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भारत के 5 सबसे रहस्यमयी मंदिर जहां रोज होते है चमत्कार | India 5 Most Mysterious Temples In Hindi

भारत के 5  सबसे रहस्यमयी मंदिर जहां रोज होते है चमत्कार | India 5 Most Mysterious Temples In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-8 months ago
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नमस्कार दोस्तों आज हम आपको भारत के पांच  सबसे रहस्यमयी मंदिरो के बारे में बताने वाले है भारत में वैसे तो हजारो रहस्यमयी  मंदिर है । लेकिन आज हम आपको भारत के कुछ खास और रहस्यमयी  मंदिरो के बारे में बताने वाले है. जिन्हे जानकर आप हैरान रह जाएंगे प्राचीन काल में जब मंदिर बनाये जाते थे तब वास्तु और खगोल विज्ञान का पूरा ध्यान रखा जाता था इसके अलावा राजा महाराजा अपना खजाना छिपाकर उसके ऊपर मंदिर बना देते थे। और अपने खजानो तक पहुंचने के लिए गुप्त रास्तों का निर्माण किया जाता था। आज तक इन मंदिरो का रहस्य कोई नहीं जान पाया है आज हमने भारत के ऐसे ही पांच मंदिरो की जानकारी आपके लिए जुटाई है.

#1. पद्नाभास्वामी मंदिर (केरल ) -  Padmanabhaswamy Temple
Kerala

केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित भगवान विष्णु का ये प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर भारत के प्रमुख वैष्णो मंदिरो में शामिल विष्णु भक्तों का प्रमुख आराध्य स्थल है इस मंदिर के साथ एक पुरानी कथा जुडी हुई है. मान्यता है की इस मंदिर से सबसे पहले भगवान विष्णु की प्रतिमा प्राप्त हुई थी। जिसके बाद उसी स्थान पर इस मंदिर का निर्माण किया गया इस मंदिर की देखभाल त्रावणकोर का राजपरिवार करता आ रहा है। ये मंदिर हाल ही के वर्षो में अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं  के केंद्र बिंदु में रहा साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित पांच सदस्य पैनल ने इस मंदिर के निचे बने कुल छ तहखानों में से पांच को खोल दिया जो की सदियों से बंद थे। हालांकि इनमे से एक तहखाना -तहखाना संख्या -B का दरवाजा अब तक नहीं खोला जा सका सुप्रीम कोर्ट ने भी फ़िलहाल इस तहखाने को खोलने पर रोक लगा दी है पूरी दुनिया का आश्चर्य का ठिकाना उस वक्त नहीं रहा केरल के इस मंदिर के निचे बने 5 तहखानों के अंदर तक़रीबन -तक़रीबन एक लाख से दो लाख करोड़ तक का खजाना प्राप्त हुआ । जी हा दोस्तों एक लाख से दो लाख करोड़ का खजाना

India 5 Most Mysterious Temples

Source cdn.dnaindia.com

इनमे बहुमूल्य हीरे जवाहरातों के आलावा सोने के भंडार और प्राचीन मुर्तिया भी निकली 
साथ ही हर दरवाजे के के पार अधिकारियों के पैनल को प्राचीन स्मृतिचिन्हों के अम्बार भी मिले.मगर अधिकारियों का ये दल आखिरी चेंबर यानी तहखाना संख्या B तक पंहुचा तब लाख कोशिशों के बावजूद उस दरवाजे को वो खोल पाने में कामयाब नहीं हो पाए. इस मंदिर निचे बने 5 तहखानों को खोलने के बाद तीन हफ्ते बाद ही टी.पी सुन्दरराजन यानी वो व्यक्ति जिन्होंने अदालत में इन दरवाजों को खोलने की याचिका लगाई थी। पहले वो बीमार पड़े और फिर हार्टअटैक से उनकी मौत हो गई अगले ही महीने मंदिरो के भक्तों की एक संस्था ने चेतावनी जारी कर दी की किसी ने भी यदि उस आखरी कक्ष को खोलने की कोशिश की तो उसका अंजाम भी बहुत बुरा हो सकता है इसके बाद त्रावणकोर के राजपरिवार और ज्योतिषो के बिच गहन चर्चा हुई इस चर्चा के बाद ज्योतिषो ने अपनी गणना के बाद ये कहकर सबको चौंका दिया अगर तहखाना नंबर B को खोलने का प्रयास किया गया तो ना सिर्फ केरल बल्कि पूरी दुनिया में भीषण तबाही आ सकती है सब कैम्पबेल आरख से जुड़े शोधकर्ता कर्ता जोनाथन यंग के अनुसार तहखाना संख्या बी में 3 दरवाजे है पहला दरवाजा लोहे की छड़ , दूसरा मजबूत  लकड़ी का और तीसरा मजबूत लोहे का बना है जिसे खोला नहीं जा सकता चैंबर बी के बिच लिखी चेतावनियों के बीच नागों के चित्र भी बने हुए है जिनकी डरावनी आकृतियाँ ये चेतावनी देती है की अगर इन दरवाजों को खोला गया तो अंजाम बहुत बुरा हो सकता है।

