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हॉकी के जादूगर ध्यानचंद की जीवनी | Dhyan Chand Biography in Hindi

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हॉकी के भगवान मेजर ध्यानचंद की जीवनी | All About Dhyan Chand Biography In Hindi
- नाम - मेजर ध्यानचंद सिंह
- दूसरा नाम - द विज़ार्ड
- जन्म - 29 अगस्त 1905
- जन्म स्थान - इलाहाबाद संयुक्त प्रान्त ब्रिटिश भारत
- पिता का नाम - सोमेश्वर दत्त सिंह
- माता का नाम - श्रद्धा सिंह
- पत्नी का नाम - जानकी देवी (1936 )
- करियर - 1921–1956 तक भारतीय सेना कार्यरत रहे
- 1926–1948 भारतीय पुरुष हॉकी टीम
- परिवार के सदस्यों के नाम - रूप सिंह, मूल सिंह (ध्यानचंद के भाई )
- ध्यानचंद की मृत्यु - 3 दिसम्बर 1979 (उम्र 74) दिल्ली
दोस्तों आज खेल दिवस है खेल का नाम सुनते ही भारत के महान हॉकी प्लेयर मेजर ध्यानचंद के शानदार खेल की याद आ जाती है ध्यानचंद को अलग तरीके से गोल करने के लिए जाना जाता था मेजर ध्यानचंद ने ओलम्पिक खेलों में भारत को 3 बार स्वर्ण पदक दिलाया है ध्यानचंद ने अपने करियर में कुल 400 गोल दागे अपना अंतिम अन्तराष्ट्रीय मैच 1948 में खेला था.
जन्म व परिवार
ध्यानचंद का जन्म उत्तरप्रदेश के इलाहबाद में 29 अगस्त 1905 को हुआ था. वे कुशवाहा, मौर्य परिवार के थे. उनके पिता का नाम सोमेश्वर दत्त सिंह था, जो ब्रिटिश भारतीय सेना में एक सूबेदार के रूप कार्यरत थे, साथ ही हॉकी गेम खेला करते थे. ध्यानचंद के दो भाई थे, मूल सिंह एवं रूप सिंह. रूप सिंह भी ध्यानचंद की तरह हॉकी(Hockey) खेला करते थे, जो अच्छे खिलाड़ी थे.ध्यानचंद के पिता सोमेश्वर दत्त आर्मी में थे, जिस वजह से उनका तबादला आये दिन कही न कही होता रहता था. इस वजह से ध्यानचंद ने कक्षा 8 class के बाद अपनी पढाई छोड़ दी. बाद में ध्यानचंद के पिता उत्तरप्रदेश के झाँसी में जा बसे थे.
हॉकी में ध्यानचंद का शुरुवाती करियर
ध्यानचंद के खेल के ऐसे बहुत से पहलु थे, जहाँ उनकी प्रतिभा को देखा गया था. एक मैच में उनकी टीम 2 गोल से हार रही थी, ध्यानचंद ने आखिरी 4 min में 3 गोल मार टीम को जिताया था. यह पंजाब टूर्नामेंट मैच झेलम में हुआ था. इसके बाद ही ध्यानचंद को होकी विज़ार्ड कहा गया. ध्यानचंद ने 1925 में पहला नेशनल होकी टूर्नामेंट गेम खेला था. इस मैच में विज, उत्तरप्रदेश, पंजाब, बंगाल, राजपुताना और मध्य भारत ने हिस्सा लिया था. इस Tournament में उनकी परफॉरमेंस को देखने के बाद ही, उनका चयन भारत की इंटरनेशनल होकी टीम में हुआ था.
ध्यानचंद का अंतरराष्ट्रीय खेलों में प्रदर्शन
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#1.
