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महान भारत के ये प्राचीन आविष्कार जिनसे आप भी होंगे अब तक अनजान | Ancient Inventions In India

महान भारत के ये प्राचीन आविष्कार जिनसे आप भी होंगे अब तक अनजान | Ancient Inventions In India

In : Meri kalam se By storytimes About :-10 months ago
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भारत में प्राचीन काल से ज्ञान को अत्यधिक महत्व दिया गया है कला विज्ञान गणित और ऐसे ही कई क्षेत्र है जिनमे भारत का महत्वपूर्ण योगदान है आधुनिक युग के ऐसे कई अविष्कार है जो भारतीय शोधो के निष्कर्ष पर आधारित है तो चलिए दोस्तों आज इस लेख में जानते है वो कौनसी खोजे है जो भारत की देन है 

खगोल विज्ञान की उत्पत्ति - Astronomy

Ancient Inventions In India

Source apod.nasa.gov

दोस्तों सम्पूर्ण विश्व को खगोल विज्ञान की देन का श्रेय भारत को ही जाता है वेद मानव संभ्यता के लगभग सबसे पुराने लिखित दस्तावेज है ऋग्वेद में खगोल विज्ञान से संबंधित लगभग 30 श्लोक है यजुर्वेद में 44 और अथर्ववेद में 162 श्लोक है युरेनस को एक राशि में आने के लिए 84 साल नेप्च्यून को 1648 साल पुलुटो  को 2844 सालों का वक्त लगता है इस बात से ये साबित होता है की उस काल में भी भारतीय ऋषि मुनियों को ग्रहो की चाल और उनकी स्थित का सटीक ज्ञान था 

आयुर्वेद और योग - Ayurveda and Yoga

Ancient Inventions In India

Source www.meditationretreat.org

आयुर्वेद और योग जिसको आज पूरी दुनिया के लोग अपने जीवन का एक जरुरी भाग मानते है ये भी भारत की ही देन है आयुर्वेद का अविष्कार ऋषि मुनियों ने अपने मोक्ष में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए किया था लेकिन बाद में समय के साथ इसने चिकित्सा पद्धति का रूप ले लिया आयुर्वेद प्रकृति के अनुसार जीवन जीने की सलाह देता है सेहतमंद रहकर मोक्ष की प्राप्ति करना ही भारतीय ऋषि मुनियों का प्रमुख उद्देश्य रहा है आयुर्वेद कहता है पहला सुख निरोगी काया भारत के महान ऋषि मुनि धन्वंतरि चरक सुश्रुत को आयुर्वेद को को व्यवस्थित करने के श्रेय जाता है ऋषि चरक ने 300 ईसा पूर्व में आयुर्वेद का महत्वपूर्ण ग्रन्थ चरक संहिता लिखा था उन्हें त्वचा चिकित्सक भी माना जाता था दोस्तों आचार्य चरक ने शरीर शास्त्र गर्भ शास्त्र रागतभिषरण शास्त्र औषधि शास्त्र आदि क्षेत्रो में गंभीर शोध किया तथा मघुमेह क्षय रोग आदि के उपचार का अमूल्य ज्ञान बताया था 8 वी शताब्दी में चरक सहित का अरबी में अनुवाद हुआ और इस तरह ये शास्त्र पच्छिमी देशो तक पहुंच गया बाद में चरक और चर्वण के ज्ञान के आधार पर ही यूनानी चिकित्स्य का विकास हुआ 

शल्य चिकित्स्य - Plastic Surgery

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पश्चिमी के लोगो के अनुसार प्लास्टिक सर्जरी आधुनिक ज्ञान की देन है प्लास्टिक सर्जरी का मतलब होता है शरीर के किसी भी हिस्से में कुछ बदलाव करना जो आज हीरो और हिरोइन्स अपने लुक में बदलाव लाने के लिए करवाते है भारत में सुश्रुत को पहला शल्य चिकित्सक माना जाता है आज से करीब 2600 साल पहले सुश्रुत युद्ध या प्राकृतिक आपदाओं में जिन लोगो के अंगो में चोट लग जाती थी या नाक चेहरे पर गंभीर चोट लग जाने पर सुश्रुत उन्हें ठीक करने का काम करते थे सुश्रुत ने 1000 ईसा पूर्व अपने साथी स्वास्थ्य वैज्ञानिको के साथ प्रशव, मोतियाबिंद , कृत्रिम अंग लगाना हड्डियों को जोड़ना , पथरी का इलाज और प्लास्टिक सर्जरी जैसी कई जटिल शल्य चिकित्सा के सिद्धांत प्रतिपादित किये थे

शून्य - Zero का आविष्कार

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Source static.hindi.firstpost.com

दोस्तों यदि आज शून्य नहीं होता तो दुनिया का विकास भी शून्य होता शून्य से पहले दुनिया में कई अंक प्रणालियाँ थी उत्तर वैदिक काल में शून्य के आविष्कार के बाद गणित में एक क्रांति आ गई अंको के मामले में दुनिया आज भारत की ऋणी है भारत ने अंको के अलावा शून्य की खोज की बीजगणित त्रिकोणमिति कलन की खोज भारत में ही हुई थी स्थान मूल्य प्रणाली दशमलव प्रणाली का विकास भी भारत में ही हुआ था

