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दादी माँ की अनोखी कहानी | Dadi Maa ki Manoranjak Kahani in Hindi

By yuvraj / About :-2 years ago

दादी माँ की कहानी गिद्ध की उड़ान | Dadi Maa ki Hindi Kahani

एक बार एक घने जंगल में एक गिद्धों का झुण्ड रहता था। वो सारे गिद्ध एक साथ झुण्ड बनाकर लम्बी उड़ाने भरते और शिकार की तलाश किया करते थे। गिद्धों का झुण्ड एक बार उड़ते उड़ते एक ऐसे टापू पर पहुँच गया जहां पर बहुत ज्यादा मछली और मेंढक खाने को थे।

उस टापू पे गिद्धों के लिए सारी सुविधाएँ मौजूद थीं इसलिए सारे गिद्ध मौज और ख़ुशी से उसी टापू पर रहने लगे। अब गिद्धों को ना ही रोज शिकार की तलाश करनी पड़ती और ना ही कुछ मेहनत करनी पड़ती। दिन रात गिद्ध बिना कोई काम किये मौज करते और आलस्य में पड़े रहते थे।

उस गिद्धों के झुण्ड में एक बूढ़ा गिद्ध भी था उसको अपने साथियों की ऐसी दशा देखकर बहुत चिंता हुई। उस बूढ़े गिद्ध ने सभी को चेतावनी देते हुए बोला की "मित्रों हम गिद्धों को ऊँची उड़ान और अचूक निशाने और उत्तम शिकारी के रूप में जाना जाता है।" लेकिन यहाँ इस टापू पे आकर सभी गिद्धों को आराम की आदत हो गई है और कुछ तो कई दिन से उड़े ही नहीं हैं। ये चीज़ें हमारी क्षमता और हमारे भविष्य के लिए घातक हो सकती हैं। इसलिए हम आज ही अपने पुराने जंगलों में वापस जायेंगे।

ये सुनकर सारे गिद्ध मिलकर उस बूढ़े गिद्ध की हंसी उड़ाने लगे कि "ये बूढ़े हो चुके हैं इनका दिमाग सही से काम नहीं कर रहा है, यहाँ हम कितनी मौज मस्ती से रह रहे हैं वापस वहां जंगल में क्यों जाएँ ?" सभी गिद्धों ने ये कहकर जाने से मना कर दिया। लेकिन बूढ़ा गिद्ध वापस जंगल में चला गया।

एक दिन बूढ़े गिद्ध ने जंगल में रहते रहते सोचा कि मेरा जीवन अब बहुत थोड़ा ही बचा है तो क्यों ना अपने सगे लोगों से मिल लिया जाये। बूढ़े गिद्ध ने यही सोचकर उड़ान भरी और टापू पर पहुँच गया। जब बूढ़ा गिद्ध उस टापू पे पंहुचा तो उसने भयावह द्रश्य देखा। पूरे टापू पर गिद्धों की लाशे ही लाशे पड़ी थी और एक भी गिद्ध जिन्दा नहीं बचा था।

अचानक बूढ़े गिद्ध की नजर एक घायल गिद्ध पर पड़ी। उस गिद्ध ने बताया कि "यहाँ इस टापू पे कुछ दिन पहले चीतों का एक झुण्ड आया था। जब चीतों ने हम पर हमला किया तो हम लोगों ने उड़ना चाहा लेकिन हम ऊँचा उड़ ही नहीं पाए और ना ही हमारे पंजों में इतनी ताकत थी कि हम उनका मुकाबला कर पाते। चीतों ने एक एक कर सारे गिद्धों को खत्म कर दिया।" ये बात सुनकर बूढ़ा गिद्ध दुखी होता हुआ वापस जंगल की और उड़ गया।

हमारे जीवन में भी ऐसा ही होता है अगर हम धीरे - धीरे अपनी शक्तियों को काम में लेना बंद कर देंगे तो हम आलसी और कमजोर हो जाएँगे और एक वक्त ऐसा आएगा जब हमारी शक्तियाँ हमारे काम की ही नहीं रहेगी। अगर कोई भी अपने शरीर और दिमाग का इस्तेमाल बंद कर देगा तो दोनों की ताकत घटने लगेगी और कोई भी उस व्यक्ति को पछाड़ कर आगे बढ़ जायेगा। इसलिए अपनी किसी भी शक्ति और क्षमता को जंग नहीं लगने देना चाहिए हमेशा उनमें सुधार करते रहना चाहिए तभी आप जिंदगी की इस जंग को शान से जीत पाएंगे।

दादी माँ की अनोखी कहानी | Dadi Maa ki Manoranjak Kahani in Hindi