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तिरुपति बालाजी मंदिर का इतिहास | All About Tirupati Balaji History In Hindi

By rakesh / About :-2 years ago

तिरुपति बालाजी मंदिर का इतिहास | All About Tirupati Balaji History In Hindi

आंध्र प्रदेश के तिरुमाला में तिरुपति बालाजी का मंदिर(temple) स्थित हैं। तिरुपति बालाजी को वेंकटेश्वर, श्रीनिवास और गोविंदा के नाम से भी जाना जाता है। 'Tirumala' में स्थित यह मंदिर सबसे अमीर मंदिरों में से एक माना जाता है। यहां हर वर्ग के लोग बालाजी के दर्शन(visit) करने आते हैं। यहां फिल्मी सितारों से लेकर राजनेता आदि सभी दर्शन करने आते हैं। इस मंदिर को लेकर कई मान्यताएं(Beliefs) हैं। जिसकी वजह से यह इतना विख्यात है।

All About Tirupati Balaji History In Hindi

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15वीं शताब्दी में तिरुपति बालाजी मंदिर को प्रसिद्धि मिली। इतिहासकारों का मानना है कि 5वीं शताब्दी में यह हिंदुओं का प्रमुख धार्मिक केंद्र था। और 9वीं शताब्दी में कांचीपुरम के पल्लव शासकों ने इस पर कब्जा कर लिया था। तमिल साहित्य में तिरुपति को त्रिवेंद्रम कहा गया है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर की उत्पत्ति वैष्णव संप्रदाय ने की। इस संप्रदाय की मान्यता समानता में है। और शायद(Maybe) यही वजह है कि यहां हर वर्ग के लोग दर्शन करने आते हैं।

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भगवान बालाजी की कहानी

पौराणिक कथाओं की मान्यता के अनुसार कलयुग के दौरान भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए स्वयं भगवान पृथ्वी पर प्रकट हुए थे। एक बार, ऋषि भृगु यह मूल्यांकन करना चाहता थे कि पवित्र तीन देवताओं में कौन सबसे बड़ा है।

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प्राचीन कथा के अनुसार महर्ष‌ि भृगु बैकुंठ पधारे और आते ही शेष शैय्या पर योगन‌िद्रा में लेटे भगवान व‌िष्‍णु की छाती पर एक लात मारी। भगवान व‌िष्‍णु ने तुरंत भृगु के चरण पकड़ ल‌िए और पूछने लगे क‌ि ऋष‌िवर पैर में चोट तो नहीं लगी। लेक‌िन देवी लक्ष्मी को भृगु ऋष‌ि का यह व्यवहार पसंद नहीं आया और वह व‌िष्‍णु जी से नाराज(angry) हो गई। नाराजगी इस बात से थी क‌ि भगवान(god) ने भृगु ऋष‌ि को दंड क्यों नहीं द‌िया।

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नाराजगी में देवी लक्ष्मी बैकुंठ छोड़कर चली गई। भगवान व‌िष्‍णु ने देवी लक्ष्मी को ढूंढना(find) शुरु क‌िया तो पता चला क‌ि देवी ने पृथ्‍वी पर पद्मावती नाम की कन्या के रुप में जन्म ल‌िया है। भगवान व‌िष्‍णु ने भी तब अपना रुप बदला(Change) और पहुंच गए पद्मावती के पास। भगवान ने पद्मावती के सामने व‌िवाह का प्रस्ताव(Offer) रखा ज‌िसे देवी ने स्वीकार कर ल‌िया।

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अब धन(Funds) कहाँ से आये तब व‌िष्‍णु जी ने समस्या का समाधान न‌िकालने के ल‌िए भगवान(god) श‌िव और ब्रह्मा जी को साक्षी मानकर कुबेर से काफी धन कर्ज ल‌िया। इस कर्ज से भगवान व‌िष्‍णु के वेंकटेश रुप और देवी लक्ष्मी के अंश पद्मवती का व‌िवाह संपन्न हुआ, जो कि एक अभूतपूर्व विवाह था। शादी के बाद भगवान तिरुमाला की पहाड़ियों पर रहने लगे, कुबेर से कर्ज लेते समय भगवान ने वचन(promise) द‌िया था क‌ि कल‌ियुग के अंत तक वह अपना सारा कर्ज चुका देंगे। कर्ज समाप्त होने तक वह सूद चुकाते रहेंगे। भगवान के कर्ज में डूबे होने की इस मान्यता के कारण बड़ी मात्रा में भक्त धन-दौलत भेंट करते हैं ताक‌ि भगवान कर्ज मुक्त हो जाएं।

