×

क्यों घूमती है घड़ी की सुइयां पीछे छुपा है ये अजीब राज | Mystery Clock Roam History

क्यों घूमती है घड़ी की सुइयां पीछे छुपा है ये अजीब राज | Mystery Clock Roam History

In : Meri kalam se By storytimes About :-5 months ago
+

समय न महान लोगों के लिए रुका है न आम इंसान के लिए इसका नियम है सदा चलना तभी तो दुनिया में लोग हर कार्य को समय सीमा के अनुसार तय करते है और उसे पूरा करते है पूरी दुनिया रोज घडी की तरफ कई बार देखते है लेकिन कभी किसी ने सोचा है की ये क्यों घूमती है? कभी जानने की कोशिस की क्या आखिर घडी की सुइयों का पश्चिम से पूरब के पीछे क्या वजह है?  आज हम आपकी इस लेख के माध्यम से बताएंगे की आखिर घडी की सुईया क्यों घूमती है और इनका पश्चिम से पूरब की और घूमने के पीछे क्या राज है.

दोस्तों समय को पहचानने की शुरुआत काफी समय पहले से चली आ रही है प्राचीन में प्रहार के अनुसार समय समय के बारे में जानते थे समय जिसे प्राचीन समय में 8 प्रहर से  गिना जाता था और आज भी वैसा है. एक दिन में रात -दिन मिलकर कुल 24 घंटे होते है हिन्दू धर्म में इसके कुल 8 प्रहर होते है .हर प्रहर में 3 घंटे होते है

Mystery Clock Roam History

Source i.imgur.com

हर प्रहर में 3 घंटे यानि हर एक प्रहर 7.30 घंटी का होता है हर घंटी में 24 मिनट होती है इस प्रकार दिन के 4 और रात के 4 को मिलकर कुल 8 प्रहर होते है प्रहर का समय सूर्य की रोशनी और चाँद की चलने की दशा पर निर्भर करता है ये बात हमें पता ही की आज उजाले और अंधेरे का समय पर कितना पक्षपाक होता है ये तो हमारी उस समय गणना की रीति थी उस समय जब लोगों को घडी की दूर दूर तक कोई जरुरत नहीं थी और जैसे समय बदला तो सौर घडी के रूप में हमें पहली घड़ी मिली.

सौर घड़ी के आने से पहले चंद्रमा की चाल को समझ समय का अनुमान लगाया जाता था यदि सूरज हण के बाद चौथे घंटे में चांद दिखता है तो 8 घंटे बाद अष्ट्मी होगी दुनिया को घंटो के हिसाब से समय की गणना भारत की ही देन है इसी कारण चंद्र पंचांग गणना और सौर पंचांग गणना बिलकुल सही व सटीक मानी जाती है चलिए आगे सौर चंद्र घड़ियों की दिशा के बारे में चर्चा करते है

Mystery Clock Roam History

image source

एक रिसर्च में वैज्ञानिको ने बताया की प्राचीन दौर में लोग उत्तरी गोलार्ध पर निवास करते थे उसी समय ये पता लगाया गया और आज उसी वजह से घड़ी का सिस्टम बना है  अगर ये लोग उत्तरी गोलार्ध के बजाय दक्षिणी गोलार्ध पर रहते तो आज कुछ अलग होता और इसी के पीछे ये कारण है की घड़ी की सुइयां भी  पश्चिम से पूर्व की और घूमती है.

खैर देश के ज्योतिषी स्तर पर समय का अनुमान काफी सटीकता से लगाया जाता है।  समय के अनुसार बदलते मौसम और एक अनुमान के अनुमान के अनुसार सूर्य उत्तर दिशा से दक्षिण की और जाता है तब मौसम की पूर्ण जानकरी मिलती है पुराने ग्रंथो में सूर्य की गति और दिशा परिवर्तन के बारे में बताया गया है आपको महाभारत के भीष्म पितामाह की प्रतिज्ञा के बारे में जानकारी होगी.