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1998 के सफल परमाणु परीक्षण की कहानी | 1998 Successful Story of Nuclear Test in Hindi

By rakesh / About :-8 years ago

1998 में किया गया सफल परमाणु परीक्षण की कहानी | All About 1998 Successful Nuclear Test Story in Hindi

  • देश                         -  भारत
  • परीक्षण स्थल           -  पोखरण परीक्षण रेंज, राजस्थान
  • अवधि                     -  11–13 मई 1998
  • कुल परीक्षण             -  5
  • परीक्षण प्रकार           -  भूमिगत परीक्षण
  • उपकरण का प्रकार     -  विखंडन/संलयन (फिशन/फ्यूज़न)
  • अधि. प्रतिफल          -  43–45 किलोटोन्स ऑफ़ TNT (180–190 Tजूल) परीक्षण किया

साल 1998, प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने 11 मई 1998 के दिन राजस्थान के पोकरण में परमाणु परीक्षण कर पूरी दुनिया को चौंका दिया था l अचानक किए गए इन परमाणु परीक्षणों(Trials) से अमेरिका, पाकिस्तान समेत बहुत से देश दंग रह गए थे l पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की अगुआई में यह Mission कुछ इस तरह से अंजाम दिया गया कि अमेरिका समेत पूरी दुनिया को इसकी भनक तक नहीं लगी l इससे पहले 1974 में इंदिरा गांधी की सरकार ने पहला परमाणु परीक्षण (Pokaran-1) कर दुनिया को भारत की ताकत का लोहा मनवाया था, इसे ऑपरेशन 'स्माइलिंग बुद्धा' नाम दिया गया था। 

पोकरण परमाणु परीक्षण के 20 साल पूरे होने के मौके पर आज बीजेपी(BJP) की युवा ईकाई कई कार्यक्रम आयोजित कर युवाओं को परीक्षण की प्रक्रिया, आवश्यकताओं और उससे उपजे 'स्वाभिमान' के भाव से अवगत कराएगी। आइए जानते हैं कि 20 साल(year) पहले कैसे बड़े ही गोपनीय तरीके से भारत ने किया था यह बड़ा परमाणु विस्फोट: 

दरअसल, अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA भारत पर नजर रखे हुए थी और उसने पोकरण पर निगरानी रखने के लिए 4 सैटलाइट लगाए थे। हालांकि भारत ने CIA और उसके सैटलाइटों को चकमा देते हुए परमाणु परीक्षण कर दिया। 

इस प्रॉजेक्ट के साथ जुड़े वैज्ञानिक कुछ इस कदर सतर्कता(Alertness) बरत रहे थे कि वे एक दूसरे से भी कोड भाषा में बात करते थे और एक दूसरे को छद्म नामों से बुलाते थे। ये झूठे नाम इतने हो गए थे कि कभी-कभी तो साथी वैज्ञानिक एक दूसरे का नाम भूल जाते थे। 

सेना की वर्दी​ में वैज्ञानिक-

उस दिन सभी को आर्मी की वर्दी में परीक्षण(testing) स्थल पर ले जाया गया था ताकि खुफिया एजेंसी को यह लगे कि सेना के जवान ड्यूटी दे रहे हैं। 

'MissileMan' अब्दुल कलाम भी सेना की वर्दी में वहां मौजूद थे। बाद में इसकी तस्वीरें भी सामने आई थीं, जिसमें पूरी टीम सेना की वर्दी में दिखाई पड़ी। 


सेना की वर्दी ​में कलाम व अन्य वैज्ञानिक-

बताते हैं कि डॉ. कलाम को कर्नल पृथ्वीराज का छद्म(Pseudo) नाम दिया गया था और वह कभी ग्रुप में टेस्ट साइट पर नहीं जाते थे। वह अकेले जाते जिससे किसी को भी उन पर शक न हो। 

10 मई की रात को योजना को अंतिम रूप देते हुए ऑपरेशन को 'Operation शक्ति' नाम दिया गया। 

ट्रक से पहुं​चा बम-

करीब 3 बजे परमाणु बमों को सेना के 4 ट्रकों के जरिए ट्रांसफर किया गया। इससे पहले इसे मुंबई से भारतीय वायु सेना के प्लेन से जैसलमेर बेस लाया गया था। 

ताजमहल​ और कुंभकरण जैसे कोडवर्ड्स-

ऑपरेशन के दौरान दिल्ली के कार्यालय(Office) में कुछ इस तरह से बातें की जाती थीं, जैसे- क्या स्टोर आ चुका है? परमाणु बम के एक दस्ते को 'TajMahal' कहा जा रहा था। अन्य कोड वर्ड्स थे वाइट हाउस और कुंभकरण। 

परीक्षण के लिए 'Pokaran' को ही चुना गया था क्योंकि यहां मानव बस्ती बहुत दूर थी। आपको बता दें कि जैसलमेर से 110 किमी दूर जैसलमेर-जोधपुर मार्ग पर पोकरण एक प्रमुख कस्बा है। 

बड़े कुएं खोदे​ गए थे-

वैज्ञानिकों ने इस मिशन को पूरा करने के लिए रेगिस्तान(Desert) में बड़े कुएं खोदे और इनमें परमाणु बम रखे गए। कुओं पर बालू के पहाड़ बनाए गए जिन पर मोटे-मोटे तार निकले हुए थे। 

