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सिक्किम की पहली महिला IPS अपराजिता - IPS Aparajita Story In Hindi

सिक्किम की पहली महिला IPS अपराजिता - IPS Aparajita Story In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-5 months ago
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जो मंजिलो को पाने की चाहत रखते,

वो समंदरों पर भी पथरो के पुल बना देते है

दोस्तों अब तक हमनें भारत के कई सफल व्यक्तियों के बारे में जाना है लेकिन जो ऊपर पंक्तिया आज लिखी है वो सिक्किम की बेटी और पहली महिला IPS अपराजिता रॉय के जीवन पर बिलकुल फिट बैठती है जीवन में आयी बड़ी से बड़ी कठिनाइयों का डटकर सामना किया अपनी मेहनत और लक्ष्य के प्रति कड़ी लगन और उसे पाने के जज्बे से उन्होंने ये बड़ा मुकाम हासिल किया  उनके जीवन की ये कहानी आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई है - Woman IPS Aparajita

IPS के बड़े पद को हासिल करने से पहले अपराजिता के पारिवारिक हालत सही नहीं थे बचपन में ही उनके सिर से उनके पिता साया उठ गया लेकिन दोस्तों अपराजिता ने अपने जीवन आयी इन विपरीत परिस्थितियों में खुद को टूटने नहीं दिया और निरंतर अपने लक्ष्य के प्रति कड़ी मेहनत करती रही

नारियों के लिए प्रेरणा बनी, सिक्किम की पहली महिला IPS अपराजिता - Sikkim  First Woman IPS Aparajita Success Story In Hindi

IPS Aparajita Story In HindiSource img.bumppy.com

घर में जब पिता की मौत हो गई थी तब घर के आर्थिक हालात भी काफी बिगड़ गए लेकिन अपराजिता की माँ रोमा उनके परिवार के इन बिगड़ते हालातों को संभाला उन्होंने अपराजिता को पिता और माँ  दोनों बन कर उनके जीवन को आगे बढ़ाया और समय समय पर पैसों की बचत कर अपराजिता को शिक्षित किया

दोस्तों अपराजिता की माँ एक प्राइवेट टीचर थी वो पुरे महीने में जो भी कमाती थी वो अपराजिता को शिक्षा दिलाने में खर्च करती थी

अपराजिता पढ़ाई के मामले में बचपन से काफी होनहार थी जब उनके 12 क्लास के रिजल्ट आये तब उन्होंने अपने परिणाम से सबको चौंका दिया उन्होंने 12 बोर्ड में 95% अंको के साथ टॉप किया था उनके इस होनहार प्रदर्शन के लिए उन्हें कई अवार्ड मिले उन्हें "नामग्याल एकेडमी में बेस्ट गर्ल ऑल राउंडर" और श्रीमती रत्ना प्रधान मेमोरियल ट्रॉफी के सबसे बड़े पुरस्कारों से सम्मानित किया गया

अपनी शिक्षा को निरंतर रखते हुए अपराजिता ने साल 2009 में पश्चिम बंगाल की  "नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ जुडिशल साइंस" से BA LLB की डिग्री प्राप्त की और इस दौरान भी उन्होंने अपने हुनर और मेहनत के दम पर गोल्ड मैडल हासिल किया था

IPS Aparajita Story In Hindi

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कुछ करने का जूनून अपराजिका में कभी ख़त्म नहीं हुआ वो बस कुछ अलग करने के लिए इस धरती पर पैदा हुई थी साल 2010 में उन्होंने यूपीएससी की सिविल सर्विस के एग्जाम दिए इस एग्जाम में उन्होंने कुल 768 वी रैंक पर कब्ज़ा किया तब उन्हें ये रैंक कम लगी और उन्होंने एक बार फिर साल 2011 में UPSC परीक्षा के एग्जाम दिए और इस बार उन्होंने सारे रिकॉर्ड तोड़ 358 वी रैंक पर कब्ज़ा किया ये परिणाम उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि थी

हो भी क्यों ना इस एग्जाम में उन्होंने जो रैंक हासिल की थी उस कारण वो सिक्किम में UPSC परीक्षा में सबसे अच्छी रैंक हासिल करने वाली पहली महिला बन गई थी मेहनत करने में अपराजिता कभी पीछे नहीं रही इसी वजह से उन्हें ट्रेनिंग के दौरान "बेस्ट लेडी आउटडोर " का अवार्ड दे कर सम्मानित किया गया था

अपराजिता अपने जीवन में निंरतर मेहनत करती रही और कभी अपने लक्ष्य से नहीं भटकी अपनी मेहनत के दम पर वो 1958 बैच IPS ऑफिसर ने कई सम्मान हासिल किये उन्हें उमेश चंद्र ट्राफी देकर भी सम्मानित किया जा चूका है

दोस्तों अपराजिता की पढ़ाई के प्रति लगन को उनके परिवार वाले बचपन में ही पहचान गए थे और घर में बिगड़े आर्थिक हालातों के बावजूद उन्होंने उसे पढ़ाई के प्रति हमेशा हौसला बढ़ाया यही वजह है की आज अपराजिता इस मुकाम तक पहुंची है अपराजिता  अपनी पूरी सफलता का श्रेय अपने परिवार और माँ को देती है जिन्होंने बचपन में घर में विपरीत हालातों में उन्हें शिक्षित किया और उनके जीवन को एक सफल जीवन बनाया

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एक समय जब अपराजिता ने जीवन में एक ऐसा दृश्य देखा की एक सरकारी अफसर एक आम नागरिक के साथ बुरा बर्ताव कर रहा है तब अपराजिता को ये सब देख काफी दुख हुआ उसी दिन से उन्होंने खुद को सिविल क्षेत्र में लाने की ठान ली और इस बुरे सिस्टम को बदलने और इसे एक सम्मानजनक बनाने की ठानी

छोटी सी उम्र में पिता का साथ छूटने और घर में आर्थिक मजबूरियों के बावजूद अपराजिता ने अपने लक्ष्य से कदम कभी पीछे नहीं लिए और अपनी मेहनत और लगन के साथ जिस तरह उन्होंने अपनी मंजिल को हासिल किया स्टोरी टाइम्स उनकी लक्ष्य के प्रति इस लगन को सलाम करता है

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