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कलिंग युद्ध का इतिहास, कारण एवं परिणाम | History Of Kalinga War, Causes And Consequences In Hindi

कलिंग युद्ध का इतिहास, कारण एवं परिणाम | History Of  Kalinga War, Causes And Consequences In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-11 months ago
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कलिंग युद्ध के बारे में पूरी जानकारी, कारण एवं परिणाम | Kalinga War History In Hindi 

कलिंग का युद्ध कब हुआ था? | (kalinga war story in hindi)

Kalinga War History

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कलिंग का प्रख्यात युद्ध सम्राट अशोक और कलिंग के राजा अनंत नाथन (Anant Nathan) के बीच 261-262 ईसा पूर्व मे भुवनेश्वर से 8 किलोमीटर दक्षिण में दया नदी के किनारे लड़ा गया था।

भारतीय इतिहास में ऐसे कई युद्ध हुए हैं जिन्होंने इतिहास (History) ही बदल डाला। ऐसा ही एक युद्ध था- कलिंग युद्ध। इसने भारतीय इतिहास के पूरे कालखंड को ही बदल कर रख दिया था। इस युद्ध को भारतीस इतिहास का भीषणतम युद्ध कहा जाता है। चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 8वें वर्ष (261 ई. पू.) में कलिंग पर आक्रमण किया था। कलिंग विजय उसकी आखिरी विजय थी। युद्ध की विनाशलीला ने सम्राट को शोकाकुल बना दिया और वह प्रायश्चित्त करने के प्रयत्न में बौद्ध विचारधारा की ओर आकर्षित हुआ। कलिंग युद्ध ने अशोक के हृदय में महान परिवर्तन कर दिया । उसका हृदय मानवता के प्रति दया और करुणा से उद्वेलित हो गया। उसने युद्ध क्रियाओं को सदा के लिए बन्द कर देने की प्रतिज्ञा की। यहाँ से आध्यात्मिक और धर्म विजय का युग शुरू हुआ। उसने बौद्ध धर्म को अपना धर्म स्वीकार किया।

कलिंग युद्ध के प्रमुख कारण | (kalinga yudh)

दोस्तों अब मैं आपको बताने वाला हूं कि कलिंग युद्ध के क्या कारण थे?

1. कलिंग पर विजय प्राप्त अशोक अपने साम्राज्य मे विस्तार करना चाहता था। यह कलिंग युद्ध का प्रमुख कारण रहा।

2. सामरिक दृष्टि से देखा जाए तो भी कलिंग बहुत महत्वपूर्ण था। स्थल और समुद्र दोनो मार्गो से दक्षिण भारत को जाने वाले मार्गो पर कलिङ्ग का नियन्त्रण था। यह  भीकलिंग युद्ध का प्रमुख कारण रहा।

3. यहाँ से दक्षिण-पूर्वी देशो से आसानी से सम्बन्ध बनाए जा सकते थे।

कलिंग का इतिहास

  1. वर्तमान उड़ीसा राज्य प्राचीन काल में कलिंग के नाम से प्रसिद्ध था।
  2. पहले यह नंदवंश के शासक महापद्मनंद के साम्राज्य का एक अंग था। कुछ समय के लिए मगध साम्राज्य से अलग हो गया था, परंतु अशोक ने गद्दी पर बैंठने के आठवें वर्ष इसे पुन: जीत लिया। इस युद्ध में कलिंगवासियों ने अशोक की सेना का असाधारण प्रतिरोध किया।
  3. कलिंग के एक लाख व्यक्ति मारे गए, डेढ़ लाख बंदी बनाए गए और इससे कहीं अधिक संख्या में, युद्ध से हुए विनाश के कारण, बाद में मर गए।
  4. इसी विनाश को देखकर अशोक युद्ध के बदले धर्म-विजय की ओर प्रवृत्त हुआ था।
  5. धौलगिरि नामक स्थान पर जहां अशोक की सेना का शिविर था और बाद में जहाँ उसने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी, अब एक आकर्षक स्तूप, मंदिर और शिलालेख विद्यमान हैं।
  6. आगे की शताब्दियों में कलिंग ने अनेक परिवर्तन देखे। कभी खारवेल यहाँ के शासक बने तो कभी यह गुप्त साम्राज्य में मिला।
  7. 6वीं-7वीं शताब्दी में थोड़े समय के लिए यहाँ की सत्ता हर्षवर्धन के हाथों में भी रही।
  8. अनन्तवर्मा चोडगंग जो पूर्वी गंग वंश का प्रमुख राजा था। उसने कलिंग पर 71 वर्ष (1076-1147 ई.) तक राज्य किया।

