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महापंडित रावण की जन्म गाथा | Ravana Birth Mystery In Hindi

महापंडित रावण की जन्म गाथा | Ravana Birth Mystery In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-8 months ago
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कैसे हुआ था रावण का जन्म | Ravana Birth Mystery In Hindi

बहुत समय पहले की बात है सुकेश नाम का एक राक्षस था जिसके तीन बड़े ही बलशाली पुत्र थे| जिनके नाम थे माल्यवान, सुमाली, और माली, तीनों भाइयों ने कठोर तपस्या करके परमपिता ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके यह वरदान माँगा कि हम भाइयों का प्रेम अटूट बना रहे और हमे कोई पराजित ना कर सके| अतः अपराजित होने का वरदान पाकर यह तीनों भाई निर्भय हो गये थे| अपने राक्षसी आचरण के चलते ये तीनो ऋषि - मुनियों को सताने लगे थे|

तीनों भाईयो ने विश्वकर्मा को अपने वश मे कर लिया था और उस पर यह जोर डाला था कि वह उनके लिए एक सुन्दर से नगर का निर्माण करे|  तब भगवान विश्वकर्मा ने विवश होकर अपनी बनाई हुई लंका नगरी का पता बता दिया था| इस तरह वे तीनों राक्षस भाई अपने परिवार और बंधुओं के साथ लंका मे जाकर रहने लगे|

इन तीनों राक्षस भाइयों मे से एक भाई माल्यवान के सात पुत्र उत्पन्न हुए थे| दूसरे भाई सुमाली के दस पुत्र और एक पुत्री उत्पन्न हुई थी| सबसे छोटे भाई माली के चार पुत्र उत्पन्न हुए थे| तीनों भाईयो के इन पुत्रो ने ऋषि और मुनियों का जीवन दुश्वार कर दिया था | ऋषि और मुनियों को जब इन दुष्टों से बचने का कोई उपाय नहीं सुझा तो ऋषि - मुनि भगवान विष्णु की शरण में पहुंच गये| भगवान विष्णु ने उन्हें एक वचन दिया कि वह जल्द ही इन दुष्ट राक्षसो का नाश कर देंगे| जब राक्षसो को यह पता चला कि भगवान विष्णु ने उनका नाश करने कि बात कही है तो वह सभी दुष्ट राक्षस क्रोधित हो गये और एक

Ravana's Birth Mystery In Hindi

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विशाल सेना के साथ देवराज इन्द्र पर आक्रमण करने के लिए चल पड़े| राक्षसो की आक्रमण की ख़बर जैसे ही भगवान विष्णु को लगी तो वह उन राक्षसों का श्रृंगार करने के लिए आ गऐ और उन्होंने माली सहित सारी राक्षस सेना का वध कर दिया| दो चार राक्षस जो की भगवान विष्णु के हाथों से बच गये थे वह भाग कर वापस लंका में चले गये| यह देखकर माल्यवान एक बड़ी सेना लेकर भगवान विष्णु से युद्ध करने के लिए आ गया| तब भगवान विष्णु ने माल्यवान के साथ तीनो भाईयो के सभी पुत्रो और सारी राक्षस सेना का श्रृंगार कर दिया| राक्षस सुमाली को जब अपने दोनों भाइयों और उनके पुत्रों के साथ अपने भी सभी पुत्रों के मारे जाने की खबर मिली तो वह बहुत ही घबरा गया था और अपने बचे हुए बन्धुओ और परिवार के साथ लंका को त्याग दिया और वहाँ से चला गया

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तब लंका पर भगवान कुबेर का राज्य स्थापित हुआ| राक्षसों के इस विनाश से राक्षस सुमाली बड़ा ही दुखी हुआ और उसने अपनी बेटी जिस का नाम कैकसी था उससे यह कहा की "बेटी मैं चाहता हूँ की तुम राक्षस वंश के कल्याण के लिए ऋषि महर्षि विश्रवा के पास जाओ और उन से पुत्र प्राप्त करो क्योंकि उन परम पराक्रमी महर्षि से उत्पन्न पुत्र ही राक्षस वंश की रक्षा कर सकता है। कैकसी अपने पिता की आज्ञा से उस समय महर्षि विश्रवा के पास पहुंचीं उस समय भयंकर आंधी चल रही थी और आसमान में बिजलिया कड़क रही थी| कैकसी इन सब का सामना करके महर्षि विश्रवा के पास पहुँची और महर्षि विश्रवा के सामने अपना मत रखा| यह सुनकर महर्षि विश्रवा ने कैकसी से कहा की मैं तुम्हारी इच्छा तो पूर्ण कर दूंगा परन्तु यह वातावरण बता रहा है की तुम्हारी संतान बड़ी ही दुष्ट होगी| यह सुनकर कैकसी बोली आप जैसे महात्मा से मैं दुराचारी संतान पाने की आशा नहीं करती| महर्षि विश्रवा ने कैकसी से की कहा तुम्हारा सबसे छोटे पुत्र सदाचारी और महात्मा प्रकृति का होगा|

इस प्रकार उस कैकसी से रावण, कुम्भकर्ण, शूर्पणखा, और विभीषण का जन्म हुआ और रावण के जन्म से पहले ही पता चल गया था की रावण बड़ा ही दुराचारी होगा|