×

पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी की लड़ाई | Prithviraj Chauhan and Muhammad Ghori war in Hindi

पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी की लड़ाई | Prithviraj Chauhan and Muhammad Ghori war in Hindi

In : Viral Stories By storytimes About :-1 year ago
+

पृथ्वीराज चौहान ने आखिर ऐसे मारा था मोहम्मद गौरी को

चौहान वंश में जन्मे पृथ्वीराज चौहान का जन्म 1166 में अजमेर के राजा के घर हुआ था| उनके पिता का नाम सोमेश्वर और माता का नाम कमला देवी था| पृथ्वीराज बाल्य अवस्था से ही कुशाग्र बुद्धि एवं शस्त्रों का प्रयोग करने में निपुण थे| पृथ्वीराज चौहान शब्द भेदी बाण चलाने की कला जानते थे जो कि अविस्मरणीय था| उन्होंने शब्द भेदी बाण चलाने का अभ्यास बाल्य काल से ही शुरू कर दिया था जिससे वे किसी की भी आहट सुन कर ही लक्ष्य पर निशाना लगा सकते थे| उनका निशाना अचूक था| लेकिन मात्र 11 वर्ष की आयु में ही उनके पिता का निधन हो गया और उनके पिता के बाद उन्हें राजगद्दी पर बिठाया गया| उन्होंने अपने युद्ध कौशल एवं पराक्रम से अपने साम्राज्य का विस्तार किया|

Prithviraj Chauhan history in hindivia : newshunt.com

उनके बचपन के मित्र का नाम चंदबरदाई था | पृथ्वीराज चौहान की माता कमला देवी के पिता दिल्ली के शासक थे अतः कमला देवी के पिता ने अपने दामाद और बेटी के सामने यह प्रस्ताव रखा कि उनके बाद राज्य को पृथ्वीराज चौहान संभाले| पृथ्वीराज चौहान के माता-पिता (parents) ने यह सहर्ष ही स्वीकार कर लिया|

पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी

पृथ्वीराज चौहान द्वारा संयोगिता को ले जाने से महाराज (king) जयचंद क्रोधित थे| परिणाम ये हुआ कि दोनों राज्यों (state) के बीच युद्ध हुआ| इसी का फायदा उठाते हुए मोहम्मद गौरी ने भारत पर आक्रमण कर दिया| सबसे पहले उसने पंजाब पर चढ़ाई की पृथ्वीराज की सेनाओ ने गौरी को आगे नही बढ़ने दिया| लेकिन बुजदिल अफगानी सेनाएँ रात्रि में आक्रमण कर देती जब पृथ्वीराज की सेना (Army) घायलों के उपचार में लगी होती|

Prithviraj Chauhan history in hindivia : thedemocraticbuzzer.com

मोहम्मद गौरी ने भी रात में आक्रमण किया जिससे हमारी सेनाओं को संभलने का समय नही मिला| पराक्रमी पृथ्वीराज चौहान ने अपनी सेनाओ को युद्ध क्षेत्र की ओर कूच करने का आदेश दिया| दोनों सेनाओं की भिडंत तराईन नामक जगह पर हुई| राजपूतो के पराक्रम ने मोहम्मद गौरी की सेनाओं को पीछे हटा दिया और भागने पर मजबूर कर दिया|

मोहम्मद गौरी को बंदी बनाकर पृथ्वीराज चौहान के सामने लाया गया| जहाँ मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज के समक्ष दया की याचना की और पृथ्वीराज ने भी उसे क्षमा कर दिया| इसके बाद भी मोहम्मद गौरी के आक्रमणों (attack) का यह क्रम चलता रहा और पृथ्वीराज उसे क्षमा पर क्षमा करते रहे|

जब मोहम्मद गौरी ने फिर आक्रमण (attack) किया और इस बार पृथ्वीराज चौहान पराजित (Defeated) हुए और मोहम्मद गौरी उन्हें अपने साथ बंदी बनाकर अफ़गान ले गया| वहाँ उसने मानवता की सारी हदे पार करते हुए पृथ्वीराज चौहान की आँखों (eyes) में लोहे की गरम सलाखें डाल दी| इससे बड़ा दुष्कृत्य और कुछ हो नही सकता था|

मोहम्मद गौरी की मौत

पृथ्वीराज जब बंदीगृह में थे उस समय उनके मित्र चंदबरदाई भी वहाँ पर मौजूद थे| चंदबरदाई ने पृथ्वीराज चौहान को अपने और अपनी संस्कृति के अपमानो का बदला लेने के लिए उन्हें प्रेरित किया| दोनों ने एक योजना (plan) बनाई|

योजना अनुसार चंदबरदाई ने मोहम्मद गौरी के सामने पृथ्वीराज की शब्द भेदी बाण चलाने की कला का बढ़ा चढ़ा कर वर्णन किया| मोहम्मद गौरी को यह सुनकर हँसी आयी|

Prithviraj Chauhan history in hindivia : historydiscussion.net

वो यह सोचने लगा कि एक अँधा व्यक्ति कैसे धनुष बाण चलाकर लक्ष्य को बेध सकता है| साथ ही चंदबरदाई के मुख से पृथ्वीराज चौहान की प्रशंसा सुनना उसे अच्छा नही लगा| उसने चंदबरदाई को कहा कि यदि पृथ्वीराज चौहान लक्ष्य पर निशाना लगाने में असफल रहा तो दोनों को मौत के घाट उतार देगा|

मोहम्मद गौरी ने तीरंदाजी की प्रतियोगिता (compatation) का आयोजन किया| जहाँ पृथ्वीराज चौहान को अपने शब्द भेदी बाण की कला का प्रदर्शन करना था| पृथ्वीराज के मित्र चंदबरदाई ने मोहम्मद गौरी से कहा कि पृथ्वीराज एक राजा है| राजा को केवल एक राजा ही आज्ञा दे सकता है अतः आप ही पृथ्वीराज चौहान को तीर चलाने का हुक्म (order) दीजिये| जब मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज को तीन बार बाण चलाने को कहा तो पृथ्वीराज चौहान ने उसकी आवाज पर बाण साधकर उसका वहीँ अंत कर दिया|