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रुद्रमा देवी का इतिहास । All About Rudrama Devi History in Hindi

रुद्रमा देवी का इतिहास । All About Rudrama Devi History in Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-1 year ago
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रुद्रमा देवी की जीवनी व इतिहास

  • पूरा नाम- रुद्रमा देवी

  • जन्म- 1259

  • मृत्यु- 27 नवंबर 1289 

  • जन्म स्थान- चन्दुपटला 

  • संतान- मुमादमम्, रुय्याम्मा लोग

  • पिता का नाम- गणपति देव 

  • पति का नाम- वीरभद्र

  • वंश का नाम- काकतीय वंश 

  • अन्य जानकारी- जब रुद्रमा देवी ने शासन सम्भाला तब उसकी आयु मात्र 14 वर्ष थी।

रुद्र्मा देवी काकतीय वंश की एक  महिला शासक थीं। यह भारत के इतिहास के कुछ महिला शासकों में से एक थीं। रानी रूद्रमा देवी या रुद्रदेव महाराजा, 1263 से उनकी मृत्यु (Death)तक दक्कन पठार में काकातिया वंश की एक राजकुमारी थी। वह भारत में सम्राटों के रूप में शासन करने वाली बहुत कम स्त्रियों में से एक थी..

रानी रुद्रमा देवी कौन थी?

All About Rudrama Devi History in Hindivia : thehindu.com

रुद्रमा देवी वारंगल के काकतीय वंश की रानी थी। रुद्र्मा देवी जन्म गणपति देव के यहाँ हुआ था। राजा गणपति के कोई पुत्र नहीं होने के कारण पिता की मृत्यु के पश्चात् रुद्रमा देवी ने शासन किया। जब इन्होने शासन संभाला उस समय वह मात्र 14 वर्ष की थी। 
उन्हें वारंगल के किले को पूरा करने, तेलंगाना में सिंचाई टैंक प्रणाली की श्रृंखला को शुरू करने, अस्पतालों की स्थापना करने और सैनिकों के प्रशिक्षण हेतु पेरीनी शिव तांडवम (Perini Shiva Tandavam) नृत्य कला का इस्तेमाल करने का श्रेय दिया जाता है। 

रुद्रमादेवी का वैवाहिक जीवन-

All About Rudrama Devi History in Hindivia : googleusercontent.com

रानी रुद्रमादेवी ने वीर भद्र से शादी की। वह निदादावोलू, चालुक्य के राजकुमार थे। उन्होंने एक लड़के के रूप में अपने आप को तैयार किया और उन्होंने युद्धपोतों की जटिलताओं, राज्य के प्रशासन के विभिन्न पहलुओं को सीखा, क्योंकि प्रत्येक राजकुमार को अपने प्रारंभिक(Initial) दौर में इस तरह के प्रशिक्षण के माध्यम से एक आशाजनक शासक बनना पड़ता है।

काकतीय साम्राज्य पर आक्रमण-

1268-70 के सालों के दौरान, यादव राजा महादेव ने काकतीय साम्राज्य पर हमला किया लेकिन इससे उसे कुछ भी हासिल नहीं हुआ। यह एक हमला था और इसके परिणामस्वरूप काकतीय वंश के किसी भी क्षेत्र(Area) का नुकसान नहीं हुआ।
वर्ष 1280 के दौरान, रुद्रमादेवी के पोते को युवराज के रूप में नियुक्त किया गया। उसके बाद 1285 में, पंजियों, यादवों और होसैलों ने एकसाथ मिलकर काकतीय साम्राज्य पर कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन  प्रतापरुदादेव, युवराज ने स्थिति का सफलतापूर्वक हल निकाल लिया।

All About Rudrama Devi History in Hindi

रुद्रमादेवी की मूर्ति का विवरण-

  • पहले शिलालेख (एक आयताकार फ्रेम) में शानदार रूप से रानी रुद्रमा देवी के शाही व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व किया गया है, जिसमें घोड़े पर सवार रानी के दाहिने हाथ में तलवार है और बायीं तरफ तलवार लटकी हुई है।  

  • इसके अतिरिक्त रानी के ऊपर एक राजसी प्रतीक को भी चिन्हित(Marked) किया गया है 

  • उन्होंने पुरुष योद्धा की भाँति वस्त्र धारण किये हुए है, जिसमें कमर पर Belt बँधी हुई है तथा दाहिना पैर पेडल पर लटका हुआ है। 

  • इसके अतिरिक्त घोड़े के शरीर के आसपास एक सजा हुआ पट्टा(Lease) बँधा हुआ है। 

  • दूसरे शिलालेख में (ऊर्ध्वाधर फ्रेम) पूरी तरह से थकी हुई रुद्रामा देवी को चित्रित(Painted) किया गया है। 

  • उसके दाएँ हाथ में तलवार है और उसके बाएँ हाथ में लगाम(Rein) है। लेकिन आश्चर्य की बात है कि इस स्थिति में भी घोड़े खड़े हुए हैं, परंतु उनके ऊपर सजी हुई पट्टियाँ(Straps) यहाँ दिखाई नहीं दे रही हैं।

  • इसके अलावा, शाही प्रतीक चिन्ह जो पहली मूर्ति में उनके ऊपर चिन्हित(Marked) है, दूसरे शिलालेख में वह अनुपस्थित है, जो इस बात का प्रतीक है कि युद्ध में उसकी पराजय हुई है।

काकतीय वंश के शासक

  • यर्रय्या या बेतराज प्रथम (इ.स. 1000 से 1050)

  • प्रोलराज प्रथम (इ.स. 1050 से 1080) 

  • बेतराज द्वितीय (इ.स. 1080 से 1115 )

  • प्रोलराज द्वितीय (इ.स. 1115 से 1158)

  • रुद्रदेव या प्रतापरुद्र प्रथम (इ.स. 1158 से 1197)

  • महादेव (इ.स. 1197)

  • गणपति (इ.स. 1198 से 1261)

  • रुद्रम्मा (इ.स. 1261 से 1296)

  • प्रतापरुद्र द्वितीय (इ.स. 1296 to 1326)