×

भारतीय पैराओलंपिक विजेताओं की संघर्षपूर्ण जीत | Indian Paralympic Winners Motivational Story In Hind

भारतीय पैराओलंपिक विजेताओं की संघर्षपूर्ण जीत | Indian Paralympic Winners Motivational Story In Hind

In : Meri kalam se By storytimes About :-9 months ago
+

भारतीय पैराओलंपिक विजेताओं के जोश भर देने वाले किस्से | Indian Paralympic Winners Motivational Story In Hindi

ज़िन्दगी के हर कदम पर हमें परेशानियों का सामना करना पड़ता है बिना परेशानी ज़िन्दगी की कल्पना करना मुश्किल है। परेशानी बड़ी हो या छोटी इंसान को अपने हौसले रखने चाहिए| मनौवैज्ञानिकों के अनुसार अपनी कठिनाई को इंसान दो नजरिये से देखता है।

1. वो या तो समस्या पर फोकस करता है या
2. समस्या के हल पर

समस्या के उपाय पर फोकस करने वाले कठिनाइयो का डट कर सामना करते है। ऐसे ही कुछ दृढ निश्चयी और साहसी विजेताओं की कहानियां आज हम StoryTimes पर आप के साथ Share कर रहे है। ये कहानी उन पैरा ओलंपिक विजेताओ की जिन्होंने अपने जीवन की परेशानियों का सामना कर के जीवन में जीत हासिल की है। जिन्होंने परेशानियों का सामना तो किया ही साथी ही साथ पूरी दुनिया में अपने देश का नाम भी रोशन किया है। 

देवेंद्र झाझरिया – (Devendra Jhajharia) :-

देवेंद्र झाझरिया की कहानी कुछ ऐसी है की आठ वर्ष की कम उम्र में 11000 वाल्ट का तेज करंट लगने के कारण उनका हाथ काट दिया गया था| लेकिन कोई उन्हें कमजोर ना कहें इसलिए उन्होंने मेहनत की और चैम्पियन बन गए। उन्होंने 2004 पैराओलंपिक और 2016 रियो पैराओलंपिक में Javelin Throw में गोल्ड मैडल जीत कर भारत का नाम रोशन किया। आज ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं, जो उनके नाम न हो।

Indian Paralympic Winners Motivational Story

via

दीपा मलिक – (Deepa Malik) :-

45 वर्षीय दीपा मलिक, की कहानी कुछ ऐसी है की पैराओलंपिक में मेडल लाने वाली प्रथम भारतीय महिला थी जिसने इतिहास रचता था| दीपा मलिक रियो Shotput प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल की विजेता थी। 1999 में रीढ़ की हड्डी में ट्रयूमर की वजह से व्हील चेयर उनकी जरूरत बन गई। लेकिन दीपा मलिक ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने 36 वर्ष की उम्र में तैराक, बाइकर और एथलीट बनने की ठानी और हिमालय की सड़को पर हजारों किलोमीटर की बाइक यात्रा की और कई रिकॉड बनाए। दीपा मलिक ने अपने जीवन की हर मुश्किल को अपनी ताकत बनाकर अपना जीवन जिया है। Javelin Throws, Shot Put और Swimming में उन्होंने विभिन्न नेशनल और इंटरनेशनल प्रतियोगिता में 60 से अधिक बार मेडल जीते है।

Indian Paralympic Winners Motivational Story

via

सुयश जाधव (Suyash जाधव) :-

22 वर्षीय सुयश जाधव की कहानी कुछ इस तरह की है की सुयश जाधव ने छह वर्ष की उम्र में बिजली के करंट के कारण अपने दोनों हाथ गंवा दिये। लेकिन सालो के अभ्यास और लगन से उन्होंने अपनी कमजोरी को हर दिया। और 2016 पैरोओलंपिक में A-Mark प्राप्त कर के भारत के पहले तैराक बने और भारत का नाम रोशन किया।

Indian Paralympic Winners Motivational Story

via

अंकुर धामा (Ankur Dhama) :-

अंकुर धामा रियो पैरा ओलंपिक में जाने वाले प्रथम नेत्रहिन एथलीट है। उत्तर प्रदेश के छोटे से गाँव में जन्में अंकुर की चार वर्ष की कम आयु में आँखो की रौशनी कम होने लगी थी। आँखो की पूरी रौशनी जाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और दिल्ली में अपनी शिक्षा पूरी की। और पैरा-चैम्पियन प्रतियोगिताओं में भाग लिया और भारत के लिए कई मेडल जीते है। अंकुर ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी विकलांगता को एक पहचान बनाली।

Indian Paralympic Winners Motivational Story

via

नरेंद्र रणबीर (Narender Ranbir):-

सोनीपत, हरियाणा के नरेंद्र ने 3 वर्ष की उम्र में ऐक्सीडेंट में अपने माता-पिता को खो दिया और खेती करके उनकी दादी ने उन्हें पाला| 2010 में एशियाई गेम्स में वो रनर थे, लेकिन पीठ और पैर की समस्याओ के होते हुए भी उन्होंने रियो पैरा-ओलंपिक में भाला-फेंक में भारत का प्रतिनिधित्व किया तथा भारत का नाम रोशन किया।

Indian Paralympic Winners Motivational Story

via

रामपाल चाहर (Rampal Chahar):-

26 वर्षीय रामपाल सोनीपत के पास छोटे से गांव से है दुर्भाग्यवश 4 वर्ष की उम्र में खेत में काम आने वाली मशीन से उनका दांया हाथ कट गया था। लेकिन रामपाल चाहर ने अपने विश्वास को कम नहीं होने दिया|उन्होंने हाई-जंप की कई नेशनल और इंटेरनेशनल प्रतियोगितायों में हिस्सा लिया। इंटरनेशनल टूर्नामेंट IPC grand pix जो Tunisia में हुआ, उसमे रामपाल में गोल्ड मेडल जीत कर भारत को गौरवान्वित किया। उन्होंने रियो पैरा-ओलिंपिक में हाई जम्प में Grade A के साथ भारत का प्रतिनिधित्व किया|

Indian Paralympic Winners Motivational Story

via

अमित कुमार सरोहा (Amit Kumar Saroha):-

31 वर्षीय अमित के पास पैरा एशियन गेम्स के 1 गोल्ड मैडल और 2 सिल्वर मैडल मुट्ठी में है| 22 वर्ष की कम उम्र में एक एक्सीडेंट की वजह से उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण उन्हें व्हील चेयर का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन पूर्व जूनियर नेशनल हॉकी प्लेयर रहे अमित ने हिम्मत दिखाई और पैरा स्पोर्ट्स में Discus एंड Club थ्रो में जीत कर भारत का नाम रोशन किया और वे अर्जुन अवार्ड के भी विनर बने| पैरा ओलंपिक्स में डिस्कस थ्रो में वे सांतवे स्थान पे रहे|

Indian Paralympic Winners Motivational Story

via