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'फ्लाइंग सिख' मिल्खा सिंह की जीवनी | All About Milkha Singh Life History In Hindi

'फ्लाइंग सिख' मिल्खा सिंह की जीवनी | All About Milkha Singh Life History In Hindi

In : Viral Stories By storytimes About :-12 months ago
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 'फ्लाइंग सिख' मिल्खा सिंह की जीवनी एवं उनके जीवन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

  • नाम- मिल्खा सिंह (फ्लाइंग सिख)

  • प्रसिद्ध नाम-  फ्लाइंग सिख 

  • मिल्खा सिंह का जन्म- 20 नवंबर  1929 (आयु 89 )

  • जन्म स्थान-  गोविंदपुरा, मुजफ्फरगढ़ शहर, पंजाब प्रांत, ब्रिटिश भारत (अब मुजफ्फरगढ़ जिला, पाकिस्तान)

  • पत्नी का नाम-  निर्मल सैनी

  • संतान-  पुत्र- जीवन मिल्खा सिंह (गोल्फर),  पुत्री-  सोनिया संवाल्का

  • कार्य-   एथलीट

  • राष्ट्रीयता- इंडियन

मिल्खा सिंह का शुरुआती जीवन -

मिल्खा सिंह का जन्म सन् 20 नवम्बर 1929 में पाकिस्तान के गोविंदपुरा भारत विभाजन से पहले पंजाब का हिस्सा था में एक सिख परिवार में हुआ परन्तु उनके दस्तावेजो अनुसार उनकी जन्मतिथि(date of birth)7 अक्टूबर 1935 को मानी जाती हैं. वह भारत – पाकिस्तान के विभाजन के दौरान मिल्खा सिंह ने अपने माता-पिता व् अन्य परिवार के सदस्यों को खो दिया अत: पाकिस्तान से आई शरणार्थी ट्रेन(train) के द्वारा वह भारत आए. भारत – पाक विभाजन में उन्होंने काफी कुछ खोया था, और ऐसे भयानक हादसे के बाद उनके ह्रदय पर गहरा असर पड़ा था परन्तु उन्होंने कुछ ऐसा कर गुजरने की ठानी जिससे वह जीवन(Life) में कुछ कर सके. उन्होंने सेना में भर्ती होने का एक निर्णय लिया और अधिक संघर्ष व् कड़ी मेहनत कोशिश के बाद सन् 1951 में सेना में भर्ती हो गए| उनके बचपन की बात करें तो वह जब स्कुल जाया करते थे तो अपने घर से स्कुल और स्कुल से घर को 10 km किलोमीटर की दौड़ से पूरा करते थे.

वैवाहिक जीवन एवं परिवार

मिल्खा सिंह जी का विवाह निर्मल कौर से 1962 में हुआ जो 1955 में भारतीय महिला वॉलीबॉल टीम की कप्तान थी इनकी 4 संताने है जिनमे एक बेटा और 3 बेटियाँ हैं बेटे का नाम जीव मिल्खा सिंह है जो एक गोल्फ़ खिलाड़ी हैं। मिल्खा सिंह के इनके अलवा एक और संतान थी जिसको उन्होंने 1999 में गोद लिया जिनका नाम हवालदार बिक्रम सिंह था जो Tiger hill के युद्ध में शहीद हो गए थे|

मिल्खा सिंह का धावक के तौर पर करियर -

All About Milkha Singh Life History In Hindi

मिल्खा सिंह ने भारतीय सेना की भर्ती के दौरान क्रॉस-कंट्री रेस(दौड़) छठे स्थान पर आये थे इसलिए उनका चयन सेना में खेलकूद के स्पेशल ट्रेनिंग किया गया था और साथ ही एक अच्छे धावक मिल्खा सिंह ने कई कीर्ति हासिल करने बाद उनके द्वारा 200मी और 400मी की दौड़ को सफलतापूर्वक पार किया और कुछ समय के लिए वे 400मी के विश्व कीर्तिमान धारक भी रहे। मेर्लबोन्न में हो रहे 1956 के ओलिंपिक खेलों में 200 और 400 मीटर में भारत का प्रतिनिधित्व किया परन्तु उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनुभव न होने के कारण सफलता नहीं मिल पाई.

