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आज भी भुगत रहा है हमारा हिंदुस्तान नेहरू की इन गलतियों की सजा...

आज भी भुगत रहा है हमारा हिंदुस्तान नेहरू की इन गलतियों की सजा...

In : Viral Stories By storytimes About :-1 year ago
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Nehru's untold truth

नेहरू-गांधी राजवंश की शुरुआत होती है गंगाधर नेहरू नहीं (Gangadhar), यानी मोतीलाल नेहरू के पिता से। नेहरू उपनाम बाद में मोतीलाल ने खुद लगा लिया था, जिसका शाब्दिक अर्थ था नहर वाले। वरना तो उनका नाम होना चाहिये था मोतीलाल धर। लेकिन जैसा कि इस खानदान को नाम बदलने की आदत थी उसी के मुताबिक उन्होंने यह किया। रोबर्ट हार्डी Andrews की किताब ए लैंप फॉर इंडिया - द स्टोरी ऑफ मदाम पंडित में उस तथाकथित गंगाधर का चित्र छपा है, जिसके अनुसार गंगाधर असल में एक सुन्नी मुसलमान था, जिसका असली नाम गयासुद्दीन गाजी था।

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दरअसल नेहरू ने खुद की आत्मकथा में एक जगह लिखा है कि उनके दादा अर्थात् मोतीलाल के पिता गंगाधर थे। ठीक वैसा ही जवाहर की बहन कृष्णा हठीसिंह ने भी लिखा है कि उनके दादाजी मुगल sultanat (बहादुरशाह जफर के समय) में नगर कोतवाल थे। जब इतिहासकारों ने खोज की तो पाया कि बहादुरशाह जफर के समय कोई भी हिन्दू इतनी महत्वपूर्ण ओहदे पर नहीं था। और खोजबीन पर यह भी पता चला कि उस वक्त के दो नायब कोतवाल हिन्दू थे जिनके नाम थे भाऊ सिंह और काशीनाथ, जो लाहौरी गेट दिल्ली में तैनात थे। लेकिन किसी गंगाधर नाम के व्यक्ति का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। (सन्दर्भ: मेहदी हुसैन की पुस्तक बहादुरशाह जफर और 1857 का गदर, 1987 की आवृत्ति) रिकॉर्ड मिलता भी कैसे, क्योंकि गंगाधर नाम तो बाद में अंग्रेजों के कहर से डर कर बदला गया था, असली नाम तो गयासुद्दीन गाजी था।

60 साल से ज्यादा समय पहले भारत आज़ाद हो रहा था। छोटे बच्चों के लिये चाचा नेहरू (Chacha Nehru) के रूप में भी जाने जाते है। इन सब चीजों को जानने के बावजूद, क्या आप लोगों ने उनके अनकहे सच और उनकी लालची राजनीति के बारे में कभी सोचा। अगर आप जवाहरलाल नेहरू की गलतियों को जानना चाहते है, तो आपको इस लेख को  जरूर पढ़ना चाहिये।

नेहरू की गलतियां-

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कोको आईसलैड - 1950 में नेहरू ने भारत का ' कोको द्वीप समुह' ( Google Map location -14.100000, 93.365000 ) बर्मा को गिफ्ट दे दिया. जो कोलकाता से 900 KM दुर अरबी समंदर मे है । बाद मे Burma ने कोको द्वीप समुह चायना को दे दिया, जहाँ से आज china द्वारा भारत पर हेरगिरी एवं निगरानी होती हैं ।

काबू व्हेली मनिपुर - पंडित नेहरू ने 13 Jan 1954 को भारत के मनिपुर प्रांत की काबू व्हेली दोस्ती के तौर पर बर्मा को दे दी. काबू व्हेली लगभग 11000 स्के. किमी है और कहते है के ये कश्मीर से भी खुबसुरत है. आज बर्मा ने काबू व्हेली का कुछ हिस्सा चिन को दे रखा है जहां से चिन भारत पर हेरगिरी (Espionage) कर रहा हैं ।

