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एक IAS ऑफिसर जो डॉक्टर बन करती है गरीबो की सेवा | Akanksha Bhaskar IAS Story In Hindi

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हाल ही में हमने स्टोरी टाईम्स के माध्यम से आपको तमिलनाडु के थूकुकुडी के जिला कलेक्टर की अनोखी सोच के बारे में बताया था की कैसे जब उनके कार्यलय में दिव्यांग लोग नौकरी के लिए आएं थे। तब वो उन्हें सरकारी नौकरी तो नही दे पाएं लेकिन उनके लिए कलेक्ट्रेट परिसर में ही एक कैफे खोल कर उन्हें रोजगार दे दिया। कलेक्टर साहब की इस अनोखी सोच ने कई लोगो की भावना में परिवर्तन किया है। बस आज ऐसी ही एक कहानी है हमारे पास आईएएस अफसर की जिन्होंने गरीब असहाय लोगो की सेवा करने की ठानी । यह आईएएस ऑफिसर है पश्चिम बंगाल के रघुनाथपुर की आकांक्षा भास्कर की।
आईएएस बनने से पहले थी एक डॉक्टर
वर्तमान में बंगाल के रघुनाथपुर में आईएएस के पद नौकरी कर रही आकांशा आईएएस बनने से पहले एक डॉक्टर थी। आंकाशा आज एक आईएएस अधिकारी होने के साथ वो अपनी डॉक्टर वाले पद को न भूलते हुए आज भी उस पर काम कर रही है। आज जब भी छुट्टी का दिन होता है वो गरीब असहाय लोगो से मिलती है उनकी समस्या सुन उनका ईलाज करती है। एक बार जब आंकाशा अपनी ड्यूटी के दौरान पुरुलिया में स्थित अस्पताल की जांच करने पहुंची तब आंकाशा वहां के मैनेजमेंट को देख वो काफी निराश हुई। हर व्यवस्था चौपट थी बस फिर क्या खुद आकांशा ने उठाया जिम्मा और लग गई गरीबो की सेवा में।
अस्पताल के हालात थे खस्ता
आंकाशा ने “ द बेटर इंडिया ” से बात करते हुए बताया की- “ जब मै पुरुलिया के संतुरी अस्पताल में गई तब वहां पाया की अस्पताल में मरीजो की देखभाल के लिए स्टाप की कमी थी। अस्पताल में मरीजो की संख्या के अनुसार अस्पताल में जरुरी सुविधाएं अपलब्ध नही थी। जब अस्पताल मे मैने गरीब व असहाय लोगो को देखा तो सोचा की यह वह सबसे बेहतर समय जब इन लोगो के साथ जुड़ा जा सकें।
पहले दिन 40 मरीजो को परामर्श व की दवा की व्ययवस्था
अस्पताल के हालात देख आंकाशा ने खुद आगे आते हुए अपने पहले दिन करीब 40 मरीजो का ईलाज किया व उनके लिए उचित दवाइयों की व्यवस्था करवाई। पहले दिन ईलाज के बाद आंकाशा की यह प्रक्रिया हर छुट्टी के दिन बन गई। आंकाशा आज अपने एसडीओं क्षेत्र के अलावा दूर-दूर तक लोगो से जुड़ उनका ईलाज कर रही है।
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बनारस की है आईएएस आकांशा भास्कर
पश्चिम बंगाल के रघुनाथपुर में आईएएस पद कार्यरत आकांशा भास्कर उत्तर-प्रदेश राज्य के बनारस रस की रहने वाली है। आकांशा का जन्म डॉक्टर परिवार में हुआ उनके माता व पिता डॉक्टर है। आकांशा ने भी कोलकाता की आरजी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया और एक डॉक्टर के रुप में कार्य करने लगी। आकांशा की डॉक्टर बनने के बाद पहली पोस्टिंग एक में हुई। जब आकांशा ने गांव में डॉक्टर के रुप में सेवा देनी शुरु की तब गांव के बिगड़े हालात देख उन्होंने प्रशासनिक सेवा में भर्ती होकर कुछ करने पर विचार किया।
पहली बार में पार की यूपीएससी की परीक्षा
आकांशा बताती है की - “ जब गांव में मेने डॉक्टर के रुप में सेवा शुरु की तब मेने पाया की लोगो को खुद के अधिकारो की भी जानकारी नही है। तब एक डॉक्टर होने के कारण में उनका ईलाज ही कर सकती थी। बस इन्हीं हालातो को देख उनके जीवन में अधिकारो की जागरुकता व उनके जीवन में कुछ बेहतर करने के लिए मैने प्रशासनिक सेवा में जाने का फैसला किया। बता दे की आकांशा जब 24 की उम्र थी तब उन्होंने अपने पहले सफल प्रयास में ही यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली। आकांशा ने तब ऑल ओवर इंडिया में 76 वीं रैंक हासिल की थी।
हेल्थ चेकअप आयोजन कर स्वास्थय के प्रती जागरुकता
आईएएस अधिकारी आकांशा भास्कर आज समय-समय पर गांव में हेल्थ चेकअप कैम्प का आयोजन करती है। आकांशा के अनुसार उनका मुख्य उद्देश्य गांव की महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरू करना है। कैम्प के दौरान महिला को स्वास्थ्य से जुड़ी हर जानकारी दी जाती है। मां बनने के बाद महिला को किन-किन बातों का ध्यान रखना है क्या आहार लेना है इन सब के साथ कैम्प में महिलाओं को मेडिकल किट भ मुहेया करवाई जाती है।
खुद देती है कैम्पों में सेवा
पश्चिम बंगाल के पुरूलिया की एसडिओ मेडम कहती है की - मेरे जीवन का प्रथम लक्ष्य है की गांव व आदिवासी लोगो का जीवन बेहतर बनाना इसमें स्वास्थ्य प्रथम सीढ़ी है। ” आज आकांशा खुद इन कैम्पों में शामिल होकर सेवा देती है। आकांशी के अनुसार वो कैम्प के दौरान लोगो का ईलाज व परामर्श देने के साथ गांव युवा व बच्चों को स्वास्थ्य के प्रती जागरुक करती है।
एक IAS ऑफिसर जो डॉक्टर बन करती है गरीबो की सेवा | Akanksha Bhaskar IAS Story In Hindi




