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स्वतंत्रता सेनानी दुर्गाबाई देशमुख की जीवनी | Freedom Fighter Durgabai Deshmukh Biography In Hindi

By sanjay / About :-2 years ago

सबसे कम उम्र की स्वतंत्रता सेनानी दुर्गाबाई देशमुख की जीवनी | Freedom fighter Durgabai Deshmukh Biography In Hindi

दुर्गाबाई देशमुख  का जन्म सन 1909 ई. में आंध्रप्रदेश में हुआ। दुर्गाबाई ने अपनी मात्र 10 वर्ष की आयु में ही महिलाओ के लिए काकीनाद में हिंदी पाठशाला की स्थापना की। दुर्गाबाई ने अपनी माँ सहित 500 से अधिक महिलाओ को हिंदी पढ़ाने के साथ - साथ उन्हें स्वयं सेविका के रूप में तैयार करने का महतवपूर्ण काम किया। उस समय फ्रॉक पहने हुए इस नन्ही मास्टरनी को देखकर जमनालाल बजाज को बहुत आश्चर्य हुआ की इतनी काम उम्र में इतना बढ़ा काम कर रही है दुर्गाबाई। महात्मा गाँधी , कस्तूरबा गाँधी और सी.ऍफ़.एंड्रूज के साथ मिलकर दुगाबाई की पाठशाला का निरक्षण किया तब दुर्गाबाई मात्र 12 वर्ष की थी।

इसी ही समय दुर्गाबाई महात्मा गाँधी के संपर्क में आई। दुर्गाबाई ने गाँधी जी के सामने विदेशी कपड़ों की होली जलाई। दुर्गाबाई ने अपने बहुमूल्य आभूषण को दान में दे दिया और स्वयं को एक समर्पित स्वयं सेविका के रूप में सम्पूर्ण किया ।

महात्मा गाँधी भी इस छोटी बच्ची के साहस को देख के दंग रह गये। कांग्रेस अधिवेशन में इस छोटी सी बच्ची ने जवाहरलाल नेहरू को बिना टिकट के प्रदर्शन में जाने से रोक दिया था| पंडित जवहरलाल नेहरू ने दुर्गाबाई की कर्तव्यनिष्ठा से बहुत प्रभावित हुए तथा टिकट लेकर ही अंदर गए | 20 वर्ष की आयु में तो दुर्गाबाई ने अपने तूफानी दौरों और धुआंधार भाषणों से धूम मचा दी। उनकी अद्भुत संघठन क्षमता एवं भाषण देने की कला को देखकर लोग हक्के बक्के रह गए थे। दुर्गाबाई का साहसपूर्ण व्यक्तित्व को देखकर लोग उन्हें  “जॉन ऑफ़ ओर्क” कहा कर पुकारने लगे थे। इस प्रकार वे दक्षिण के घर-घर  से निकल कर पुरे देश में विख्यात हो गई थी|

नमक सत्याग्रह के समय दुर्गाबाई को दो से तीन बार जेल जाना पड़ा । सन 1930 से 1933 तक उन्हें जेल में रहना पड़ा था अंग्रेजो के दुवारा दुर्गाबाई को बहुत यातनाएं देते थे। जैसे धुप में खड़े रखना,खाना ना देना, मिर्च पिसवाना आदि यातनाएं दी जाती थी फिर भी दुर्गाबाई ने जेल से रिहा होने के लिए कोई माफ़ी नहीं माँगी । जेल से छूटने के बाद दुर्गाबाई ने अपनी बाकि की पढ़ाई पूरी की। दुर्गाबाई ने मैट्रिक से एम.ए किया, फिर ल.ल.बी. किया और वहा पर वकील बनी। वे कई महिला कल्याणकारी संघटन से जुडी रही। नारी निकेतन, नारी रक्षा समिति, अखिल भारतीय महिला परिषद, विश्वविद्यालय महिला संघ,आंध्र महिला सभा आदि।

दुर्गाबाई देशमुख की शादी भूतपूर्व वित् मंत्री चिंतामणि देशमुख के साथ हुई तथा इनकी शादी दिनांक 22 जनवरी 1953 में हुई थी। दुर्गाबाई अपनी शादी के समय " योजना आयोग " की सदस्य थी और योजनाओं को व्यवस्था करने,पिछड़े वर्गो तथा महिलाओं -बच्चों के उत्थान कार्य को प्राथमिकता दिलाने के लिए दुर्गाबाई देशमुख ने अपना पूरा जीवन लगा दिया तथा “नारी शिक्षा की राष्ट्रीय कमेटी” की प्रथम अध्यक्षा ने नाते नारी शिक्षा के लिए विशेष प्रावधान, आदि के लिए दुर्गाबाई ने अपना पूरा जीवन लगा दीया था| 


स्वतंत्रता सेनानी दुर्गाबाई देशमुख की जीवनी | Freedom Fighter Durgabai Deshmukh Biography In Hindi