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6 लाख से 100 करोड़ की कंपनी के मालिक बना इन दोस्तों का ग्रुप | MP IIT Firiend Startup Story In Hindi

6 लाख से 100 करोड़ की कंपनी के मालिक बना इन दोस्तों का ग्रुप | MP IIT Firiend Startup Story In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-6 months ago
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आज हर कोई चाहता है कि उसकी विदेश में पढ़ाई हो और वो वही पर रहकर पैसा कमाएं। आज विदेश जाकर कमाने वाले लोगो को एक बड़ा आदमी माना जाता है। लेकिन दोस्तो कुछ लोग ऐसे भी होते है जो दुनिया के किसी भी कोने में चले जाएं मगर जब भी अपनी मिट्टी पर आते है उनसे उस मिट्टी से लगाव हो ही जाता है । आज ऐसे भी युवा है जो विदेशो की दुनिया से दुर भारत में ही रहकर देश के लिए कुछ बड़ा करने की सोच रखते है। आज हम एक ऐसी ही उत्तर-प्रदेश 4 दोस्तो की कहानी आपके साथ शेयर करने वाले है। जिन्होंने गांव में ही रहकर देश के लिए वो काम किया जिसे देखकर हर कोई इन पर गर्व कर रहा है।

इस स्टार्टअप से हुई शुरुआत

MP IIT Firiend Startup Story In HindiSource images.financialexpress.com

इस कहानी की शुरुआत होती है मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में आइआइटी व आईआईएम में पढ़ रह छात्रो से। इन्होंने एक ग्रामोफोन का स्टार्टअप शुरु किया जो किसानो के लिए काफी कारगर साबित हुआ। छात्रो के इस स्टार्टअप न सिर्फ किसानो की फसलों को रसायनों से बचाया बल्कि उनका जीवन भी आसान कर दिया। 6 लाख से शुरु हुए इस स्टार्टअप को महज 3 साल में इतनी सफलता मिली की यह 6 लाख से 100 करोड़ तक पहुंच गया।

नौकरी न करते हुए ठानी कुछ अलग करने की

नौकरी के क्षेंत्र में आज आईआईटी व  आईआईएम से निकले स्टूडेंट के लिए नौकरी के क्षेंत्र कई विकल्प होते है। यह अवसर इन्हें भी मिले , लेकिन किसी कंपनी में नौकरी न करने का फैसला कर इन्होंने कृषि क्षेंत्र में कुछ बड़ा करने की ठानी।

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अपने स्टार्टअप की इस पूरी सोच पर ग्रामोफोन के संस्थापक तौसीफ खान ने बताया कि “ उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान ही इस बात के लिए मन बना लिया था की वो किसी कंपनी में नौकरी नही करेगे, बल्कि किसान के हित में कुछ बड़ा करेगे। इसके पीछे मुख्य कारण यह था कि यह सभी एक किसान परिवार के सदस्यो में से थे जो किसान की हर दिक्कत को अच्छें से पहचानते थें।

आईआईटी के बाद उन्होंने इस स्टार्टअप को शुरुआत करने के लिए अहमदाबाद के किसाने से इसकी शुरुआत करते हुए, मध्यप्रदेश तक किसानो से बात की और साल 2016 में इंदौर में ही अपने कार्यलय की स्थापना कर दी।

टीम बनाकर किया काम

इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए एक टीम की जरुरत थी इसके लिए तौसिफ ने अपने चार दोस्तो को मिलाकर एक टीम का निमार्ण किया। ऐसे कुल 50 लोगो की टीम तैयार की। तौसिफ व उनकी टीम ने अपने क्षेत्र के हर किसान से बात की उनसे उनकी खेती से जुड़ी परेशानी के बारे में जाना। तौसिफ के इस कार्य के लिए उनकी उनके स्टार्टअप को शुरुआत में ही सफलता हाथ लगी और उन्हें 24 करोड़ का फंड इस कार्य के लिए मिला। बता दे कि दोस्तो इस समय तौसिफ की कंपनी की वेल्यू 100 करोड़ पार है।

6 लाख से 100 करोड़ का सफर

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आईआईटी करने के बाद तौसिफ किसी भी कंपनी में अपना करियर बना सकते थे मगर उनके दिमाग में कुछ करने योजना चल रही थी। तौसिफ ने अपने र्स्टाटअप को 6 लाख रुपये से शुरु किया। इस स्टार्टअप का लक्ष्य था की फसल में बीमारी लगने पर उसे किस माध्यम से कम लागत में सुधारा जा सकता है। इस पर रिसर्च के बाद उन्होंने किसानो को इसकी दवा उपल्बध करवाई। जो किसानो के लिए एक बड़ा फायदा बनकर सामने आई। किसानो का उत्पादन बढ़ा उनकी लागत में कमी आई। जब इस सफलता का संचार फैला तो सभी किसान उनसे जुड़ने लगे। आज उनकी कंपनी में किसानो की मदद के लिए कॉल सेंटर के साथ कर्मचारीयों की सुविधा है।

जुड़ चुके है कई राज्यो के किसान

मध्यप्रदेश के किसानो से शुरु हुआ यह स्टार्टअप भारत के कई राज्यों के किसानो तक पहुंच चुका है। आज भारत के अलग-अलग राज्यों से उनके करीब ढाई लाख से ज्यादा किसान जुड़ चुके है। अब तक अपने इस स्टार्टअप में तौफिक की टीम करीब 6 लाख किसानो की मदद कर चुकी है। आज हर रोज 3 लाख से ज्यादा किसान कॉल या इंटरनेट से उनके साथ जुड़ते है। साथ ही जो किसान इंटरनेट से नही जुड़ पाता उसके लिए मिस्कॉल की सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई। अपने इस स्टार्ट के बारे में तौफिक कहना है कि उनका इस स्टार्टअप को शुरु करने का मकसद ही किसानो तक मदद पहुंचाना था। जिसमें आज हमारी पूरी टीम सफल हुई है।

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