पिता चलाते थे तांगा बेटी है आज भारतीय हॉकी टीम की कप्तान | Hockey Captain Rani Rampal Story In Hindi

पिता चलाते थे तांगा बेटी है आज भारतीय हॉकी टीम की कप्तान | Hockey Captain Rani Rampal Story In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-4 years ago
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रानी रामपाल ! इस नाम के बारे में अभी कुछ ही लोगो को जानकारी है जिन लोगो के लिए यह नाम नया है उन्हें बता दे की रानी रामपाल भारतीय महिला हॉकी की टीम की कप्तान है। रानी रामपाल का यह सफर भी कप्तान विराट कोहली के समान है एक टीम प्लेयर से उन्होंने यह कप्तानी का मुकाम हासिल किया। रानी रामपाल का जन्म खेल में सबसे आगे रहने वाले हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले मारकंडा गांव में हुआ था। खेल भूमी में जन्मी रानी ने 6 साल की उम्र में ही हॉकी खेलना शुरु कर दिया था। हॉकी के प्रति इतना जुनून था की उनके शानदार खेल की वजह से उन्हें महज 14 साल की उम्र में भारतीय महिला सीनियर उन्हें हॉकी टीम में शामिल कर लिया गया। देश के लिए हॉकी टीम में शामिल होना उनके लिए गर्व की बात थी दोस्तो आज रानी भारतीय सीनियर टीम का कप्तान के तौर पर नेतृत्व कर रही है। दोस्तो रानी की हॉकी के प्रति लगन व मेहनत का ही नतीजा है की एक छोटे से गांव से निकली प्लेयर ने दुनिया भर में पहचान बना ली।

मुश्किल भरा रहा रानी का यह सफर | India Woman Hockey Captain Rani Rampal

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दोस्तो रानी का भारतीय हॉकी टीम में चयन होने से लेकर टीम की कप्तान बनने का यह सफर बेहद ही कठीन था। रानी का जन्म सामान्य परिवार में हुआ । परिवार का पेट पालने के लिए उनके पिता रिक्शा चलाकर ईटें बचते थे। पिता की इस कमाई से घर की आम जरूरतें भी पुरी नही हो पाती थी रहने के लिए पक्की छत भी नही थी बारिश के दिनो में घर में पानी जमा हो जाता था। परिवार की इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद रानी ने हार नही मानी उन्होंने लड़ाई लड़ी और महिला हॉकी में शामिल होने से लेकर आज वो टीम का नेतृत्व कर रही है।

अपने इस सफर के बारे मे बात करते हुए रानी ने द बेटर इंडियाको बताया की मेने बचपन में ही निश्चय कर लिया की खेलना तो हॉकी ही है, लेकिन घर की परिस्थितियां अलग थी मेरे पिता के पास इतने पैसे नही थे की वो मुझे अच्छी एकेडमी में हॉकी की ट्रेनिंग व किट दिला सकें। कई बार मैंने नंगे पांव भी ट्रेनिंग की।

रानी ने बाताया की मै ऐसे परिवार में पली बढ़ी जहां आज के बदलते दौर में भी महिलाओं को चारदीवारी में ही रखा जाता है। जब मैंने हॉकी खेलने के बारे में अपने माता-पिता को बताया उनके साथ मैंरे सभी रिश्तेदारों ने इसके लिए इंकार कर दिया। मैंरे माता-पिता एक सामान्य से गांव से थे वो अनपढ़ थे उन्हें बस इस चीज का ज्ञान था की लड़कियां खेल में आगे नही बढ़ सकती।

मेरा सपना था हॉकी खेलना, लेकिन मेरे इस सपने के लिए माता-पिता तैयार नही थे। वो समय मुझे आज भी याद है जब उनको काफी मानने के बाद भी वो जब नही माने तब मैंने उन्हें कहा की बस मुझे एक मौका दे दो और एक बार मुझे मैदान में हॉकी खेलते हुए देख लो। यदि फिर भी आपको ऐसा महसूस हो की मेरा खेल अच्छा नही है तो हमेशा के लिए हॉकी खेलना बंद कर दूंगी।