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Source www.ancient-origins.net

अमेरिका में स्थित क्लेरमॉन्ट ग्रेजुएट यूनिवर्सिटी में हिंदी के प्रोफ़ेसर दीपक सिमखाडा के अनुसार आखिरी दरवाजे पार कोई ताला नहीं लगा हुआ है ना ही उसमे कोई कुंडी है ऐसा कहा जाता है की उसे एक मन्त्र से बंद किया गया है जिसे अष्टनाग बंधन मन्त्र कहा जाता है । मशहूर किताब " दी सिंकसिटी के लेखक डेविड विलकोक के अनुसार उस कमरे के अंदर जो कुछ भी वो किसी श्राफ से ग्रषित है अगर कोई भी उसके भीतर जाने की कोशिश करता है तो उसकी जान भी जा सकती है। मंदिर के पुराने युगवको की मने तो इस मंदिर के निचे बने तहखानों को खोलने का प्रयास 139 साल पहले भी हो चूका है वहीं कुछ सूत्रों की माने तो 1930 के दशक में भी इन दरवाजों को खोलने की कोशिश की गई थी। कहा तो ये भी जाता है की इस तहखानें से एक रास्ता सीधा समुंद्र की और जाता है । इस बीच एक ऑस्ट्रेलियन जनर्लिस्ट रेनहार्ट सुमुलर ने इस मंदिर को लेकर एक बड़ा खुलासा किया  सुमुलर की माने तो यहां एक परग्रही यानी दूसरी दुनिया की टेक्नोलॉजी बंद है सुमुलर की माने तो वो खुद इस तहखानें के भीतर मुआयना कर चुके है और यहां एक 30 मीटर लंबा और 10 मीटर चौड़ा  और 8 मीटर ऊंचा एक सूल है और इसके आस पास 7 ममी यानी संरक्षित शव रखे हुए है दुनिया के मशहूर खजानखोजी डेनयल डीलमेन की माने तो यहां मिस्र यूनान जेरुसलम और अमेरिका में छिपे प्राचीन खजाने से भी ज्यादा कीमती केरल के तिरुवनंतपुरम विष्णु मंदिर के तहखानों में छिपा खजाना.

#2. जगन्नाथ मंदिर (पुरी ओडिशा ) - Jagannath Temple, Puri Odisha

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Source www.puriholidayresort.com

ओडिशा की धार्मिक नगरी पूरी में भगवान जगन्नाथ भगवान बलराम और देवी सुभद्रा का विश्व प्रसिद्ध मंदिर बना हुआ है। यहां हर साल जून-जुलाई में विशाल रथ यात्रा का आयोजन होता है इस रथ की रस्सियों को खींचने और छूने के लिए पूरी दुनिया से श्रद्धालु यहां आते है क्योंकि भगवान जग्गनाथ के भक्तों की मान्यता है की ऐसा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। पूरी मंदिर का ये भव्य रूप सातवीं सदी में तैयार किया गया है। वर्तमान मंदिर निर्माण कार्य को कलीग राजा अन्तवर्मन चोडगंग ने आरम्भ किया था। इस मंदिर से जुड़े कुछ ऐसे अनोखे  तथ्य है जिन्हे जानकर आप दंग रह जाएंगे क्या सच में भी ऐसा होता है क्या वास्तव में भी ये मंदिर अपनी आस्था के साथ-साथ इन रहस्यों के लिए भी प्रसिद्ध है इस मंदिर के ऊपर फहराता हुआ ध्वज हमेशा हवा के विपरीत दिशा में लहराता है। सामान्यक दिनों के समय हवा जमीन से समुंद्र की तरफ आती है और शाम के समय इसके विपरीत चलती है। लेकिन जग्गनाथ पूरी मंदिर में इसका उल्टा होता है अधिकतर तटो पर हवा समुंद्र से जमीन की और आती है लेकिन यहां हवा जमीन से समुद्र की और जाती है 

