how to make happy lord ganesha

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In : Life Style By storytimes About :-5 years ago
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ऐसे हो सकते है बुधवार के दिन श्री Ganesha jI प्रसन्न ,सामग्री सूचि और मंत्र से 

आज हम श्री गणेशजी  की बात करते है हिन्दुओ में सबसे पहले श्री गणेश जी की पूजन की जाती है क्यों की जाती है इसके बारे मे बात आज हम करते है  जैसे देखा जाये तो श्रीगणेश पूजा अपने आपमें बहुत ही महत्वपूर्ण व कल्याणकारी है। चाहे वह किसी कार्य की शुरूवात करे तो श्रीगणेश पूजा शुरू किया जाता है वह किसी कार्य की सफलता के लिए हो या फिर चाहे किसी कामनापूर्ति स्त्री, पुत्र, पौत्र, धन, समृद्धि के लिए या फिर अचानक ही किसी संकट मे पड़े हुए दुखों के निवारण हेतु हो। हिन्दू धर्मशास्त्रों के मुताबिक कलियुग में भगवान गणेश के धूम्रकेतु रूप की पूजा की जाती है। जिनकी दो भुजाएं है। किंतु मनोकामना सिद्धि के लिये बड़ी आस्था से भगवान गणेश का चार भुजाधारी स्वरूप पूजनीय है। जिनमें से एक हाथ में अंकुश, दूसरे हाथ में पाश, तीसरे हाथ में मोदक व चौथे में आशीर्वाद है। इनमें खासतौर पर श्री गणेश के हाथ में मोदक प्रतीक रूप में जीवन से जुड़े संदेश देता है । परिवार में कलह कलेश हो तो बुधवार के दिन दूर्वा के गणेश जी की प्रतिकात्मक मूर्ति बनवाएं। इसे अपने घर के देवालय में स्थापित करें और प्रतिदिन इसकी विधि-विधान से पूजा करें । और भगवान गणेश भगवान शिवजी और माता पार्वती के पुत्र हैं. भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी यानी आधे से भी कम Moon ( चांद ) वाला day ( दिन ) गणेश जी के अवतार का दिन है

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गणेश भगवान की पूजा विधि

भारत में मान्यता है कि श्री गणेश भगवन की पूजा का विशेष दिन है बुधवार होता है । प्रातः काल स्नान ध्यान आदि से सुद्ध होकर सर्व प्रथम ताम्र पत्र के श्री गणेश यन्त्र को साफ़ मिट्टी, नमक, निम्बू  से अच्छे से साफ़ किया जाए।  पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख कर के आसान पर विराजमान हो कर सामने श्री गणेश यन्त्र की स्थापना करें। शुद्ध आसन में बैठकर सभी पूजन सामग्री को एकत्रित कर पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि गणेश God ( भगवान ) को समर्पित कर, इनकी दीप व धूप लगाकर आरती करें। है। अंत में God ( भगवान ) गणेश जी का स्मरण कर ॐ गं गणपतये नमः का 108 नाम मंत्र का जाप करना चाहिए।

God ( भगवान ) श्री गणेश जी प्रसन्न करने के लिए पढ़ें 5 उपाय

 श्री Ganesha ( गणपति ) जी का बीज मंत्र 'गं' है। इनसे युक्त मंत्र- 'ॐ गं गणपतये नमः' का Chanting ( जप ) करने से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। षडाक्षर मंत्र का जप आर्थिक प्रगति व समृद्धि प्रदायक है।  

 -:  ॐ वक्रतुंडाय हुम्‌

किसी के द्वारा नेष्ट के लिए की गई क्रिया को नष्ट करने के लिए, विविध कामनाओं की पूर्ति के लिए उच्छिष्ट श्री  Ganesha jI  ( गणपति जी ) की साधना करना चाहिए। इनका जप करते समय मुंह में गुड़, लौंग, इलायची, पताशा, ताम्बुल, सुपारी होना चाहिए। यह साधना अक्षय भंडार प्रदान करने वाली है। इसमें पवित्रता-अपवित्रता का विशेष बंधन नहीं है।  


उच्छिष्ट गणपति का मंत्र

 -:   ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा

आलस्य, निराशा, कलह, विघ्न दूर करने के लिए Ganesha jI  ( गणपति जी ) रूप की आराधना का यह मंत्र जपें -  

 -:  गं क्षिप्रप्रसादनाय नम:

 विघ्न को दूर करके धन व आत्मबल की प्राप्ति के लिए हेरम्ब गणपति का मंत्र जपें    

 -:  'ॐ गं नमः'

   रोजगार की प्राप्ति व आर्थिक वृद्धि के लिए लक्ष्मी Ganesha jI  ( गणपति जी ) मंत्र का जप करें   

 -:  ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।      

Marriage ( विवाह ) में आने वाले दोषों को दूर करने वालों को त्रैलोक्य मोहन Ganesha ( गणपति )  मंत्र का जप करने से शीघ्र विवाह व अनुकूल जीवनसाथी की प्राप्ति होती है- 


 -:  ॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।  

 इन मंत्रों के अतिरिक्त Ganesha ( गणपति ) अथर्वशीर्ष, संकटनाशन गणेश स्तोत्र, गणेशकवच, संतान Ganesha ( गणपति ) स्तोत्र, ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र, मयूरेश स्तोत्र, गणेश चालीसा का पाठ करने से गणेशजी की कृपा प्राप्त होती है।  

  

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