1926 में न्यूजीलैंड में होने वाले एक टूर्नामेंट के लिए ध्यानचंद का चयन हुआ. यहाँ एक मैच के दौरान भारतीय टीम ने कुल 20 गोल किये थे, जिसमें से 10 तो ध्यानचंद के थे . इस टूर्नामेंट में भारत ने 21 मैच खेले थे, जिसमें से 18 में भारत विजयी रहा, 1 हार गया था एवं 2 ड्रा हुए थे. भारतीय टीम ने पुरे टूर्नामेंट में 192 गोल किये थे, जिसमें से ध्यानचंद ने 100 गोल मारे थे. यहाँ से लौटने के बाद ध्यानचंद को आर्मी में लांस नायक की नोकरी दे दी गई 1927 में लन्दन फोल्कस्टोन फेस्टिवल में भारत ने 10 मैचों में 72 गोल किये, जिसमें से ध्यानचंद ने 36 गोल किये थे.
#2.
1928 में एम्स्टर्डम ओलिंपिक गेम भारतीय टीम का फाइनल मैच नीदरलैंड के साथ हुआ था, जिसमें 3 गोल में से 2 गोल ध्यानचंद ने मारे थे, और भारत को पहला स्वर्ण पदक जिताया था. 1932 में लासएंजिल्स ओलिंपिक गेम में भारत का फाइनल मैच अमेरिका के साथ था, जिसमें भारत ने रिकॉर्ड तोड़ 23 गोल किये थे, और 23-1 साथ जीत हासिल कर स्वर्ण पदक हासिल किया था. यह वर्ल्ड रिकॉर्ड कई सालों बाद 2003 में टुटा है. उन 23 गोल में से 8 गोल ध्यानचंद ने मारे थे. इस इवेंट में ध्यानचंद ने 2 मैच में 12 गोल मारे थे.
#3.
1932 में बर्लिन ओलिंपिक में लगातार तीन टीम हंगरी, अमेरिका और जापान को जीरो गोल से हराया था. इस इवेंट के सेमीफाइनल में भारत ने फ़्रांस को 10 गोल से हराया था, जिसके बाद फाइनल जर्मनी के साथ हुआ था. इस फाइनल मैच में इंटरवल तक भारत के खाते में सिर्फ 1 गोल आया था. इंटरवल में ध्यानचंद ने अपने जूते उतार दिए और नंगे पाँव गेम को आगे खेला था, जिसमें भारत को 8-1 से जीत हासिल हुई और स्वर्ण पदक मिला था.
#4.
ध्यानचंद की प्रतिभा को देख, जर्मनी के महान हिटलर ने ध्यानचंद को जर्मन आर्मी में हाई पोस्ट में आने का ऑफर दिया था, लेकिन ध्यानचंद को भारत से बहुत प्यार था, और उन्होंने इस ऑफर को बड़ी शिष्टता से मना कर दिया.
#5.
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ध्यानचंद अन्तराष्ट्रीय होकी को 1948 तक खेलते रहे, इसके बाद 42 साल की उम्र में उन्होंने रिटायरमेंट ले लिया. ध्यानचंद इसके बाद भी आर्मी में होने वाले होकी मैच को खेलते रहे. 1956 तक उन्होंने होकी स्टिक को अपने हाथों में थमा रहा.
अवार्ड व प्रमुख उपलब्धियां
- 1956 में भारत के दुसरे सबसे बड़े सम्मान पद्म भूषण से ध्यानचंद को सम्मानित किया गया था.
- उनके जन्मदिवस को नेशनल स्पोर्ट्स डे की तरह मनाया जाता है.
- ध्यानचंद की याद में डाक टिकट शुरू की गई थी.
- दिल्ली में ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम का निर्माण कराया गया था.
ध्यानचंद की मृत्यु
ध्यानचंद को अंतिम समय अच्छा नही रहा देश को Olympic Games गोल्ड दिलाने वाले ध्यानचंद को भारत देश ने भुला दिया अंतिम दिनों में उनके पास पैसों कमी थी उन्हें लीवर कैंसर हो गया उन्हें दिल्ली के AIIMS हॉस्पिटल के जनरल वार्ड में भर्ती कराया गया था. उनका देहांत 3 दिसम्बर 1979 को हुआ था.
हॉकी के जादूगर ध्यानचंद की जीवनी | Dhyan Chand Biography in Hindi