चमत्कारिक सुदर्शन चक्र

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पूरी में आप किसी भी जगह से मंदिर के ऊपर लगे सुदर्शन चक्र को देखेंगे तो वो सदैव आपके सामने ही दिखेगा इसे निल चक्र भी कहते है और ये अष्ट धातु से निर्मित है मंदिर के गुम्बद पर लगे चक्र के आस पास आज तक कोई भी पक्षी उड़ता हुआ नहीं देखा गया है ना ही इसके ऊपर से कोई विमान उड़ाया जा सकता है। इस मंदिर के गुम्बद के ऊपर से हवाई जहाज उड़ाना निषेध है और इस मंदिर के शिखर की छाया हमेशा अदृश्य रहती है ये दुनिया का सबसे ऊंचा और भव्य मंदिर है ये मंदिर 4 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी ऊंचाई लगभग 214 फिट है इस मंदिर के पास खड़ा होकर मंदिर के गुम्बद को देख पाना लगभग मुश्किल है दुनिया का सबसे बड़ा रसोईघर भी यहां है लगभग 20 लाख भक्त यहां एक साथ भोजन कर सकते है कहते है की मंदिर का प्रसाद कुछ लोगो के लिए ही क्यों ना बनाया गया हो लेकिन इससे लाखो लोगो का पेट भर सकता है। मंदिर में भोजन बनाने के लिए सात बर्तन एक दूसरे के ऊपर रखे जाते है और खास बात यहां सबकुछ लकड़ी पर ही पकाया जाता है इस प्रक्रिया में सबसे ऊपर रखे बर्तन का खाना सबसे पहले पकता है। फिर एक के बाद एक निचे रखे बर्तनो का खाना पकता रहता है। और सबसे अंत में निचे वाले बर्तन का भोजन पकता है ये भी एक चमत्कार है मंदिर के अंदर प्रवेश करते ही समुद्र की लहरों की तेज ध्वनि आपको सुनाई नहीं देगी और वहीं दरवाजें के बाहर कदम रखते ही वो ध्वनि आपको सुनाई देने लग जाएंगी इसी तरह मंदिर के बाहर स्वर्ग द्वार है जहां मोक्ष प्राप्ति के लिए शव जलाये जाते है लेकिन जब आप मंदिर के बाहर निकलेंगे तभी आपको लाशों की दुर्गंद आएगी ना की मंदिर में.

#3. कामाख्या मंदिर (असम) - Kamakhya Temple (Guwahati, Assam)

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भारत में शायद ही ऐसा मंदिर हो जो कामाख्या मंदिर जितना रहस्यमयी और मायावी हो ये मंदिर गुवाहाटी से 8 किलोमीटर दूर कामगिरि पर्वत पर स्थित है इसे आलौकिक और तंत्र शक्तियों का प्रमुख स्थल माना जाता है। कामाख्या मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है कहा जाता है की यहां सती देवी का योनिभागृत हुआ था। मंदिर के गर्भगृह में कोई प्रतिमा स्थापित नहीं की गई है इसकी जगह समतल चट्टान के बीच बना विभाजन देवी की योनि को दर्शाता है प्राकर्तिक जननी के कारण ये जगह हमेशा गीली रहती है इस झरने को काफी प्रभावशाली और शक्तिशाली माना जाता है। ऐसी मान्यता है की  इस जल के नियमित सेवन से कई गंभीर बीमारियां दूर होती है कामाख्या मंदिर को समस्त निर्माण का केंद्र माना जाता है क्योंकि समस्त की उत्त्पति महिला योनि को जीवन का प्रवेश द्वार माना जाता है पुरे भारत में रसजवला यानी  मासिक धर्म जिन्हें हम पीरियड भी कहते है को अशुद्ध माना जाता है। लड़कियों को इस दौरान अक्सर अछूत माना जाता है लेकिन कामाख्या के मामले में ऐसा नहीं है यहां हर साल लगने वाले