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जब मैने हॉकी के मैदान में कदम रखा और हॉकी खेलने की शुरुआत की तब मैरे माता पिता को कई रिश्तेदार ताने देते की “ क्या करेगी हॉकी खेल कर बस छोटे कपड़े पहन कर मैदान में दोड़ेगी और हमारी इज्जत खराब करेगी। आज वो ही लोग मेरी सफलता के बाद मेरी पीट थपथपाते है और जब भी घर जाती हूं तक स्वागत करते है।

भारतीय हॉकी टीम  में के लिए चयन होना इनता आसान नही था। लेकिन मैने अपनी मेहनत पर विश्वास रखा और दिन रात एक करते हुए हॉकी की ट्रेनिंग करती रही। ऐसा कोई दिन नही था जब मैंने ट्रेनिंग मिस की। यह मैने कोच बलदेव सिंह की देन है उन्होंने अनुशासन के साथ हॉकी खेलना भी सीखाया। आज जिस मुकाम पर मै हूं यह सब उन्हीं की बदौलत हूं।

भारतीय महिला हॉकी टीम को एक समय अंतरराष्ट्रीय स्तर सबसे कमजोर टीम में गिना जाता था। लेकिन बीतें कुछ महिनो की बात करें तो भारतीय महिला हॉकी टीम काफी  मजबूत नजर आ रही है इस दौरान भारतीय हॉकी टीम ने स्पेन आयरलैंड जैसी मजबूत टीमों को भी मैच में पटकनी दी।

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भारतीय महिला हॉकी टीम के खेल में बदलाव हुआ जहां साल 1980 के 36 साल बाद 2016 में भारतीय महिला हॉकी टीम ने रानी के नेतृत्व में 2016 समर ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई किया। रानी ने एक मैंच में विजय गोल कर भारतीय महिला हॉकी टीम का ओलंपिक टिकट फाइनल कर दिया था।

रानी के नेतृत्व में टीम लगातार अच्छा खेल दिखा रही थी। हाल ही अगस्त माह में जापान की राजधानी टोक्यो में ओलंपिक टेस्ट इवेंट का आयोजन हुआ जहां भारतीय टीम ने जापान की टीम को फाइनल में 2-1 से पटकनी दी। भारतीय महिला हॉकी टीम ने रानी के नेतृत्व में साल 2018 में एशियाई खेलों में सिल्वर मैडल हासिल किया था। राष्ट्रमंडल खेलों में टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया और चोथे पायदान पर रही वही लंदन में आयोजित विश्व कप में आंठवा स्थान हासिल हुआ।

रानी की हॉकी में प्रमुख उपलब्धियां | Rani Rampal  Achievements In Hindi

एक सामान्य से परिवार में ताल्लुक रखने वाली रानी को जब हॉकी खेलने का अवसर मिला तब उन्होंने अपने खेल से दिखा दिया की वो देश के लिए कुछ कर सकती है। 14 साल की उम्र में टीम में शामिल होने वाली रानी ने साल 2009 में रुस में आयोजित चैपियन चैलेंज टूर्नामेंटके फाइनल मुकाबले में रानी ने 4 गोल दागे और टूर्नामेंट की टॉप गोल स्कोरर रही रानी टूर्नामेंट की यंग प्लेयर ऑफ टूर्नामेंट " रही।

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रानी का नाम साल 2010 में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलो में एफआईएच की यंग वुमन प्लेयर ऑफ द इयरमें भी शामिल हुआा।

साल 2010 में ग्वांगझु में आयोजित एशियाई खेलों अच्छे प्रदर्शन चलते रानी को “ एशियाई हॉकी महासंघ” की “ ऑल स्टार टीम में शामिल किया गया।

“महिला हॉकी विश्व कप” में 7 गोल दाग कर भारतीय टीम को 0 रैंकिग से 7 वे पायदान पर पहुंचाया।

साल 2013 में आयोजित हुए “ जूनियर हॉकी विश्व कप” में भारत का प्रतिनिधित्व किया टीम ने पहली बार इस प्रतियोगिता में ब्रोंज मेडल हासिल किया। इस टूर्नामेंट में रानी को बेहतरीन प्रर्दशन के लिए “ प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट” चुना गया।

अंत में गीता ने कहा की उनके लिए भारतीय महिला हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व करना गर्व की बात है”

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