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तिरुपति बालाजी मंदिर की जानकारी

1. इस मंदिर के मुख्य द्वार के दरवाजे के दाईं ओर एक छड़ी रखी है l जिस छड़ी से बालाजी की बचपन में पिटाई की गई थी l और इसी वजह से उनकी ठोड़ी में चोट लग गई ll और तब से लेकर आज तक उनकी ठोड़ी में चंदन का लेप लगाया जाता है। ताकि घाव भर जाए l

2. अब बालाजी के ठोड़ी पर चंदन लगाना एक प्रथा बन गया है l

3. भगवान बालाजी के सिर पर आज भी रेशमी बाल हैं और उनमें उलझने नहीं आती और वह हमेशा ताजा लगते हैं l

4. मंदिर से 23 किलोमीटर दूर एक गाँव है, उस गाँव में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश निषेध है l वहाँ पर लोग नियम से रहते हैं l वहां  की महिलाएँ ब्लाउज नहीं पहनती l वहीँ से लाए गये फूल भगवान(god) को चढाए जाते है और वहीँ की ही वस्तुओं को चढाया जाता है जैसे- दूध, घी, माखन आदि l

5. भगवान बालाजी गर्भगृह के मध्य भाग में खड़े दिखते है मगर वे दाई तरफ के कोने में खड़े हैं बाहर से देखने पर ऎसा लगता हैl

6. बालाजी को सजाने के लिए धोती और साड़ी का प्रयोग किया जाता है l उन्हें ऊपर साड़ी और नीचे धोती पहनाई जाती है l

7. गर्भगृह में चढाई गई किसी वस्तु को बाहर नहीं लाया जाता, बालाजी के पीछे एक जलकुंड है उन्हें वहीं पीछे देखे बिना उनका विसर्जन किया जाता है l

8. बालाजी की पीठ को जितनी बार भी साफ करो, वहाँ गीलापन रहता ही है, वहाँ पर कान लगाने पर समुद्र घोष सुनाई देता है l

9. बालाजी के वक्षस्थल पर लक्ष्मीजी निवास करती हैं l हर गुरूवार को निजरूप दर्शन के समय भगवान बालाजी की चंदन से सजावट की जाती है l उस चंदन को निकालने पर लक्ष्मीजी की छवी उस पर उतर आती है l बाद में उसे बेचा जाता है l

10. यह कहा जाता है कि तिरुपति मंदिर की यात्रा तभी पूरी होती है जब उनकी पत्नी(wife) पद्मावती जो कि लक्ष्मी की अवतार थीं, उन के मंदिर की यात्रा की जाए l माता पद्मावती का मंदिर तिरुपति मंदिर से 5 km दूर है l

11. गर्भगृह में जलने वाले चिराग कभी बुझते नही हैं, वे कितने ही हजार सालों से जल रहे हैं किसी को पता भी नही है l

12. बताया जाता है सन् 1800 में मंदिर परिसर को 12 साल के लिए बंद किया गया था l किसी एक राजा ने 12 लोगों को गलती करने पर उन्हें मारकर दीवार पर लटकाया था ऐसा कहा जाता है, उस समय विमान वेंकटेश्वर प्रकट हुए l

13. तिरुपति बालाजी की मूर्ति हमेशा नम रहती है l

14. बालाजी मंदिर में भगवान की मूर्ति की सफाई के लिए विशेष तरह का कपूर लगाया जाता है l यह कपूर जब दीवार पर लगाया जाता है तब वह टूट जाता है l और बालाजी की मूर्ति(statue) पर लगाया जाता है तो ऐसा कुछ नहीं होता l

15. इस मंदिर में जो लोग दर्शन करने आते हैं वे अपने सिर के बालों(hair) को चढ़ाते हैं। यह बाल उनकी आर्थिक सहायता करते हैं। ताकि वे धन कुबेर का ऋण उतार सकें।

उपरोक्त वे कारण हैं जिनकी वजह से तिरुपति मंदिर की प्रसिद्धि है। तिरुपति मंदिर एक दर्शनीय स्थल है। जो भक्त सच्ची श्रद्धा से भगवान बालाजी के दर्शन के लिए जाता है। उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।

तिरुपति बालाजी मंदिर का इतिहास | All About Tirupati Balaji History In Hindi