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सब्जी वाले हरेकाला हजाब्बा को मिला पद्मश्री सम्मान | Harekala Hajabba Padma Shri Award In Hindi

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पूरे देश ने 26 जनवरी 2020 का 71 वां गणतंत्र दिवस बड़ी धूम-धाम से मनाया। हर वर्ष की तरह इस साल भी देश में मौजूद प्रतिभावो को पद्म पुरस्कारों के नाम दर्ज हुए। 71 वें गणतंत्र दिवस के मौके पर 7 लोगो को पद्म विभूषण व 16 को पद्म भूषण और 118 लोगो को पद्मश्री का सम्मान दिया गया। इस लिस्ट में कुछ नाम ऐसे भी शामिल थें जो हर किसी को दांतो तले अंगुली दबाने के लिए मजबूर कर दिया यह लोग हर तरफ इसके लिए चर्चा का हिस्सा बन गए। जी हां दोस्तो ऐसे ही एक शख्सियत है कर्नाटक के कन्नड़ जिले के रहने वाले 68 वर्षीय हरेकाला जी जिन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बता दे की हरेकाला जी अपनी एक छोटी टूटी-फूटी फल की दुकान चलाते है। खास बात की हरेकाला जी ने शिक्षा का महत्व समझते हुए अपनी दुकान से होने वाली कमाई से गांव में बच्चों के लिए स्कूल बनवाया और आज वो चाहते है की यहां पर विश्वविधालय का भी निमार्ण हो।
कब सोचा स्कूल खोलने के बारे में
एक छोटी सी दुकान पर फल बेचने वाले हरेकाला हजाब्बा का शिक्षा से दूर-दूर तक कोई वास्ता नही था। हजाब्बा कभी स्कूल नही गए। अपने इस सफर के बारे में हजाब्बा ने बताया की - “ एक बार उनकी फल की दुकान पर कुछ विदेशी लोग फल खरीदने के लिए रुके और वो संतरे खरीदना चाहते थे इसके लिए उन्होंने मुझे उनकी कीमत पूछी। भाषा का मेल दिमाग से बाहर होने के चलते मे कुछ समझ नही पाया। तब वो कपल दुकान से चला गया। तब यह वो समय था जब मुझे गांव में प्राइमरी स्कूल शुरु करने का विचार आया। ताकी मेरी तरह आगे किसी बच्चें को इस स्थिति का सामना न करना पड़े। ”
इस तरह सच हुआ स्कूल का सपना
हरेकाला हजाब्बा ने गांव में स्कूल खोलने का विचार बनाया और इसके लिए उन्होंने गांव के सभी लोगो से इस बारे में चर्चा की। गांव के लोगो की मदद से हजाब्बा ने गांव की मस्जिद से स्कूल की शुरुआत कर दी। स्कूल में स्वच्छ पानी के लिए हजाब्बा हर रोज बच्चों के लिए पानी को उबालकर स्वच्छ बनाते। बच्चों को और बेहतर शिक्षा प्राप्त हो सके इसके लिए वो जिला मुख्यालय जाते और अधिकारीयों से गांव में अच्छी शिक्षा देने के बारे में बोलते। हजाब्बा की यह मेहनत रंग लाई और जिला प्रशासन ने वर्ष 2008 मे नयापुडु में जिले का 14 वां स्कूल खोल दिया।
स्कूल में रखने लगे बच्चों की सुविधाओं का ध्यान
गांव में आधारिक स्कूल की स्थापना के बाद हजाब्बा हर रोज सुबह जल्दी उठकर पूरे स्कूल परिसर की साफ-सफाई करते और बच्चों के लिए पीने का पानी उबालते। हजाब्बा स्कूल से इतना जुड़ चुके थे की वो हर बच्चां की सुविधा का ख्याल रखते थें। साल 2014 में पहली बार हरेकाला के लिए पद्मश्री पुरस्कार के लिए डिप्टी कमिश्नर एबी इब्राहिम ने प्रस्ताव भेजा। साल 2015 में हरेकाला हजाब्बा को उन्होंने इस बारे में बताया ।
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बने है एक प्रेरणा
एक बात न समझ आने से इस सफर को बदलने निकले हजब्बा आज गांव के हर व्यक्ति के लिए प्रेरणास्त्रोत बन चुके है। मंगलौर में स्थित कॉलेज में उनके जीवन के बारे में पढ़ाया जाता है। हजब्बा के विश्वास व शिक्षा के प्रति उठाये गए कदमों के चलते उन्हें जिलें में कई बार अवॉर्ड्स देकर सम्मानित किया जा चुका है। लेकिन इन सब के बाद हजाब्बा के जीवन में सबसे बड़ा दिन तब आया जब उन्हें केंद्र सरकार के अधिकारीयों का कॉल आया की उन्हें दिल्ली में 71 वें गणतंत्र दिवस के मौके पर पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। जो मेरी जीवन का सबसे बड़ा दिन था।
सब्जी वाले हरेकाला हजाब्बा को मिला पद्मश्री सम्मान | Harekala Hajabba Padma Shri Award In Hindi