गुरुत्वाकर्षण - Gravity

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भास्कराचार्य प्रचीन भारत के सुप्रसिद गणितज्ञ और खगोल शास्त्री थे इनका जन्म 1114 ईस्वी में हुआ था भास्कराचार्य के द्वारा लिखित ग्रंथो का अनुवाद अनेक विदेशी भाषाओं में किया जा चूका है भास्कराचार्य द्वारा लिखित ग्रंथो ने अनेक विदेशी विद्वानों को भी शोध का रास्ता दिखाया है न्यूटन से 500 वर्ष पूर्व भास्कराचार्य ने गुरुत्वाकर्षण बल के बारे में जान लिया था और उन्होंने अपने दूसरे ग्रन्थ सिद्धांत सिरोमनि में इसका उल्लेख भी किया है गुरुत्वाकर्षण के सम्बन्ध में उन्होंने लिखा है " पृथ्वी अपने आकाश का पदार्थ स्वशक्ति से अपनी और खींच लेती है इस कारण आकाश का पदार्थ पृथ्वी पर गिरता है इस बात से सिद्ध होता है की पृथ्वी में गुरुत्वाकर्षण की शक्ति है भास्कराचार्य के एक और ग्रन्थ लीलावती में गणित और खगोल विज्ञान समन्धी विषयों पर प्रकाश डाला गया है सन 1163 में उन्होंने करणहुतु  नामक ग्रन्थ की रचना की थी इस ग्रन्थ में बताया गया है की जब चन्द्रमा सूर्य को ढक लेता है तब सूर्यग्रहण और जब पृथ्वी की छाया चन्द्रमा को ढक लेती है तो चंद्र ग्रहण होता है ये पहला लिखित प्रमाण था जब दुनिया को सूर्य ग्रहण चंद्र ग्रहण की सटीक जानकारी मिली थी 

विमान - Vimana

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Source cdn1.collective-evolution.com

आज इतिहास की हर किताब और स्कूलो के कोर्स में ये बताया जाता है की विमान की खोज राइट ब्रदर्स ने की थी लेकिन दोस्तों ये बिलकुल गलत है हा ये बात सही है की आज के आधुनिक विमान की खोज हार्वेल  और वेल्बर राइट 1903 में की थी लेकिन उनसे हजारो साल पहले ऋषि भारद्वाज ने विमान शास्त्र लिखा था जिसमे हवाई जहाज बनाने की तकनीक का वर्णन मिलता है चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में महर्षि भारद्वाज द्वारा लिखित पैमानिक शास्त्र में एक उड़ने वाले विमान और उनके कई प्रकार बताये गए थे गोधा एक ऐसा विमान था जो अदृश्य हो सकता था और परोक्ष जो दुश्मन के विमान को नष्ट कर सकता था प्रलय एक प्रकर विधुत ऊर्जा का शस्त्र था उससे विमान चालक भयंकर तबाही   मचा सकता था जलधरो विमान जो दिखने में बादलों की भांति दिखता था स्कंद खंड में उल्लेख मिलता है की ऋषि कर्दम ने अपनी पत्नी के लिए एक विमान की रचना की थी जिसकी सहायता से वो कही भी आ जा सकती थी रामायण में भी पुष्पक विमान का उल्लेख मिलता है जिस में बैठ कर रावण ने माता सीता का हरण किया था और इसी पुष्पक विमान पर बैठ कर श्री राम ने लंका से अयोध्या तक का सफर तय किया था

इलेक्ट्रिसिटी - Electricity

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Source postcardhindi.news

बिजली का आविष्कार महाराजा अगस्त्य जो राजा दसरथ के राजगुरु थे इनकी गणना सप्त ऋषियो में की जाती है ऋषि अगस्त्य ने "अगस्त्य संहिता" नामक ग्रन्थ की रचना की थी आचर्य जनक रूप से इस ग्रन्थ में विधुत उत्पादन से जुड़े कई सूत्र मिलते है इस ग्रन्थ में बिजली बनाने वाले यंत्रो काफी विस्तार से लिखा हुआ है और उन्हें बनाने के तरीके भी बताये गए है अगस्त्य संहिता में विधुत का उपयोग इलेक्ट्रो प्लेटिंग करने का भी विवरण मिलता है उन्होंने बेटरी के द्वारा सोने चांदी तांबे पॉलिश करने की विधि निकाली थी

परमाणु सिद्धांत के आविष्कारक - Nuclear Power

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Source www.ipsnews.net

 परमाणु बम से आज पूरी दुनिया अवगत है की ये एक बार चलने पर कितना सर्वनाश कर सकता है आधुनिक काल में परमाणु बम के अविष्कारक है जॉन रोबर्ट ओप्पेन्हेइमेर रॉबर्ट के नेतृत्व में 1939 से 1945 तक कईवैज्ञानिकों ने काम किया परमाणु बम का पहला परीक्षण 16 जुलाई 1945 को किया गया हालांकि सिद्धांत के जनक जॉन डॉल्टन को माना जाता है लेकिन दोस्तों उनसे भी 2500 साल पहले ऋषि कर्णाद ने वेदों में लिखे सूत्रों के आधार पर परमाणु सिद्धांत का प्रतिपादन किया था भारतीय इतिहास में ऋषि कर्णाद को परमाणु शास्त्र का जनक माना जाता है आचार्य कर्णाद ने बताया द्रव के परमाणु होते है 

दोस्तों इन सभी आविष्कारों के बारे में जानने के बाद हमें एक बात पता चलती है की  भारत प्राचीन काल से ही खोजों और अविष्कारों में सबसे आगे रहा है और आज का आधुनिक विज्ञान वेद पर ही आधारित है