माननीय प्रधान-मंत्री जी के नाम एक खुला खत | आप भी करें एक सवाल प्रधान-मंत्री से

माननीय प्रधान-मंत्री जी के नाम एक खुला खत | आप भी करें एक सवाल प्रधान-मंत्री से

In : Meri kalam se By storytimes About :-5 years ago
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माननीय प्रधान-मंत्री जी,

हिंदुस्तान की सम्पूर्ण जनता ने आपको सिर आँखों पर ऐसे ही ना बिठाया था,उन्हें लगा था कि आप उनके दुःखों के तारणहार बनेगें।लगा भी इसलिए क्योंकि  आप बात भी तो देश के लोगों कि करते थे। सच में यह भोली-भाली जनता अपने दुखों से जार-जार है,अब ऐसी सूरत में आपकी बातों में आ गए तो क्या गलत किया।

कुछ समय पहले तक इस भोली-भाली जनता के बहुत से सहारे हुआ करते थे।लोगो का एक दूसरे में बहुत भरोसा था,आपने तो उस भरोसे को भी तार-तार कर दिया,जब भी आप पब्लिक से रूबरू हुए हैं,तब तब कुछ ना कुछ नया करने का ऐलान किया है। पब्लिक बहुत पीछे रह जाती है और आप बहुत आगे।तारतम्य ही नहीं है आपका और जनता का,जनता का काम है अच्छे के लिए भरोसा रखना,लेकिन आप तो इतने गतिवान निकले कि जनता को पता ही नहीं चल रहा कि ये भरोसा है या चमत्कार।हर दिन आपके श्री-मुख से कोई ना कोई चमत्कार हो रहा है,आम इंसान मंत्रमुग्द होकर स्वयं कि बर्बादी का चमत्कार देख रहा है।

और आपने तो आजकल एक नायब सी चीज का इनोवेशन कर लिया है उसी से दनादन चमत्कार हुए जा रहे हैं। वाणी में चमत्कार हो रहे हैं, आये दिन कुछ ना कुछ घोषित हो रहा है।आप बहुत तेज़ दौड़ रहें हैं प्रधान-मंत्री जी,दिन रात एक किये हुए हैं,दो-दो घंटे कि नींद से काम चला रहें हैं।फिर भी देश कि जनता बहुत परेशान हैरान और तंगहाल है,पढ़ें-मंत्री जी एक बार थोड़ी दौड़ने कि गति काम कर अब तक का आंकलन कर लेते तो अच्छा होता,मैं जनता हु आपके पास बिलकुल भी फुर्सत नहीं रुकने या ठहर जाने कि पर फिर भी आपसे आग्रह है एक बार थोड़ा रुककर देश कि निरीह जनता पर दृटिपात कर लेते।

कितने सपने बनाये आपने अपने मौखिक उद्गारों से लेकिन अभी तक किसी का सपना सच होना तो दूर कि बात है,उस सपने पर उपजे यकीन को भी तो बरकरार नहीं रख पा रहें हैं,किसने कहा था, मान्यवर कि इतने सारे सपने जनता को दो।आपका कुछ नहीं गया पर पब्लिक तो सपने देखने से भी डरने लगी है।

आपके द्वारा कि गयी नोटबंदी कि उद्घोषणा से लगा था कि अब आप सम्पूर्ण काला-धन ले आएंगे,पर क्या कालेधन का एक भी पैसा आया। इतने बड़े बदलाव कि आधी-अधूरी आपकी तैयारी बहुत भारी पड़ी है मान्यवर,लगता है आप बहुत उतावले हैं बदलाव करने के तभी तो दूसरा वार GST-लाकर कर दिया अब इसकी समझ ना तो व्यापारी को है ना ही आम जनता को,यह जटिलतम रोग कि तरह परेशान कर रहा है आम जन को।व्यापारी आपको थकाने/छकाने के लिए काम रोके बैठा है और बेचारी मेहनतकश जनता हाहाकार कर रही है। मोदी जी तालियां भले ही कम पिटवा लीजिये पर वास्तविकता के आवश्यक काम जरूर कीजिये।मैं यह तो नहीं कहूंगा कि जनता आपको देख लेगी,क्युकी जनता का शोषण होना ही है, यह कभी ना रुकने वाला सिलसिला है जो ना जाने कितने युगों से चला आ रहा है। पहले कहा करते थे आप कांग्रेस पार्टी ने देश को लूटा है,अब क्या देश नहीं लूटा जा रहा क्यों यह सरकार जिसमे आप प्रधान हैं धृतराष्ट्र बनी बैठी है।जिसको भी यह लगे कि वो कमजोर हुआ है या फिर कोई कानूनी पेचीदगी आने वाली है वो समस्त नेता भाग भाग के बीजेपी ज्वाइन कर रहें हैं।आज यह समझ पाना बहुत मुश्किल हो गया है कि यह पार्टी बीजेपी या तथाकथित कांग्रेस ही है।चेहरे वे ही हैं शासन भी वैसा ही है।

जब यही नियति बननी थी तो सबसे बड़ा पश्तावा आपको चुनकर हो रहा है हमे,आप स्वयं उस सम्मान को नहीं बचा पा रहे जिस सम्मान से जनता ने आपको नवाजा है।

गूगल फेसबुक जैसी कंपनियों पर आपका बहुत भरोसा है हर सुविधा इन को आप और आपकी सरकार दे रही है,आप देश को डिजिटल बना रहे हैं,बुलेट ट्रैन का सफर करवा रहें हैं। देश को विदेशी कंपनियों के हवाले किया जा रहा है इतने आहिस्ते आहिस्ते सब कुछ किया जा रहा है कि देश कि जनता मुगालते में है,क्योंकि आपसे कभी भी सच नहीं जाना जा सकता है।

बाहर देश में बैठे विदेशी आज जितना इस देश को लूट रहें हैं उतना तो कभी आक्रमणकारियों ने भी नहीं लूटा!!

कुछ लाख रूपये का इन्वेस्टमेंट करके विदेशी कंपनी हमें वो उत्पाद बनाकर बेच रही हैं जिनकी हमें कभी आवश्यकता ही नहीं थी

जैसे पेप्सी-कोका कोला जैसी कंपनी हमे क्या बेच रही हैं,और बदले में हमसे क्या ले रही हैं,कब से हो रहा है और आज भी बदस्तूर जारी है।

ना पहले रुका ना आज फिर भी यकीन दिलवाते हैं आप देश बदल रहा है।विकास हो रहा है,देश जब आजाद हुआ था तब कुछ ही रोग हुआ करते थे आज पूरा देश बीमार है और यह सब सरकार के बिना नहीं हो सकता है। सरकार नहीं चाहती कि देश कि सेहत ठीक हो, नेता नहीं चाहते उद्योगपति नहीं चाहते बुद्धिजीवी नहीं चाहते हमारा देश भगवान भरोसे चलता है, आगे भी चलता रहेगा।

अंतिम व्यक्ति तक कभी न्याय नहीं पहुंचेगा। हमे लगा था आप में वो साहस है। लेकिन आप में सिर्फ बातें करने का साहस है।

कर कुछ नहीं सकते आप भी क्योंकि लाचारी,बेचारगी सबके साथ होती है,आप भी अछूते नहीं।

सवाल है क्या आप मेरे और मेरे देश के आंसू देख सकते हैं?

जय हिन्द

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