युद्ध भूमि में क्या हुआ?

कलिंग की एक स्वतंत्र सामूदाय गणराज्य की सेना का नेतृत्व राजा अनंत पद्मनाभन ने भी किया था। लड़ाई धौली की पहाड़ी पर लड़ी गई थी। अशोक और उनकी सेना ने राजा अनंत पद्मनाभन की सेना के साथ एक खतरनाक लड़ाई लड़ी। 

उन्होंने मौर्य सेना के लिए कड़ा विरोध का प्रदर्शन किया। कलिंग का पूरा शहर युद्ध मैदान में बदल गया और हर कोई मौर्य सेना के खिलाफ लड़ने के लिए आगे आया। हालांकि, उन्होंने विरोध किया और बहादुरी से लड़ाई लड़ी। वास्तव में, कई उदाहरणों में, कलिंग के राजा अनंत पद्मनाभन की अगुवाई वाली सेना विजयी नजदीक थी। आखिरी सांस तक, वे महान वीरता से लड़े और अंत में कलिंग के लोग युद्ध के मैदान में मारे गए। और अशोक महान ने कलिंग की लड़ाई जीती। यह एक भयंकर युद्ध था जिसमें कलिंग के 150,000 योद्धाओं और 100,000 मौर्य योद्धाओं का जीवन दाव पर लग गया था । 

युद्ध का दृश्य एक भयानक दृष्टि प्रस्तुत कर रहा था, पूरे इलाके सैनिकों की लाशों के साथ भरे हुए थे, गंभीर दर्द में घायल सैनिक पड़े हुए थे, गिद्धों ने उनके मृत शरीर पर आश्रय कर लिया था, बच्चे अनाथ हो गए थे वे अपने सगे सम्बन्धियों को खो चुके थे। विधवा शांत और निराश दिखाई दे रही थी। 

युद्ध के मैदान के आगे बहने वाली दया नदी रक्तपात के कारण पूरी तरह से लाल हो गई। हालांकि, विजय के बाद कलिंग को मौर्य साम्राज्य में शामिल किया गया परन्तु एक दुखद दृश्य बन चूका था।

कलिंग युद्ध के परिणाम

  • मौर्य साम्राज्य का विस्तार हुआ। इसकी राजधानी तोशाली बनाई गई।
  • इसने अशोक की साम्राज्य विस्तार की नीति का अन्त कर दिया।
  • इसने अशोक के जीवन पर बहुत प्रभाव डाला। उसने अहिंसा, सत्य, प्रेम, दान, परोपकार का रास्ता अपना लिया।
  • अशोक बौद्ध धर्म का अनुयायी बन गया। उसने बौद्ध धर्म का प्रचार भी किया।
  • उसने अपने संसाधन प्रजा की भलाई मे लगा दिए।
  • उसने ‘धर्म’ की स्थापना की।
  • उसने दूसरे देशो से मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध बनाए।
  • कलिंग युद्ध मौर्य साम्राज्य के पतन का कारण बना। अहिंसा की नीति के कारण उसके सैनिक युद्ध कला मे पिछड़ने लगे। परिणामस्वरूप धीरे-धीरे उसका पतन आरम्भ हो गया।