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Source akm-img-a-in.tosshub.com

 अंबुबाची मेले में पास ही स्थित ब्रह्मपुत्र का पानी तीन दिन के लिए लाल हो जाता है पानी का ये लाल रंग कामाख्या देवी के मासिक धर्म के कारण होता है फिर श्रद्धालुओं की मंदिर में भरी भीड़ उमड़ जाती है इस मंदिर में दिया जाने वाला प्रसाद भी दूसरे शक्तिपीठों से अलग है इस मंदिर में प्रसाद के रूप में लाल रंग का गीला कपड़ा दिया जाता है कहा जाता है की माँ को जब तीन दिन का राजस्वला होता है यानी मासिक धर्म होता है तब मंदिर में सफ़ेद रंग का कपड़ा बिछा दिया जाता है तीन दिन बाद जब मंदिर के दरवाजें खोले जाते है तब वो कपड़ा माता के रक्त से लाल हो जाता है इस कपड़े को अंबुबाची वस्त्र भी कहा जाता है इसे ही वहां आने वाले भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है इस जगह को तंत्र साधना के रूप में सबसे महत्वपूर्ण जगह माना गया है यहां पर साधु ,तांत्रिक और अघोरियों का हुजूम लगा रहता है यहां सबसे ज्यादा काला जादू होता है अगर कोई व्यक्ति काला जादू से ग्रसित है तो वो यहां आ कर अपना इलाज करवा सकता है कामाख्या के तांत्रिक और साधु चमत्कार करने में सक्षम होते है ये बुरी शक्तियों से रक्षा करते है 

#4. शनि मंदिर (शिंगणापुर ) - Shani Shingnapur

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शनि मंदिर महाराष्ट्र में स्थित शनि शिंगणापुरमंदिर का एक अलग ही महत्व है । यहां शनिदेव है लेकिन मंदिर नहीं यहां घर है पर दरवाजें नहीं इस मंदिर में शनिदेव की काले रंग की एक पाषण प्रतिमा है इस प्रतिमा को लेकर एक कथा प्रचलित है ये शिला एक एक गड़रिये को मिली थी शनिदेव ने उस गड़रिये को आदेश दिया की इस प्रतिमा को खुले स्थान पर रखा जाये व इस पर तेल द्वारा अभिषेक किया जाये और शनिदेव का का ये आदेश पा कर उस गड़रिये ने इस प्रतिमा को यहां स्थापित किया तब से यहां इस मूर्ति पर तेल अभिषेक करने की परंपरा चलती आ रही है। ये मूर्ति काले रंग की है ये पांच फिट नो इंच ऊंची एवं एक फिट और छ फिट चौड़ी ये मूर्ति संगमर के एक चबूतरे पर विराजमान है यहां शनिदेव अष्ट प्रहर धुप और आंधी हो तूफान हो जाड़ा हो सभी ऋतुओ में बिना छत्र धारण किये खड़े है लगभग 3000 हजार जनसँख्या वाले इस गांव में किसी भी कर में दरवाजा नहीं है किसी भी घर में सामान को ताला लगा कर नहीं रखा जाता है इतना ही नहीं लोग यहां घर में सूटकेस अलमारी भी नहीं रखते ये सब भगवान शनिदेव की आज्ञा से किया जाता है।

