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एथलिट हिमा दास का जीवन परिचय | Athlete Hima Das Biography In Hindi

By N.j / About :-7 years ago

गोल्डन गर्ल हिमा दास का जीवन परिचय | All About Athlete Hima Das Biography In Hindi 

  • नाम - हिमा दास 
  • जन्म -  9 जनवरी 2000 (18 साल )
  • जन्म स्थान - ढिंग टाउन असम में
  • पिता का नाम - रंजीत दास
  • माता का नाम - जोनाली दास
  • परिवार सदस्य - रिति दास (बहन)
  • प्रतिस्पर्धा - 400 मीटर  
  • रिकॉर्ड - विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप (400 मीटर दौड़ ) जीतने वाली प्रथम भारतीय महिला

फ़िनलैंड से आये इस समाचार ने कि एक भारतीय एथलिट ने 400 मीटर कि दौड़ स्पर्धा में 51.46 सेकंड का समय निकलकर स्वर्ण पदक जीता है और इस समाचार ने एथलिट हिमा दास को फ़िनलैंड से लेकर हिंदुस्तान तक लोकप्रिय बना दिया| उन्होंने वर्ल्ड U-20 में ये पदक हासिल कर भारत का नाम खेल जगत के मंच पर पूरे विश्व में रोशन कर दिया|                  

हिमा दास आरंभि​क जीवन

 

असम कि रहने वाली हिमा दास ने रोमानिया कि “एंड्रिआ मिकलोस” 52.07 सेकंड व “टेलर मैनसन” 52.28 को पीछे छोड़कर ये पदक जीता| दुनिया में अपने खेल के जरिये एक नयी पहचान बनाने वाली हिमादास का जन्म 9 जनवरी 2000 को असम राज्य के नागाव जिले के ढिंग में हुआ था| हिमा एक दलित परिवार से हैं, हिमा के पिता "रौनजित दास" और माता "जोमली दास" हैं | हिमा के पिता खेती का काम करते हैं और माँ एक गृहणी हैं, परिवार में कुल 16 सदस्य हैं और आर्थिक स्थिति ऐसी है कि बस परिवार का गुजारा हो सके| हिमा जिस गांव से ताल्लुक रखती हैं वहां हमेशा जल प्रलयता (बाढ़) का खतरा बना रहता है| इसी कारण हिमा को अभ्यास जारी रखने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है| हिमा 2017 में अन्तर-डिस्ट्रिक्ट कम्पटीशन राजधानी गुवाहाटी में एक कैंप में हिस्सा लेने आयी थीं जहाँ इनकी मुलाकात इनके कोच निपुण से हुई, उन्होंने ही इन्हे बाकी बची हुई ट्रेनिंग प्रदान की|                    

हिमा दास का धावक बनने ​का सफर

निपुण ने हिमा के माता-पिता को हिमा के क़ाबलियत का आंकलन करते हुए ये सलाह दी की वे हिमा की बाकी प्रैक्टिस पूरी करने के लिए गुवाहाटी में उसे रहने दें, परन्तु आर्थिक स्थिति ने पिता को ऐसा करने से रोका तो हिमा के कोच निपुण ने स्वयं सारा खर्च उठाने की जिम्मेदारी का आश्वासन देकर हिमा को गुवाहाटी लाये फुटबॉल  की शौक़ीन हिमा अपने अगल-बगल के इलाके में फुटबॉल  खेला करती हैं जिसके उन्हें 100-200 मिल जाते हैं और यही कारण है की हिमा के अंदर दौड़ने का स्टेमिना भी कायम है| शुरुआत में 200 मीटर की तैयारी कर रही हिमा को उनके कोच निपुण ने 400 मीटर की तैयारी करवाई, उन्हें विश्वास था कि हिमा 400 मीटर में बेहतर कर पाएंगी और हुआ भी ऐसा ही|                        

ढिंग एक्सप्रेस", मोन्जॉय" और "गोल्डन गर्ल नाम से हुई फेमस

हिमा दास के साहसिक प्रदर्शन के कारण लोग उन्हें "ढिंग एक्सप्रेस", "मोन्जॉय" और "गोल्डन गर्ल" के नाम से भी जानते हैं| विश्व अंडर 20 एथलेटिक चैम्पयनशिप जीतने वाली प्रथम भारतीय महिला हैं| हिमा दास ने इस प्रतियोगिता के पहले एशिया यूथ चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था और सातवें स्थान पर आयी थीं | ऑस्ट्रेलिया में हुए कॉमन वेल्थ गेम में 8वें स्थान पर आयीं| विश्व चैंपियनशिप में सेमी-फाइनल में पहुँचने पर हिमा द्वारा बोली गयी भाषा का भारतीय एथलिट संघ द्वारा मज़ाक उड़ाया गया परन्तु बाद में इन्होने माफ़ी मांगी| 
                                        
अपने कर्म से ही निंदकों को जवाब देने वाली इस महिला एथलिट से भविष्य को बहुत उम्मीदें हैं| अंशुमान दुबे कि ये पंक्तियाँ उनके जीवन के लिए सर्वदा उपयुक्त हैं- 

                    “अपने मनोबल को इतना सशक्त कर, 
                    कठिनाई भी आने से न जाये डर|
                    आत्मविश्वास रहे तेरा हमसफ़र, 
                    बड़े-बड़े कष्ट न डाल पाए कोई असर||

                    हौसला अपना बुलंद कर लो, 
                    साहस व हिम्मत को संग कर लो|
                    निर्भय होकर आत्मविश्वास से बढ़ो , 
                    संयम व धैर्य से सफलता की सीढ़ी चढ़ो” || -- अंशुमान दुबे


                      
अभी तो बस शुरुआत हुई है, आगे भी इस महान एथलिट को भारत का नाम विश्व मंच पर काफी आगे लेकर जाना है जिसके लिए वे सदैव अभ्यासकार्य में पूरी लगन और मेहनत से लगी हुई हैं|

एथलिट हिमा दास का जीवन परिचय | Athlete Hima Das Biography In Hindi