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साइमन कमीशन क्या था एवं सम्पूर्ण जानकारी | What was Simon Commission in India

साइमन कमीशन क्या था एवं सम्पूर्ण जानकारी | What was Simon Commission in India

In : Meri kalam se By storytimes About :-11 months ago
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साइमन कमीशन क्या था ? | All About Simon Commission Details in Hindi

1947 में मिली आज़ादी से पूर्व, इस आज़ादी के प्राप्ति हेतु भारतवर्ष में कई तरह के आंदोलन राजनितिक संगठनों, विचारकों और क्रांतिकारिओं को मिलाकर चलाये जा रहे थे और उनका एक मात्रा मकसद अंग्रेजो को भारत से निकालना था | 

Simon Commission Details in Hindi
via : mpositive.in

इधर भारतीय आंदोलन चरम पर थे और उधर ब्रिटिश सरकार ने साइमन कमीशन की घोषणा कर दी थी| ब्रिटिश सरकार की ये घोषणा ऐसे समय में आयी जब चौरी चौरा, जलियावाला बाग़ हत्याकांड और असहयोग आंदोलन की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी| ब्रिटिश सरकार के एक और कदम ने भारतीय स्वतंत्रता की मांग कर रहे आंदोलनकारियों के खेमे में खलबली मचा दी| साइमन कमीशन की बात पूरे भारत में जंगल के आग की तरह फैल गयी और पूरे देश से यही आवाज़ चारो ओर से गुंजायमान होने लगी "साइमन गो बैक- साइमन गो बैक"  परन्तु हुआ वही जो ब्रिटिश सरकार चाहती थी, चारों तरफ से हो रहे विरोधों के बावजूद 3 फरवरी 1928 को साइमन कमीशन भारत आ ही गया| आखिर क्या था साइमन कमीशन में जिसके चलते भारतीय राष्ट्रीय खेमे ने इसका विरोध किया था, सात सदस्यी साइमन कमीशन में एक मात्रा भारतीय बी. आर. आंबेडकर को छोड़ कर कोई भी और भारतीय प्रतिनिधिकर्ता नहीं था| इस कॉमिशन का गढन 1927 में भारत में सविधान सुधारों के अध्ययन के लिए किया गया था|

Simon Commission Details in Hindi

via : ytimg.com

साइमन कमीशन के बहिष्कार कर फैसला तत्कालीन भारतीय कांग्रेस के मद्रास अधिवेशन में सर्व सम्मति से लिया गया और मुस्लिम लीग ने भी बहिस्कार को समर्थन दिया था| सम्पूर्ण विरोधों के बावजूद साइमन कमीशन जब 3 फरवरी 1928 को भारत पंहुचा तो कोलकत्ता, लाहौर, लखनऊ, विजयवाड़ा और पुणे सहित ये जहाँ जहाँ पहुंचा वह- वहां स्वतंत्रता आंदोलनकारियों द्वारा काले झंडे दिखाए गए, "साइमन गो बैक" के नारे लगाए गए| इस कमीशन का विरोध करते-करते स्वतंत्रता सेनानियों ने ब्रिटिश सरकार को इस बात के लिए विवश करने का भरपूर प्रायस किया कि वो इस कमीशन को वापस ले ले, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने उसके बदले में विरोध करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों पर लाठी चार्ज करवाया जिसमे देश के प्रमुख नेता जवाहर लाल नेहरू और गोविन्द बल्लभ पंत घायल हो गए थे वही लाला लाजपत राय कि 17 नवंबर 1928 को मृत्यु हो गयी थी परन्तु मरने से पूर्व उनकी ये बातें_______"मेरे ऊपर बरसी हर एक लाठी कि चोट अंग्रेजों के ताबूत में कील बनकर ठुकेगी " अंततः सत्य साबित हुई और हुआ भी वही 

लेकिन इतने बड़े विरोधों के बावजूद भी साइमन कमीशन ने अपनी जो रिपोर्ट दी उसके अनुसार:

  1. प्रांतीय क्षेत्र में विधि तथा वयवस्था सहित सभी क्षेत्रों में उत्तरदाई सरकार गठित कि जाये|
  2. केंद्र में उत्तरदायी सरकार के गठन का अभी समय नहीं आया
  3. केंद्रीय विधान मंडलों को पुनर्गठित किया जाये जिसमे एक इकाई की भावना को छोड़ कर संगी भावना का पालन हो साथ ही इसका सदस्य परोक्ष पद्धति से प्रान्ती विधान मंडल द्वारा चुना जाये|