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इतिहास के पन्नों के 5 खतरनाक कार्य जो थे लीगल | Strange History of World In Hindi

इतिहास के पन्नों के 5 खतरनाक कार्य जो थे लीगल | Strange History of World In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-3 months ago
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दोस्तों आज वर्तमान समय में बड़ी टेक्नोलॉजी को देख आपको ऐसा लगता है की इस समय दुनिया में सबसे अनोखे कार्य हो रहे है लेकिन दोस्तों एक बार अपनी सोच को थोड़ा पीछे ले जाकर इतिहास की इन बातों को जरूर जान ले दोस्तो आज हम बात करने वाले है इतिहास के उन अजीबोगरीब कार्यो के बारे में जिन्हे आज सभी देशो की सरकारों ने बैन कर रखा है.

5. कोकीन ट्रीटमेंट

Strange History of World In Hindi

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दोस्तों जहां आज कोकीन को रखना या उसका सेवन करते हुए पाए जाने पर कानून के द्वारा सजा का प्रावधान है लेकिन दोस्तों आज से 100 वर्ष पहले कोकीन को इतना खतरनाक नहीं समझा जाता था साथ ही उस दौर में कोकीन मेडिकल स्टोर पर आसानी से मिल जाता था तब कोकीन का इस्तेमाल बिना किसी डॉक्टर की सलाह के ले लिया जाता था और तब कोकीन का प्रयोग बच्चो को दर्दनिवारक दवा के रूप में भी दिया जाता था जो एकदम लीगल था उस दौर में बाकि दवाइयों के साथ कोकीन का भी प्रचार किया जाता था साथ कोल्ड्रिंग की दुनिया में महशूर कोका कोला में भी 9 मिलीग्राम तक कोकीन का इस्तेमाल किया जाता था साथ ही इसमें कुछ मात्रा केफ़िन की भी सम्मलित होती थी लेकिन साल 1903 में कोका कोला ने इसे अपने ब्रांड से हटा दिया

4. बच्चों को डाक के माध्यम से एक से दूसरी जगह भेजना

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दोस्तों इस लाइन को पढ़ने थोड़ा अजीब लगा होगा की डाक के द्वारा बच्चे भेजना ये किसी मजाक है लेकिन दोस्तों 20 वी शताब्दी में अमेरिका के लोग डाक सेवा के माध्यम से अपने बच्चो को एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से भेज सकते थे और तब यह गैरकानूनी भी नहीं था हर बच्चे को डाक से भेजने के लिए 15 से 20 सेंट खर्च होते थे अमेरिकन लोग अपने पैसो के सेविंग और बच्चो के देखभाल के लिए अपने रिश्तेदार के पास भेज देते थे अब आप सोच रहे होंगे की इन्हें किस सिस्टम से भेजा जाता था दोस्तों डाक उन बच्चो के साथ एक स्टाम्प लगता था जिसमे उनका नाम और बच्चो से जुड़ी पूर्ण जानकारी होती थी और इस जानकारी से बच्चा अपने सही पते पर पहुंच जाता था

3. बच्चो के पिंजरे

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1930 में बच्चो की देखभाल के लिए बिट्रिस परिवार लोहे से बनें पिंजरे का इस्तेमाल करते थे जब महिलाये घर में काम के दौरान व्यस्त होती थी तब बच्चो को इस जाली के पिंजरे में बैठा दिया जाता था और वो उसमे चैन से नींद ले लेता था दोस्तों इस बात पर विश्वास नहीं होता की उस दौर में बच्चो की रखा के लिए इन पिंजरों को सबसे सुरक्षित माना जाता था इन लोहे का पिंजरों का विचार द लूथर एम्मेट होल्ट की पुस्तक " The Care And Feeding Of Children " से लिया गया ताकि बच्चें को सुरक्षित जगह मिल सके और उसकी अच्छी केयर हो सकें हालांकि दोस्तों इसके लिए डॉक्टर्स हमेशा माना करते थे लेकिन जिन लोगो के पास बच्चो के खेलने के लिए जगह नहीं थी वो इसे प्रयोग में लेते थे

2. इलाज के संदेहात्मक तरीके

Strange History of World In HindiSource cdn.history.com

दोस्तों प्राचीन समय में वैध के पास सक्रमण से जुड़ी बीमारी का कोई तोड़ नहीं था और वे इसका ट्रीटमेंट करने के लिए अलग अगल तरीको को प्रयोग में लेते थे पहला है ब्लड लेपिंग यानी रक्त स्राव और इस विधि का कई बीमारियों का इलाज करने के लिए किया जाता था उसमे जुबान काट देना जिससे व्यक्ति की हकलाने की बीमारी सही हो जाती थी साथ ही दिमाग की सर्जरी के लिए इलेक्ट्रिक के सोक एक आम बात थी लेकिन दोस्तों इन सभी तरीको का परिणाम काफी खतरनाक होता था 19 वी सदी में इलाज का एक तरीका और काफी चर्चित हुआ लीच ट्रीटमेंट इस ट्रीटमेंट में मरीज की बॉडी पर काफी मात्रा में चोक चिपका दी जाती थी जो उसकी बॉडी से भारी मात्रा में खून पी जाती थी 

1.रेडियोएक्टिव खिलौने

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Source beta.techcrunch.com

दोस्तों 1950 में रेडिशयन को काफी सुरक्षित माना जाता था और उस दौर में इससे जुड़े कई कंपनियों के खिलोने काफी ज्यादा चलन में थे इनके कुछ खिलोने ऐसे थे जो साइंस एक्सपेरिमेंट पर आधारित थे जिनके कुछ मात्रा में असली पोलोनियम और यूरेनियम का प्रयोग किया जाता था साथ ही दोस्तों हाथ में पहनने वाली घड़ियों पर ऐसा पेंट किया जाता था जिससे वो रात के समय काफी चमकता था इसमें भी कुछ मात्रा में रेडियम को प्रयोग में  लाया जाता था खास बात दोस्तों जिस पेंट को वाच पर लगाया जाता था उसके उस ब्रश को मुँह से सीधा किया जाता था जिस वजह से रेडियम की कुछ मात्रा उनके शरीर में चली जाती थी रिपोर्ट के अनुसार वहां काम करने वाले सभी स्टाप के शरीर में करीब 3 सो ग्राम रेडियोएक्टिव रेडियम चला गया और इस वजह से उन्हें कैंसर और हड्डियों से जुड़ी बीमारिया हो गई और इस बीमारी का नाम था रेडियम झा.

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