सन 1958 की बात करे तो मिल्खा सिंह जी ने कटक में आयोजित 1958 के राष्ट्रिय खेलों में 200 मी और 400 मी की प्रतियोगिता में एक बहुत बड़ा राष्ट्रिय कीर्तिमान हासिल किया और साथ ही एशियन खेलों की प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक(gold medal)  हासिल  किया था ।

1958 के कार्डिफ़, वेल्स, संयुक्त साम्राज्य में हुए कॉमनवेल्थ खेलों में मिल्खा सिंह जी ने स्वर्ण पदक जीता जिससे उनकी पुरे भारत देश में प्रशंसा हुई. इसी दौरान मिल्खा सिंह को पाकिस्तान में दौड़ने का हुकुम(permission)  मिला परन्तु उनके साथ जो बचपन में हादसा हुआ था उनकी वजह से वे पाकिस्तान जाना नहीं चाहते थे लेकिन राजनैतिक परिस्थिति होने के कारण उन्हें इस दौड़ का न्योता स्वीकारा और मिल्खा सिंह इस दौड़ में ऐसे दौड़े की उनके प्रतिद्वंद्वियों के होश उड़ गए और मिल्खा सिंह इस दौड़ में सरलता पूर्वक सफल रहे|

मिल्खा सिंह की इस दौड़ से पाकिस्तान के दर्शक  काफी प्रभावित हुए की वहां की औरतों ने अपने बुरका उठा कर मिल्खा सिंह को गुजरते देखने लगे तभी से उन्हें फ्लाइंग सिख  की उपाधि मिली।

बाद में मिल्खा सिंह ने खेलो से सन्यास(renunciation)लिया और भारत के खेलकूद के प्रोत्साहन के लिए काम करने लगे|

मिल्खा सिंह को मिलने वाले अवार्ड-

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1958 के एशियाई खेलों में 200मी व 400मी में 1958 के कॉमनवेल्थ खेलों में मिल्खा सिंह ने स्वर्ण पदक जीते। इसके बाद 1962 के एशियाई खेलों में फिर स्वर्ण पदक मिल्खा सिंह जी ने अपने नाम किया |

मिल्खा सिंह के कीर्तिमान पर बनी बॉलीवुड फिल्म -

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मिल्खा सिंह के संघर्षो और कीर्तिमानो से प्रेरित होकर हिंदी सिनेमा(Bollywood)द्वारा उनके जीवन पर आधारित वर्ष 2013 में एक फिल्म बनाई गई जिसका नाम “भाग मिल्खा भाग” रखा गया इस फिल्म में मिल्खा सिंह की भूमिका “फरहान अख्तर” द्वारा निभाई गई और इस फिल्म की निर्माता(Producer)निर्देशक और लेखक राकेश ओमप्रकाश मेहरा थे.

रोचक तथ्य-

  • 1960 में रोम ओलंपिक में हीरो रहने के बावजूद मात्र 0.1 सेकेंड के अंतर से उन्होंने कांस्य पदक गंवा दिया, जिसकी कसक उनके मन में आज तक है।

  • मिल्खा सिंह भारतीय सेना में जाना चाहते थे, लेकिन तीन बार उन्हें रिजेक्ट(Reject)  कर दिया गया।

  • मिल्खा सिंह विश्व भर के आयोजनों में कुल 80 रेस में दौड़े और 77 में जीते। उन्हें अमेरिका द्वारा 1959 में हेल्म्स व‌र्ल्ड ट्रॉफी दी गई।

  • लंबी दूरी की रेस में मिल्खा सिंह ने पान सिंह तोमर को हराया था

  • राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने ‘भाग मिल्खा भाग’ नाम से फिल्म बनाई है, जिसमें इस लीजेंड धावक की भूमिका फरहान अख्तर ने निभाई है। ‘ मिल्खा सिंह ने अपनी बायोग्राफी मात्र एक रुपये में राकेश मेहरा को दी। ‘ उन्होंने फिल्मकारों(Filmmakers) से वादा लिया कि फिल्म के प्रॉफिट का 10 प्रतिशत मिल्खा सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट को दिया जाएगा।

  • उनका दावा है कि उन्होंने 1968 के बाद कोई फिल्म नहीं देखी, जब उन्होंने भाग मिल्खा भाग देखी तो उनकी आंखों में आंसू थे।

  • मिल्खा सिंह ने आटोबायोग्राफी ‘The Race of My Life ' अपनी बेटी के साथ लिखी है.