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एक स्टार्टअप जो बच्चों को अंग्रजी सिखाने के साथ दे रहा है कई युवाओं को रोजगार | Krishworks In Hindi

एक स्टार्टअप जो बच्चों को अंग्रजी सिखाने के साथ दे रहा है कई युवाओं को रोजगार | Krishworks In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-8 months ago
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दो दोस्तों ने मिलकर शुरू किया ये स्टार्टअप आज जुड़ गए कई कई लोग | Startup learning English In Hindi

दोस्तों हम कई पुस्तकों में पढ़ते आये है की दुनिया में अंग्रेजी बोलने वाले सबसे ज्यादा व्यक्ति भारत में रहते है। लेकिन दोस्तों फिर भी भारत में हर गली में अंग्रेजी से परेशान लोग भी आपको मिल जायेगे। जिनके सामने अंग्रेजी बोलना वैसे ही है जैसे भैंस के आगे बीन बजाना जी हा दोस्तों ये बिलकुल सही बात है दोस्तों इसे बदला जा सकता है यदि बचपन से घर में ऐसा माहौल बनाया जाये तो हम कोई भी भाषा बोल सकते है । दोस्तों ये माहौल तैयार कर रहा पश्चिम बंगाल में शुरू हुआ एक स्टार्टअप जिसका नाम है - कृषवर्क्स-  krishworks


कृषवर्क्स स्टार्टअप गांव के बच्चों को अंग्रेजी के ज्ञान के साथ कई नवयुवकों के लिए रोजगार भी उपलब्ध करवाता है। इस स्टार्टअप ने पश्चिम बंगाल में आज 14 से ज्यादा सेंटर खोल दिए जिसमे 600 से ज्यादा गरीब किसानो के बच्चों को पढ़ाया जाता है.

Krishworks

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देश हित और ग्रामीण बच्चों को अच्छी शिक्षा देने वाले इस स्टार्टअप की शुरुआत दो लोगो ने मिलकर की शुभजीत रॉय और गार्गी मजुमदार बाद में इन दोनों के हौसले को देख इनके साथ और भी लोग जुड़ गए। इस स्टार्टअप को शुरू करने से पहले शुभजीत और गार्गी  एक बड़ी कंपनी में एक साथ काम करते थे। लेकिन इन दोनों में कुछ अलग करने की जिद्द थी इस कारण दोनों ने ये जॉब छोड़ दी

फिर दोनों ने एक प्लान बनाया की क्यों ना हम बच्चों की स्किल के क्षेत्र में काम करे। इन दोनों ने एक सॉफ्टवेयर बनाने की कोशिश की जो बिना नेट के भी चल सके। क्योंकी उनके प्लान के अनुसार जो वो काम करने वाले थे वहां इंटरनेट की समस्या उनके सामने जरूर आती। इसमें उन्होंने गेमिंग सॉफ्टवेयर की सहायता ली.

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उसी दौरान उन दोनों की मुलाकात IIM के गौरव कपूर से हुई उन्होंने उन दोनों को एक राय दी तुम दोनों कंपनी क्यों नहीं बना लेते । उन्होंने इस बात विचार किया और अपने सभी दोस्तों और मिलने वालो को एक किया और उन्हें स्किल्स सीखना शुरू कर दिया सभी युवाओं को साथ में एक टैबलेट खरीदना पड़ा जिसकी कीमत मार्केट में बीस हजार से कम नहीं थी। सभी बच्चों से 200 रूपये फीस लेकर उसी टैबलेट से उन्हें शिक्षा का ज्ञान देने लगे साथ उन सभी के लिए ये एक रोजगार भी बन गया.

गार्गी और शुभजीत ने मिलकर एक 25 लोगो की टीम बनाई और उसे नाम दिया "कृष्णा" इस पूरी ने अपने सामने एक टारगेट लिया की एक ऐसा एप्प बनाया जाये जिससे बच्चे आसानी से अंग्रेजी सीख सके तब इन्होने तैयार किया "गुरुकुल" एप्प और इस एप्प से पहली बार गांव तंजानिया के बच्चों को अंग्रेजी  सिखाने की शुरुआत की गई इस स्टार्टअप की शुरुआत में इन्हें पैसों की काफी परेशानी हुई और इन्हें कई दिक्क्तों का सामना करना पड़ा लेकिन जब कोई व्यक्ति सफलता को पाने के लिए दिल से मेहनत करता है तब उसे  कहीं से मदद मिल ही जाती उसी तरह इन दोनों को भी आईआईएम कोलकाता, उर इंडियन स्कूल ऑफ़ बिजनस हैदराबाद, सिगम आइकेपी ईडन से इनको वित्तीय मदद मिली. कृष्णा टीम के सदस्यों ने गेम बनने के दौरान कई कंपनियों में काम किया लेकिन उनसे उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ.

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लेकिन किसी ने हार नहीं मानी और अपने बनाये गए सॉफ्टवेयर से ग्रामीण बच्चों को अंग्रेजी की शिक्षा देने लगे धीरे-धीरे इनसे कई गांवो के बच्चे जुड़ने लगे और इनका स्टार्टअप सफल हो गया दोस्तों आज ये स्टार्टअप पश्चिम बंगाल में 14 से ज्यादा सेंटर चला रहा जिसमे ग्रामीण क्षेत्रो से कई बच्चे अंग्रेजी सीखने आते है। और तेजी से इनकी संख्या में इजाफा हो रहा है।

इन दोनों दोस्तों ने अपनी इस सफलता के बाद बताया की " हमने माइक्रो आंत्रप्रेन्योर का निर्माण किया जिनकी सहायता से बच्चों को पढ़ने में आसानी हो। आज हमारे देश में युवाओ की कमी नहीं है जो आज के समय या तो बेहतर शिक्षा ले चुके या कर रहे है। लेकिन इन सभी के हुनर का सही से इस्तेमाल नहीं हो रहा है । उन्हें एक अच्छी और सही सीख की जरुरत है और इस क्षेत्र में हम तेजी से काम कर रहे है। आज हमारी इस मुहीम से गांव के ग्रामीण लोगो के बच्चों को शिक्षा मिल रही है।