India 5 Most Mysterious Temples

Source images.indianexpress.com

लोग घर की मूल्यवान वस्तुएं  गहने , कपड़े ,रूपये  आदि रखने के लिए थैली या ताक का प्रयोग करते है ये केवल पशु सुरक्षा के लिए दरवाजें पर बांस की लकड़ी लगाते है। ये गांव छोटा है लेकिन यहां रहने वाले सभी लोग समृद्ध है । यहां सभी लोगों के घर आधुनिक तरीको से बनाये गए है फिर भी यहां लोग घरों में दरवाजें नहीं लगवाते है । यहां कोई भी मकान दो मंजिला नहीं है यहां आज तक कोई चोरी नहीं हुई है इस धार्मिक स्थल पर आने वाले भक्त भी अपने वाहनों पर ताला नहीं लगाते है । यहां बहुत बड़ा मेला लगता है लेकिन आज तक किसी प्रकार की चोरी नहीं हुई । इस गांव में युको बैंक की एक शाखा है जहां किसी प्रकार के दरवाजें नहीं लगे हुए है ये दुनिया का एकमात्र बिना दरवाजों वाला बैंक है एक कहावत है कोबरा का काटा हुआ और शनि का मारा पानी नहीं मांगता है जब शुभ दर्ष्टि इसकी होती है तब रंक भी राजा बन जाता है देवता -अशूर मनुष्य -नाग सब शनि की अशुभ दर्ष्टि पड़ने पर नष्ट हो जाते है। नवग्रहों में शनि को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। क्योंकि ये एक राशिफल पर सबसे ज्यादा समय तक विराजमान रहते है.

#5. ज्वालामुखी मंदिर (हिमाचल प्रदेश ) - Jwalamukhi Temple (Himachal Pradesh)

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Source www.missionkuldevi.in

कंगाड़ा घाटी से 30 किलोमीटर दक्षिण में हिमाचल प्रदेश में स्थित ये मंदिर 51 शक्तिपीठों में शामिल है । ज्वालामुखी मंदिर को जोतावाली का मंदिर और नगरकोट भी कहा जाता है। ज्वालामुखी मंदिर को खोजने का क्षेय पांडवो को जाता है उन्ही के द्वारा इस पवित्र स्थल की खोज हुई थी। इस स्थल पर माता सती की जीभ गिरी थी । इस मंदिर में माता के दर्शन ज्योति के रूप में होती है । इस मंदिर का प्राथमिक निर्माण राजा भूमिचन्द्र ने करवाया था बाद में राजा रणजीत सिंह और संसारचंद ने 1835 में इस मंदिर का पुनः निर्माण किया यहां पर भूगर्भ से निकली नौ ज्वालाओ की पूजा होती है । ये मंदिर अन्य मंदिरो की तुलना में अनोखा है क्योंकि यहां किसी मूर्ति की नहीं पृथ्वी से निकलने वाली नौ ज्वालाओ की पूजा की जाती है। इस मंदिर में नौ अलग-अलग जगहों से ज्वाला निकलती है और इन पर ही मंदिर बना दिया गया मंदिर की इन नौ ज्वालाओ को महाकाली , अन्नपूर्णा ,चंडी ,हिंगलाज ,विंध्यावासनी ,महलक्ष्मी ,सरस्वती,अम्बिका,अंजनीदेवी,के नाम से जानी जाती है.ज्वालामुखी मंदिर मंदिर में सदियों से जलती आ रही नौ ज्वालाओ के बारे में आज तक वैज्ञानिक भी पता नहीं लगा पाए है। पिछले कुछ सालो से ऑइल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन यानी की ONGC के वैज्ञानिको ने मंदिर के भूगर्भ को कई किलोमीटर तक छान मारा लेकिन कहीं पर तेल और गैस का अंश भी नहीं मिला.

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कहते ही की जब अकबर ने ज्वाला देवी के चमत्कारों के बारे में सुना तब उसने अपनी सेना बुलाई और खुद मंदिर की तरफ चल पड़ा तब उसके मन में एक शंका हुई और उसने पुरे मंदिर में पानी डलवाया लेकिन फिर भी ज्वाला जलती रही तब अकबर को ज्वाला माता की महिमा पर यक़ीन हुआ। तब अकबर ने मंदिर में सवा मण यानी 50 किलो का छत्र चढ़ाया लेकिन वो छत्र माता ने स्वीकार नहीं किया और वो निचे गिर गया दोस्तों आज भी आप छत्र ज्वाला मंदिर में देख सकते है

दोस्तों  हमारे द्वारा भारत के  5 रहस्य्मयी के बारे दी गई जानकारी में आपको सबसे विचित्र कौनसा मंदिर लगा इसे कमेंट बॉक्स में जरूर बतायें साथ है इन विचित्र मंदिरो की जानकारी अपने दोस्तों के साथ शेयर करे ताकि जब भी इनके आस पास से गुजरे तो यहां जाना ना भूले.