धमाके से आसमान में धुएं(Smoke) का गुबार उठा और विस्फोट की जगह पर एक बड़ा गड्ढा बन गया था। इससे कुछ दूरी पर खड़े 20 वैज्ञानिकों का समूह पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए थे। 

पोकरण परीक्षण रेंज पर 5 परमाणु बम के परीक्षणों से भारत पहला ऐसा परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया, जिसने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। 

परीक्षण के बाद वाजपेयी ने ऐलान किया, '11 मई 1998, 15.45 बजे भारत ने पोकरण रेंज में अंडरग्राउड न्यूक्लियर टेस्ट किया'। वह खुद धमाके वाली जगह पर गए थे।कलाम ने टेस्ट के सफल होने की घोषणा की थी। 

कलाम ने बताया, भारत पर था दबाव-

कलाम ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उस समय भारत पर अंतरराष्ट्रीय(International) दबाव काफी ज्यादा था l लेकिन तत्कालीन पीएम वाजपेयी ने तय किया था कि वह आगे बढ़कर परीक्षण करेंगे। इसके साथ ही भारत एक परमाणु 'parmanu' ताकत बना।

भारत के इन परमाणु 'parmanu' परीक्षणों की सफलता से दुनियाभर में भारत की धाक जम गई। केंद्र में वाजपेयी की सरकार बने सिर्फ तीन महीने हुए थे और हर कोई इस बात से हैरान था कि इतनी जल्दी वाजपेयी ने इतना बड़ा कदम(Step) कैसे उठा लिया। 

हालांकि वाजपेयी ने यह भी कहा था कि हम पहले परमाणु 'parmanu' हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। जिन देशों के पास परमाणु हथियार नहीं हैं, भारत उनके खिलाफ इन हथियारों का इस्तेमाल कभी नहीं करेगा। 

परमाणु हथियार डिजाइन और विकास-

विकास और परीक्षण टीम-

मुख्य तकनीकी आपरेशन में​ शामिल कर्मी थे:

  • परियोजना के मुख्य समन्वयक
  • डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम (जो बाद में भारत के राष्ट्रपति), प्रधानमंत्री(PM) के वैज्ञानिक सलाहकार और डीआरडीओ के प्रमुख।
  • डॉ आर चिदंबरम, परमाणु ऊर्जा आयोग और परमाणु ऊर्जा विभाग के अध्यक्ष।
  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ)
  • डॉ लालकृष्ण संथानम; निदेशक, टेस्ट साइट तैयारी।
  • अन्वेषण और अनुसंधान के लिए परमाणु खनिज निदेशालय
  • डॉ जी आर दीक्षितुलू; वरिष्ठ अनुसंधान वैज्ञानिक B.S.O.I समूह, परमाणु सामग्री अधिग्रहण 
  • भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी)
  • डॉ अनिल काकोडकर, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के निदेशक।
  • डॉ सतिंदर कुमार सिक्का, निदेशक; थर्मोन्यूक्लियर हथियार विकास।
  • डा एम एस रामकुमार, परमाणु ईंधन और स्वचालन विनिर्माण समूह के निदेशक; निदेशक, परमाणु घटक विनिर्माण समीति।
  • डॉ डी.डी. सूद,रेडियोकेमिस्ट्रीऔर आइसोटोप ग्रुप के निदेशक; निदेशक, परमाणु सामग्री अधिग्रहण।
  • डॉ एस के गुप्ता, ठोस अवस्था भौतिकी और स्पेक्ट्रोस्कोपी समूह; निदेशक, डिवाइस डिजाइन एवं आकलन।
  • डॉ जी गोविन्दराज, इलेक्ट्रॉनिक और इंस्ट्रूमेंटेशन ग्रुप के एसोसिएट निदेशक; निदेशक, क्षेत्र इंस्ट्रूमेंटेशन।

परमाणु बम और वि​स्फोट-

पांच परमाणु उपकरणों को 'operation- शक्ति' के दौरान विस्फोट किया गया। सभी उपकरणों हथियार ग्रेड प्लूटोनियम थे:

शक्ति 1 - एक थर्मोन्यूक्लियर डिवाइस 45 किलो टन उपज का, लेकिन इसे 200 किलो टन तक के लिए बनाया गया है।

शक्ति 2 - एक प्लूटोनियम इम्प्लोज़न डिजाइन 15 किलो टन की उपज का जिसे एक एक बम या मिसाइल द्वारा एक वॉर-हेड के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है यह डिवाइस 1974 के मुस्कुराते बुद्ध (पोखरण-1) के परीक्षा में इस्तेमाल की गई डिवाइस का एक सुधार था जिसे परम सुपर कंप्यूटर पर सिमुलेशन का उपयोग पर विकसित किया गया था।

शक्ति 3 - एक प्रयोगात्मक लीनियर इम्प्लोज़न डिजाइन था जिसमें कि "गैर-हथियार ग्रेड" प्लूटोनियम जो की न्यूक्लियर फिशन के लिए आवश्यक सामग्री छोड़े सकता था, यह 0.3 किलो टन उपज का था।

शक्ति 4 - एक 0.5 किलो टन की प्रयोगात्मक डिवाइस।

शक्ति 5 - एक 0.2 किलो टन की प्रयोगात्मक डिवाइस। एक अतिरिक्त, छठे डिवाइस (शक्ति 6 ) भी उपस्थित होने का अंदाज़ा लगाया गया पर उसे विस्फोट नहीं किया गया।

1998 के सफल परमाणु परीक्षण की कहानी | 1998 Successful Story of Nuclear Test in Hindi