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सोहनलाल द्विवेदी द्वारा लिखी गयी कविताएँ | Poem of Sohanlal Dwivedi in Hindi

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सोहनलाल द्विवेदी की कविताएँ | Best Poem of Sohanlal Dwivedi in Hindi
#1. "स्वागत! जीवन के नवल वर्ष
आओ, नूतन-निर्माण लिये,
इस महा जागरण के युग में
जाग्रत जीवन अभिमान लिये;" -सोहनलाल द्विवेदी
#2. "दीनों दुखियों का त्राण लिये
मानवता का कल्याण लिये,
स्वागत! नवयुग के नवल वर्ष!
तुम आओ स्वर्ण-विहान लिये।" -सोहनलाल द्विवेदी
#3. "संसार क्षितिज पर महाक्रान्ति
की ज्वालाओं के गान लिये,
मेरे भारत के लिये नई
प्रेरणा नया उत्थान लिये;" -सोहनलाल द्विवेदी
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#4. "मुर्दा शरीर में नये प्राण
प्राणों में नव अरमान लिये,
स्वागत! स्वागत! मेरे आगत!
तुम आओ स्वर्ण विहान लिये।" -सोहनलाल द्विवेदी
#5. "युग-युग तक पिसते आये
कृषकों को जीवन-दान लिये,
कंकाल-मात्र रह गये शेष
मज़दूरों का नव त्राण लिये;" -सोहनलाल द्विवेदी
#6. "श्रमिकों का नव संगठन लिये,
पददलितों का उत्थान लिये;
स्वागत! स्वागत! मेरे आगत!
तुम आओ स्वर्ण विहान लिये।" -सोहनलाल द्विवेदी
#7. "सत्ताधारी साम्राज्यवाद के
मद का चिर-अवसान लिये,
दुर्बल को अभयदान,
भूखे को रोटी का सामान लिये;" -सोहनलाल द्विवेदी
#8. "जीवन में नूतन क्रान्ति
क्रान्ति में नये-नये बलिदान लिये,
स्वागत! जीवन के नवल वर्ष
आओ, तुम स्वर्ण विहान लिये!" -सोहनलाल द्विवेदी
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#9. "कौन सिखाता है चिडियों को
चीं–चीं चीं–चीं करना?
कौन सिखाता फुदक–फुदक कर
उनको चलना फिरना?" -सोहनलाल द्विवेदी
#10. "कौन सिखाता फुर से उड़ना
दाने चुग-चुग खाना?
कौन सिखाता तिनके ला–ला
कर घोंसले बनाना?" -सोहनलाल द्विवेदी
सोहनलाल द्विवेदी द्वारा लिखी गयी कविताएँ | Poem of Sohanlal Dwivedi in Hindi




