कैसे हुआ भारत - पाकिस्तान का बंटवारा जानकर हो जाएंगे दंग | Partition of India Pakistan

कैसे हुआ भारत - पाकिस्तान का बंटवारा जानकर हो जाएंगे दंग | Partition of India Pakistan

In : Meri kalam se By storytimes About :-5 days ago
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दोनों देशों की आजादी के बाद सीमा बंटवारे के लिए मिले थे महज 5 सप्ताह | Partition Of India In Hindi

दोस्तों आज हम सभी जानते है की भारत देश को आजाद हुए 71 साल हो गए है। लेकिन दोस्तों इस आजादी के दिन देश मे एक और घटना घटी थी वो वहीं दिन है जिस दिन भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ था। जिस आजादी को पाने के लिए लाखों लोगो ने देश के लिए बलिदान दिया था । आजादी के बाद ये सब मिले तो भी  दो टुकड़ो मे और ये दो टुकड़े थे भारत और पाकिस्तान दोस्तों भारतवर्ष तो उसी दिन खत्म हो गया था बस ये एक दिन है जो आजाद होने के बाद एक देश के दो टुकड़े होने की याद दिलाता है।

कैसे हुआ दोनों देशों का बंटवारा

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दोस्तों आज भारत अपनी आजादी 15 अगस्त को मनाता है वहीं पाकिस्तान हमसे एक दिन पहले 14 अगस्त को मनाता है। इसलिए आज तक दुनिया ये समझती आयी है की देश आजाद होने से पहले ही भारतवर्ष का बंटवारा हुआ था। फिर ये दोनों देश आजाद हुए लेकिन ऐसा नहीं था पहले भारत और पाकिस्तान आजाद हुए, आजाद होने के 2 दिन बाद भारत देश का बंटवारा हुआ लेकिन दोस्तों जिस इंसान ने भारत देश के दो हिस्से किये उस इंसान ने भारत को कभी देखा ही नहीं था। ये आदमी पहली बार भारत देश मे सन 8 जुलाई 1947 को आया था.

किस व्यक्ति ने किया भारतवर्ष का बंटवारा

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ये सब जानने के लिए हमें 71 साल पीछे जाना होगा तो चलिए इसकी शुरुआत करते है जब भारत और पाकिस्तान आजाद हुए तब दोनों देशो की सीमाओं का बंटवारा नहीं हुआ था। ये करना भी काफी मुश्किल था लेकिन इस मुश्किल कार्य की जिम्मेदारी ब्रिटिश देश के क़ानूनवादी "सर सिरिल जॉन रेडक्लिफ- Cyril John Radcliffe " के हाथो मे दी गई। दोनों देशो के बंटवारे मे पाकिस्तान की सीमा का निर्धारण करने वाली "रेडक्लिफ रेखा" का पहली बार प्रकाशन विभाजन आजादी के 2 दिन बाद यानी 17 अगस्त 1947 को हुआ था साथ ही ब्रिटिश सरकार ने अखंड पंजाब और बंगाल के हिस्सों का बंटवारा भारत के संघ ने डोमिनियन ऑफ पाकिस्तान की सम्पूर्ण जिम्मेदारी सर सिरिल जॉन रेडक्लिफ को दी थी।

दोस्तों देशो की सीमा रेडक्लिप 8.8 करोड़ लोगों करीब साढ़े चार लाख वर्ग किलोमीटर के एरिया मे न्यायसंगत बंटवारा करना था। इस के लिए हर राज्यों के आयोग मे दो कांग्रेस और मुस्लिम लीग के कार्यवाहक थे लेकिन अंतिम निर्णय को रेडक्लिप के हाथो मे ही था।

सीमा बांटने के लिए मिला महज 5 सप्ताह का समय

लेकिन इस विषय मे सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बात ये थी की सर सिरिल जॉन रेडक्लिफ को भारत के भूगोल के बारे ज्यादा जानकारी नहीं थी। और वो इस मामले से पहले कभी भारत आये भी नहीं थे वो तो भारत ही 8 जुलाई 1947 को आये  तब उन्हें ये भी पता नहीं था की क्या करना है और साथ ही दोस्तों इस काम को पूरा करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने  रेडक्लिफ को महज 5 सप्ताह का समय दिया था। और ना ही ब्रिटिश सरकार ने उन्हें भारत के क्षेत्रीय जानकारी जानने का समय दिया था। बाद मे रेडक्लिप ने भारत के कुछ पुराने नक्शो और सभी समुदायों के जनमत के हिसाब से एक आधार बनाया और रेडक्लिप ने कुछ नक़्शे और जाति-धर्म के मत के आधार पर ही देश का बंटवारा कर दिया। रेडक्लिप ने अपनी समय सीमा को देखते हुए गांवो की सीमाओं के मामलों ज्यादा ध्यान नहीं दिया और इसका नतीजा ये हुआ कि गांवो के कई भाग भारत मे और कुछ भाग पाकिस्तान मे ही रह गए और दोनों देशो के सीमाओं कि रेखा घनी आबादी के से ना जाकर उन गांवो के बीच से निकली।

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दोस्तों रेडक्लिप कि अनदेखी के कारण दोनों देशो कि विभाजन कि रेखा एक घर के बीच मे से गुजरी इस घर के कुछ कमरे एक देश और कुछ हिस्से दूसरे देश मे चले गए अगर यही दोनों देश सावधानी से करते तो इतनी बड़ी भूल नहीं होती.

इस कार्य को रेडक्लिप ने 9 और 12 अगस्त को पूर्ण कर लिया था । लेकिन विभाजित हुए क्षेत्रों मे सीमा को लेकर हुए विवाद के कारण देरी हो गई और इसके बाद "रेडक्लिप रेखा Radcliffe Line" दोनों देशो के विभाजन के 2 दिनों बाद 17 अगस्त 1947 को पूरा किया गया। 17 अगस्त 1947 के बाद दोनों देशो के बीच पूर्ण विभाजन हो गया और "रेडक्लिफ रेखा" भारत और पाकिस्तान के बीच कि सीमा बन गई.

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