम है तो डाक्टर को दिखाएं और इलाज करवाएं।

विटामिन डी

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एयरकंडीशन युग में लोग घरों में ही रहना पसंद करते हैं। इससे महिलाओं में  विटामिन डी की कमी आ रही है। विटामिन डी कम होने से मांसपेशियों से संबंधित बीमारियों का खतरा रहता है। आस्टियोपोरोसिस व हड्डियों (Bones) में दर्द की शिकायत रहती है। फ्रैक्चर जल्दी होता है। विटामिन डी की कमी से कमर में दर्द भी रह सकता है। कमी को पूरा करने के लिए कैल्शियमयुक्त भोजन खाएं। रोजाना धूप में भी कुछ देर बैठें।

ब्रेस्ट कैंसर

ये कैंसर महिलाओं में सबसे ज्यादा कॉमन है। 20 से लेकर 50 साल तक की महिलाओं में इसका खतरा सबसे ज्यादा रहता है। समय पर इसकी पहचान नहीं होने पर यह रोग काफी खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए इसकी समय-समय पर जांच करवाते रहना चाहिए। ब्रेस्ट में गांठ महसूस होने पर डाक्टर से जरूर संपर्क करें। चंडीगढ़ में पीजीआई, जीएमसीएच 32, जीएमएसएच 16 में इसकी जांच करवाई जा सकती है।

सरवाइकल कैंसर

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महिलाओं में यह दूसरा सबसे कॉमन कैंसर है। इससे बच्चेदानी का कैंसर भी कहते हैं। समय पर पहचान नहीं होने से महिला की मौत भी हो सकती है। इसके मुख्य लक्षण अनियंत्रित रक्तस्राव, यौन संबंध के दौरान रक्त आना, वेजाइना से बदबूदार पानी आना, पेडू में दर्द जैसे मुख्य लक्षण होते हैं। 35 साल की उम्र होने के बाद हर महिला को इसकी जांच जरूर करवानी चाहिए।

दिल की बीमारी

डब्ल्यूएचओ की एक स्टडी के मुताबिक भारतीय महिलाओं में दिल की बीमारियों में 16-20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। पहले माना जाता था कि पोस्ट मेनोपोज के दौरान महिलाओं में हार्ट की बीमारियां होती हैं, लेकिन अब जवान महिलाओं में भी दिल की बीमारियां बढ़ रही हैं। इसके लिए महिलाएं अपना वजन, ब्लड प्रेशर और तनाव नियंत्रण में रखें। दिल में कुछ भी तकलीफ हो तो तुरंत डाक्टर को दिखाएं।

पोलिसिस्टिक ओवरी डिस्आर्डर

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यह बीमारी सेक्स हार्मोन (Hormone) में असंतुलन होने से होती है। हार्मोन के बदलाव से मासिक धर्म (पीरियड) पर प्रभाव पड़ता है और पीरियड का समय गड़बड़ा जाता है। इससे ओवरी में सिस्ट बनने लगती है। यदि यह समस्या लंबे समय तक रहे तो महिलाओं को गर्भ धारण करने में दिक्कत आ सकती है। इससे पीड़ित महिलाओं में पुरुषों के हार्मोन (Hormone) बनने लगते हैं। यह बहुत ही आम समस्या है। इसके मुख्य लक्षण महिलाओं (ladies) का वजन बढ़ना, चेहरे पर बाल का आना, लगातार मुहांसे आना, सिर के आगे से बालों का गायब होना है। जंक फूड व शारीरिक एक्सरसाइज न करने से इसका खतरा बढ़ता है। इससे बचने के लिए रोजाना एक्सरसाइज करें। फलों का सेवन करें और जंक फूड से बचे।