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सर्वपल्ली राधाकृष्णन की 20 महत्वपूर्ण बातें | Important Things of Sarvepalli Radhakrishnan in Hindi

सर्वपल्ली राधाकृष्णन की 20 महत्वपूर्ण बातें | Important Things of Sarvepalli Radhakrishnan in Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-11 months ago
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डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन की 20 खास बातें | Important Things of Sarvepalli Radhakrishnan in Hindi

1. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को एक ब्राह्मण परिवार में तमिलनाडु के तिरूतनी गांव में हुआ था। यह गांव चेन्नई से 64 किलोमीटर दूर स्थित है।

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2. डॉक्टर राधाकृष्णन के पिता(father) का नाम सर्वपल्ली वीरास्वामी और माता का नाम सीताम्मा था। पिता वीरास्वामी गरीब थे लेकिन वह एक पढ़े-लिखे थे और राजस्व विभाग में नौकरी करते थे।

3. डॉक्टर राधाकृष्णन के कुल 6 भाई- बहन थे उनके पिता अपने परिवार का गुजारा बड़ी ही मुश्किल से कर पाते थे। डॉक्टर राधाकृष्णन अपने भाई - बहनो में दूसरे नंबर के थे डॉक्टर राधाकृष्णन का बचपन इतने बड़े परिवार(family) में कुछ साधारण तरीके से गुजरा है।

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4. डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का बचपन 8 वर्षो तक तिरूतनी में ही बिता है। जब राधाकृष्णन 8 वर्ष के हो गये थे तब उनको तिरूपति में एक क्रिश्चियन मिशनरी स्कूल में भेजा गया। 1900 से 1904 तक उनकी शिक्षा(Education) ग्रहण वेल्लूर में हुई।

5. वेल्लूर में शिक्षा के बाद डॉक्टर राधाकृष्णन ने ‘मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज’ में अपना दाख़िला ले लिया। इस कॉलेज से उन्होंने 1906 में ही दर्शनशास्त्र में M.A. की डिग्री हासिल कर ली थी । प्रतिभाशाली (Brilliant) छात्र होने के वजह से राधाकृष्णन को अपने छात्र जीवन में कई बार उन्हें छात्रवृत्तियां मिलती रहीं।

6. उस वक़्त की प्रचलित परिपाटी के अनुसार(according) ही डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का विवाह भी 16 वर्ष की कम उम्र में दूर के रिश्ते की बहन सिवाकामू से हो गया। उस वक़्त सिवाकामू की उम्र केवल 10 वर्ष की थी और उन्होंने विवाह के 3 साल बाद ही अपने पति के साथ रहने लग गयी थी।

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7. डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन और सिवाकामू ने 5 बेटियों और एक बेटे को जन्म(Birth) दिया। इकलौता बेटा सर्वपल्ली गोपाल आगे चलकर एक प्रसिद्ध इतिहासकार बना।

8. अप्रैल 1909 में सर्वपल्ली राधाकृष्णन मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज में दर्शनशास्त्र के शिक्षक के तौर पर नियुक्त हुए। इसके बाद वो 1918 में मैसूर यूनिवर्सिटी में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर बने जहां वे महाराजा कॉलेज, मैसूर में पढ़ाते थे।

9. मैसूर में रहते हुए उन्हें एक बार रवींद्रनाथ टैगोर से मिलने(Meet) का मौका मिला था। राधाकृष्णन टैगोर के विचारों से काफी प्रभावित हुए और उन्होंने टैगोर के विचारों की अभिव्यक्ति हेतू ‘रवींद्रनाथ टैगोर का दर्शन(visit)’ नाम से एक पुस्तक(book) लिखी।

10. 1921 में वो कलकत्ता यूनिवर्सिटी में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर बने। उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी को जून 1926 में Congress of the Universities of the British Empire में और सितंबर 1926 में अमेरिका की Harvard University में International Congress of Philosophy में रिप्रेजेंट किया था।

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11. डॉक्टर राधाकृष्णन के शिक्षा के प्रति लगाव ने उन्हें एक मजबूत(strong) व्यक्तित्व प्रदान किया। वो हमेशा कुछ नया सीखने के लिए उतारू रहते थे। विवेकानंद और वीर सावरकर को वो अपना परम आदर्श मानते थे।

12. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने दर्शनशास्त्र पर ढेरों पुस्तकें(books) लिखने के साथ-साथ अपने लेखों और भाषणों के माध्यम से समूचे विश्व को भारतीय दर्शन से परिचित कराने का प्रयास भी किया। वो देश की संस्कृति(culture) को प्यार करने वाले व्यक्ति थे।

13. शैक्षिक उपलब्धियों के कारण 1931 में डॉक्टर राधाकृष्णन को अंग्रेजों द्वारा नाइट की उपाधि की गई। उन्होंने इस उपाधि को देश की आज़ादी के बाद त्याग दिया और अपना अकादमिक टाइटल ‘Doctor’ अपने नाम के आगे लगाने लगे।

14. 1931 से लेकर 1936 तक सर्वपल्ली राधाकृष्णन आंध्र यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर रहे। 1939 में वो मदन मोहन मानवीय के आग्रह पर बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर बने। वो इस पद पर जनवरी 1948 तक बने रहे।

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15. डॉक्टर राधाकृष्णन भारत की संविधान सभा के सदस्य भी रहे और भारत के पहले उप-राष्ट्रपति चुने गए। इसके बाद वो 1962 से 1967 तक भारत के दूसरे राष्ट्रपति रहे।

16. सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश(country) की आज़ादी के बाद उच्च पदों पर आसीन होने वाले उन कुछ एक व्यक्तियों में से एक थे जिनका कांग्रेस में कोई बैकग्राउंड नहीं था और ना ही उन्होंने किसी तरह से स्वतंत्रता संग्राम(Struggle) में हिस्सा लिया था। वो केवल शिक्षा के प्रति अपनी लगन के कारण इस पद पर पहुँचे थे।

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17. प्रसिद्ध दार्शनिक बर्ट्रैंड रसल ने डॉ राधाकृष्णन के राष्ट्रपति(President) बनने पर कहा था – “यह विश्व के दर्शन शास्त्र का सम्मान है कि महान भारतीय गणराज्य ने डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को राष्ट्रपति के रूप में चुना और एक दार्शनिक होने के नाते मैं खुश हूँ। प्लेटो ने कहा था कि दार्शनिकों को राजा होना चाहिए और महान भारतीय गणराज्य ने एक दार्शनिक को राष्ट्रपति(President) बनाकर प्लेटो को सच्ची श्रृद्धांजलि अर्पित की है।

18. 1962 में राष्ट्रपति बनने के बाद से उनका कार्यकाल देश के लिए चुनौतियों से भरपूर रहा। जहां देश 1962 में चीन से युद्ध हार गया तो वहीं दो प्रधानमंत्रियों की मृत्यु भी इसी समय हुई।

19. राष्ट्रपति बनने से पहले ही डॉक्टर सर्वपल्ली को 1954 में शिक्षा और राजनीति में योगदान के लिए भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

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20. 1967 में राष्ट्रपति कार्यकाल खत्म होने के बाद सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने यह ऐलान किया कि वो दोबारा राष्ट्रपति नहीं बनना चाहते हैं। पद से हटने के पश्चात वो 8 वर्षों तक जीवित रहे और 17 अप्रैल 1975 को 86 वर्ष की आयु में चेन्नई में उनका निधन हो गया।