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हिन्दू धर्म में गोत्र को क्यों देखा जाता है लड़के लड़की की शादी से पहले | Gotr Kya Hai

हिन्दू धर्म में गोत्र को क्यों देखा जाता है लड़के लड़की की शादी से पहले | Gotr Kya Hai

In : Meri kalam se By storytimes About :-9 months ago
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दोस्तों आपने देखा होगा जब भी आपके परिवार में किसी का रिश्ता तय किया जाता है तब घर के बड़े लोग लड़के और लड़की के गोत्र को मिलाते है और फिर ही उनके विवाह की बातचीत शुरू करते है हिन्दू धर्म में अंतर्जातीय विवाह एक अपराध और समाज की बेइज्जती मानी जाती है और हिन्दू धर्म हमेशा इसका विरोध करता है फिर वो सामान जाती ही क्यों ना हो ये पूरा मसला होता हिन्दू धर्म में आने वाली गोत्र के चलते होता है अब दोस्तों आप गोत्र के बारे में ज्यादा नहीं जानते है तो हम आपको इस बारे में विस्तार से बताते है गोत्र जो लड़के या लड़की के वंश के बारे में जानकारी देता है और ये आपकी पीढ़ियों के बारे में जानकारी देती है कोई व्यक्ति आपको बोलता है की में भारद्वाज गोत्र से हु तो समझ जाये की वो ऋषि भारद्वाज की कुल की संतान है

गोत्र को क्यों जोड़ा जाता है शादी के समय -  Gotr Kya Hai

Gotr Kya Hai

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गोत्र क्या है और यह शादी विवाह के दौरान इसका महत्व क्या है दोस्तों गोत्र विश्वामित्र, जमदग्नि, भारद्वाज, गौतम, अत्रि, वशिष्ठ, कश्यप इन साथ ऋषियों और एक आठवें ऋषि अगस्त्य के कुल में जन्मी संतान को ही गोत्र कहा जाता है इस कारण जब कोई रिश्ता तय किया जाता है तब यदि गोत्र सामान मिल जाता है तो इसका मतलब होता है की वो एक कुल के है और इसी आधार पर रिश्ता तय किया जाता है दोस्तों हिंदू धर्म अपने ही परिवार और कुल में शादी को सही नहीं मानता है और ऐसा माना जाता है की यदि एक ही गोत्र और कुल में शादी कर भी दी जाये तो इससे उस जोड़े की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है और उन्हें आगे जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है


साथ ही दोस्तों मनु-स्मृति में इस बारे में बताया गया है की यदि किसी कुल में कोई सत्पुरुष और विद्वान न हो और गोत्र में  क्षय रोग, मिर्गी और श्वेतकुष्ठ जैसे गंभीर बीमारी हो उस गोत्र में अपने लड़के या लड़की का विवहा नहीं करना चाहिए और बताया गया है यदि लोग जानबूझकर भी सामान गोत्र में विवाह करते है तो उनकी जाती भ्रष्ट हो जाती है वैदिक संस्कृति की मान्यता के अनुसार लकड़ा और लड़की की एक ही गोत्र में शादी करना गलत है क्योंकि ऐसा करने से वो पति पत्नी का रिश्ता नहीं बल्कि भाई बहन का रिश्ता हो जाता है

विवाह के लिए सही गोत्र - Vivha ke Liye Shi Gotr konsi Hai

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हिंदू धर्म में हर समुदाय की अलग अलग विवाह रीतिया है लेकिन हिन्दू धर्म में विवाह के लिए ऐसी मान्यता दी गई है की विवाह से पहले तीन गोत्र को टालना चाहिए उसमे खुद का दूसरा माँ का और तीसरा दादी का लेकिन हमने देखा है की कई हिंदू धर्म के लोग शादी विवाह से पूर्व लड़के लड़की की चौथी गोत्र नानी को भी देखते है

हिंदू धर्म की इस परंपरा को विज्ञानं साफ तौर पर गलत ठहराता है विज्ञानं के अनुसार यदि एक गोत्र में लड़का लड़की शादी कर दी जाती है तो उनसे उत्पन होने वाली संतान में आनुवांशिक रोगों के दोष के साथ पैदा होती है और इस संतान की विचारधारा भी एक सामान होती है और उसमे कुछ नया नहीं होता है इस गोत्र विवाह को लेकर महान विचारक ओशो ने भी इस बारे में कहा की लड़का लड़की का विवाह जितना दुरी पर किया जाये और उतना ही सफल और अच्छा होता है और उनसे जो संतान उत्पन होती है उसमे में अलग गुण होते है

दोस्तों हिंदू धर्म में गोत्र को लेकर आपके मन में क्या विचार है आप हमें अपनी विचारधारा कमेंट के माध्यम से हमें बताएं धन्यवाद