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सातवाहन वंश का इतिहास एवं महत्वपूर्ण तथ्यों की सूची | List of History & Important Facts of Satavahan

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सातवाहन वंश का इतिहास एवं महत्वपूर्ण तथ्यों की सूची | List of History And Important Facts of Satavahana Dynasty In Hindi
सातवाहन वंश
सातवाहन वंश (60 ई.पू. से 240 ई.) भारत का प्राचीन (Ancient) राजवंश था, जिसने केन्द्रीय दक्षिण भारत पर शासन किया था। भारतीय इतिहास में यह राजवंश ‘आन्ध्र वंश’ के नाम से भी विख्यात है। सातवाहन वंश का प्रारम्भिक (Inicial) राजा सिमुक था। इस वंश के राजाओं ने विदेशी आक्रमणकारियों से जमकर संघर्ष किया था। इन राजाओं ने शक आक्रांताओं को सहजता से भारत में पैर नहीं जमाने दिये।
इतिहास
भारतीय परिवार, जो पुराणों (प्राचीन धार्मिक तथा किंवदंतियों का साहित्य) पर आधारित कुछ व्याख्याओं के अनुसार आंध्र जाति (जनजाति) का था और 'दक्षिणापथ' अर्थात दक्षिणी क्षेत्र में साम्राज्य की स्थापना करने वाला पहला दक्कनी वंश था। इस वंश का आरंभ 'सिभुक' अथवा 'सिंधुक' नामक व्यक्ति ने दक्षिण में कृष्णा और गोदावरी नदियों की घाटी में किया था। इस वश को 'आंध्र राजवंश' के नाम भी जाना जाता है। सातवाहन वंश के अनेक प्रतापी सम्राटों ने विदेशी शक आक्रान्ताओं के विरुद्ध भी अनुपम सफलता प्राप्त की थी। दक्षिणापथ के इन राजाओं का वृत्तान्त न केवल उनके सिक्कों और शिलालेखों से जाना जाता है, अपितु अनेक ऐसे साहित्यिक ग्रंथ भी उपलब्ध हैं, जिनसे इस राजवंश के कतिपय राजाओं के सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण बातें ज्ञात होती हैं।
सातवाहन वंश के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य
- कण्व वंश के अन्तिम शासक सुशर्मा की हत्या करके सिमुक ने सातवाहन वंश की स्थापना 28 ई० में की थी
- सिमुक को सिंधुक, शिशुक, शिप्रक, तथा बृषल भी कहा जाता है
- सिमुक के बाद उसका छोटा भाई कृष्ण राजगद्दी पर बैठा था
- सातवाहन वंश के प्रमुख शासक सिमुक, शातकर्णी, गौतमी पुत्र शातकर्णी, वाशिष्ठी पुत्र पुलुमावी तथा यज्ञ श्री शातकर्णी आदि थे
- शातकर्णी प्रथम ने शातकर्णी सम्राट, दक्खिनापथपति तथा अप्रतिहतचक्र की उपाधियॉ धारण की थी
- सातवाहन वंंश का सर्वश्रेष्ठ शासक गौतमी का पुत्र शातकर्णी था
- वेणकटक नामक नगर की स्थापना गौतमी का पुत्र शातकर्णी ने की थी
- सातवाहनों की राजकीय भाषा प्राकृत थी
- सातवाहनवंशी राजकुमारों को कुमार कहा जाता था
- सातवाहन काल में सरकारी आय केे महत्वपूर्ण साधन भूमिकर, नमक कर, तथा न्याय शुल्क कर था
- सातवाहन काल में तीन प्रकार के सामंत महारथी, महाभोज तथा महासेनापति थे
- इस काल में तॉबे तथा कॉसे के अलावा सीसे के सिक्के काफी प्रचलित हुऐ
- सातवाहन काल में मुख्य रूप से दो धार्मिक भवनोेंं का निर्माण काफी संख्या में हुआ – चैत्य अर्थात बौद्ध मंदिर और बौद्ध भिक्षुुओं का निवास स्थान
- सातवाहन काल में व्यापारी को नैगम कहा जाता था
- व्यापारियों के काफिले के प्रमुख को सार्थवाह कहा जाता था
- सातवाहनोंं ने ब्राह्मणों को सर्वप्रथम भूमिदान एवं जागीर देने की प्रथा का आरम्भ किया था
शासक राजा के शासक (राजा):
सातवाहन वंश में कुल 9 राजा ही हुए, जिनके नाम निम्नलिखित हैं:-
सातवाहन राजवंश:
- सिमुक
- सातकर्णि
- राजा हाल
- गौतमीपुत्र सातकर्णि
- वासिष्ठी पुत्र पुलुमावि
- कृष्ण द्वितीय सातवाहन
- महेन्द्र सातकर्णि
- कुन्तल सातकर्णि
- शकारि विक्रमादित्य द्वितीय
सातवाहन वंश का इतिहास एवं महत्वपूर्ण तथ्यों की सूची | List of History & Important Facts of Satavahan