भारत - नेपाल विलय - 1952 मे नेपाल के तत्कालीन राजा त्रिभुवन विक्रम शाह ने नेपाल को भारत मे विलय कर लेने की बात पंडित नेहरू से कही, लेकिन पंडित नेहरूने ये कहकर ऊनकी बात टाल दी की नेपाल (Nepal) भारत में विलय  होने से दोनों देशों का फायदे के बजाय नुकसान ही होगा और Nepal का टुरिझम भी बंद पडेगा ।

UN Permanent Seat- नेहरू ने 1953 में अमेरिका की उस पेशकश को ठुकरा दिया था, जिसमें भारत से सुरक्षा परिषद ( United Nations ) के स्थायी सदस्य के तौर पर शामिल होने को कहा गया था। इसकी जगह नेहरू ने China को सुरक्षा परिषद में शामिल करने की सलाह दे डाली ।

आज भी चिन ,पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के कई प्रस्ताव UN मे नामंजूर करता है, हाल ही मे  दहशतवादी मसुद अजहर को अंतराष्ट्रीय दहशतवादी घोषित करने का india का प्रस्ताव UN मे चिन ने ठुकरा दिया है ।

जवाहरलाल नेहरू और लेडी मांउटबेटन -  लेडी माउंटबेटन की बेटी पामेला ने अपनी एक किताब में लिखा है कि दोनों के बीच संबंध था. लॉर्ड माउंटबेटन (Lord Mountbatten) भी दोनों को अकेला छोड़ देते थे. अब खुद लॉर्ड माउंटबेटन अपनी पत्नी को एक गैर के साथ खुला क्यूं छोड़ते थे यह एक  राज है. लोग मानते हैं कि ऐसा कर लॉर्ड माउंटबेटन जवाहरलाल नेहरू से भारतीय सेना औऱ आर्थिक निति के  कई राज निकाले थे.

पंचशील समझौता - नेहरू चीन से दोस्ती के लिए बहुत ज्यादा उत्सुक थे। नेहरूने 1954 को चीन के साथ पंचशील समझौता किया। इस समझौते के साथ ही भारत ने तिब्बत को चीन का हिस्सा मान लिया।

नेहरू ने चीन से दोस्ती की खातिर तिब्बत को भरोसे में लिए बिना उस पर चीन के 'कब्जे' को मंजूरी दे दी। बाद मे 1962 मे जब भारत चिन युद्ध हुआ तो चिनी सेना ईसी Tibet के मार्ग से भारत के अंदर तक घुस आई.

1962 भारत चिन युद्ध -चीनी सेना ने 1962 मे भारत को हरा दिया, हार के कारणों को जानने के लिए भारत सरकार ने ले.जनरल हेंडरसन और कमानडेंट ब्रिगेडियर भगत के नेतृत्व में एक समिति बनाई थी। दोनों अधिकारियों ने अपनी Report में हार के लिए PM जवाहर लाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराया.

चिनी सेना अरूणाचल प्रदेश, आसाम, सिक्किम तक अंदर घुस आने के बाद भी नेहरु ने हिंदी चिनी भाई भाई कहते हुए भारतीय सेना को चिन के खिलाफ अँक्शन लेनेसे रोक कर रखा, परिणाम स्वरूप हमारे कश्मीर का लगभग 14000 स्के. किमी भाग पर चिनने कब्जा कर लिया जिसमे  कैलाश पर्वत, मानसरोवर और अन्य तिर्थ स्थान आते है.

नेहरू का रोमांस -

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जवाहरलाल नेहरू के एडविना माउंटबेटन से संबंधों पर भी विदेश में अधिक चर्चा हुई है. इंदर कहते हैं, "इस विषय पर इंग्लैंड में एक किताब छपी. मौन्टबेटन (Mountbatten) ट्रस्ट ने ये किताब छापने की बाक़ायदा इजाज़त दी. नेहरू ने जितने भी पत्र एडविना को लिखे, उन्हें उस किताब में शामिल किया गया." वो कहते हैं, "माउंटबेटन की जीवनी में भी नेहरू एडविना के रोमांस का ज़िक्र है लेकिन जब जेनेट मॉरगन ने एडविना पर Book लिखी तो उसने बहुत कोशिश की कि एडविना के नेहरू के लिखे गए ख़तों को छापने (Print) की इजाज़त मिल जाए लेकिन उन्हें छापने की इजाज़त उन्हें नहीं मिली.