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पेरियार रामास्वामी का जीवन | Life Story of Periyar Ramaswamy in Hindi

पेरियार रामास्वामी का जीवन | Life Story of Periyar Ramaswamy in Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-1 year ago
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पेरियार रामास्वामी का सम्पूर्ण जीवन | All About Life Story of Periyar Ramaswamy in Hindi 

  • जन्म                 - 17 सितम्बर 1879, इरोड, मद्रास प्रेजिडेंसी
  • माता                 - वेंकटप्पा नायडू
  • पिता                 - चिन्ना थायमल
  • मृत्यु                  - 24 दिसम्बर 1973 (उम्र 94), वेलोर, तमिलनाडु, भारत
  • अन्य नाम          - ई.वी.आर पेरियार
  • व्यवसाय            - समाजिक कारकुन, राजनेता
  • राजनैतिक पार्टी    - इंडियन नेशनल कांग्रेस जस्टिस पार्टी, संस्थापक द्रविदर कड़गम
  • जीवनसाथी          - नागम्माई, मणिअम्मई
  • पुरस्कार              - UNESCO

इरोड वेंकट नायकर रामास्वामी जिन्हे दक्षिण भारत के राजनीतिक मंच का एक ऐसा नेता माना जाता है जिन्होंने हिन्दू धर्म के पाखंड के खिलाफ एक सार्थक लड़ाई लड़ी और इसी के चलते उन्होंने गैर ब्राह्मण जातियों के खिलाफ सन 1936 में आत्म सम्मान आंदोलन भी चलाये|

Life of Periyar Ramaswamy

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इरोड वेंकट नायकर रामास्वामी भारत के राजनीतिक पटल पर "पेरियार" नाम से प्रसिद्ध हुए . पेरियार ने भारतीय राजनीति का जीवन सफर भारतवर्ष के महत्वपूर्ण राज्य तमिलनाडु से किया था. इरोड के प्रसिद्ध राजनीतिक नाम पेरियार का अर्थ तमिल भाषा में "सम्मानित व्यक्ति" होता है| अपने नाम के अर्थ को इरोड ने पूर्ण सार्थकता प्रदान की और संसार को अपने कर्म क्षेत्र के माध्यम से लगातार ऐसे सुअवसर भी प्रदान किये|

पेरियार का प्रारंभिक जीवन- 

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पेरियार का जन्म भारत में 17 सितंबर 1879 को पिता "वेंकटप्पा" (धनि व्यापारी) और माँ "चिन्ना थायमल" के घर हुआ था| इनका जन्म स्थान इरोड था जो मद्रास रेजीडेंसी के अंतर्गत हुआ था| 

पेरियार के द्वारा नई पार्टी का गठन-

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वे 20वीं सदी में तमिलनाडु के प्रमुख राजनेताओं में से एक थे| इन्होने "जस्टिस"  पार्टी का गठन किया था, उनके द्वारा गठित इस पार्टी का प्रमुख उद्देश्य सिद्धांतवादी, रूढ़िवादी हिंदुत्व का घोर विरोध था| वे स्वयं क्षेत्रीय भाषाओँ को सम्माननीय स्थान दिलाने के पक्षधर थे| लिहाजा हिंदी के अनिवार्य शिक्षण का भी उन्होंने घोर विरोध किया| भारतीय तथा दक्षिण भारतीय समाज के शोषित वर्ग के लोगों की दशा सुधारने वाले सुधारकों में इनका नाम शीर्षस्थ पर है|

बचपन से ही पेरियार के घर में चल रही पूजा पाठ, उपदेशों की प्रमाणिकता पर ये सवाल उठाते रहते थे| हालाँकि पांच वर्ष की आयु में अपनी औपचारिक शिक्षा छोड़ कर पिता के व्यवसाय से इनको जुड़ना पड़ा फिर भी उनके मन के मनोभाओं का समाज की अर्थव्यवस्था के बजाय सामाजिक और राजनीतिक दशाओं ने ज्यादा प्रभावित किया| समाज की कुरीतियों के कारण उनका मन नकारात्मक ऊर्जाओं से ग्रसित हो जाता था, लिहाजा उन्होंने बाल- विवाह, देव दासी प्रथा, विधवा पुनर्विवाह, स्त्रियों तथा दलितों के शोषण का पूर्ण विरोध किया| इसके अलावा हिन्दू धर्म की वर्ण व्यवस्था का भी पूर्ण बहिस्कार किया| यही नहीं 19 वर्ष की उम्र में स्वयं से जुडी पत्नी "नगम्मल " (13 वर्षीय) को भी अपने ही विचारों से ओतप्रोत कर दिया| 

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इनके जीवन में 1904 में घटी एक घटना जिसमे इन्होने एक ब्राह्मण के भाई को गिरफ्तार करने में न्यायालय के अधिकारियों की मदद की चूँकि इनके पिता ब्राह्मणो का बहुत आदर करते थे इसलिए पेरियार के ऐसा करने के कारण उनके पिता ने उनकी पिटाई इकट्ठे हुए जन समूह के सामने कर दी थी लिहाजा अपने पिता से नाराज होकर वे काशी चले गए और वहां निशुल्क भोज खाने की इच्छा ने उन्हें ये बताया कि ये सिर्फ ब्राह्मणो के लिए है इस बात का इन्हे बहुत दुःख हुआ और इन्होने इसके बाद हिंदुत्व का विरोध करने कि ठान ली| इन्होने कोई और धर्म अपने जीवन में स्वीकार नहीं किया और आजीवन नास्तिक रहे| 

पेरियार का राजनीति में प्रवेश- 

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फिर उनके राजनीतिक जीवन का प्रारम्भ होना शुरू हो गया| सबसे पहले वो मंदिर के 'न्यासी' बने उसके बाद वे शहर नगरपालिका के 'प्रमुख' बन गए और चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के अनुरोध पर 1919 में कांग्रेस कि सदस्यता ले ली| कांग्रेस के अनुरोध पर उन्होंने "वाई - कॉम" आंदोलन का भी नेतृत्व किया| इस आंदोलन में मंदिरों की और जाने वाली सड़कों पर दलितों के चलन कि मनाही को हटाने का विरोध था| युवाओं के लिए कांग्रेस द्वारा संचालित शिविर ब्राह्मण शिक्षक और गैर ब्राह्मण छात्रों के बीच बढ़ते भेद भाव को देखकर इन्हे कांग्रेस से विरक्ति हो गई| इन्होने कांग्रेसी नेताओं के समक्ष दलितों और पीड़ितों के लिए आरक्षण का भी प्रस्ताव रखा जिसे मंजूरी नहीं मिल सकी अंततः उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी|

सोवियत रूस के दौरे से प्रभावित होकर भारत में साम्यवाद का समर्थन किया| जस्टिस पार्टी के स्थापना के बाद 1944 में इसे बदलकर "द्रविड़ कड़गम"|  सन 1947 के बाद अपने से चालीस साल छोटी युवती से विवाह कर विवादों को जन्म दिया| उसके बाद इस पार्टी से एक अलग पार्टी का उदय हुआ, जिसका "द्रविड़ मुनेत्र कड़गम" (डी एम् के) नाम दिया गया| सन 1970 में इन्हे इनके कार्यों के चलते यूनेस्को ने इन्हे पुरस्कृत किया और पुरस्कृत करते उन्हें नए युग का पैगम्बर, दक्षिण पूर्व एशिया का शुक्रत, समाज सुधारक आंदोलन कि पिता और अज्ञानता, अन्धविश्वास, और बेकार के रिवाजों का दुश्मन बताया| इन्होने "सच्ची रामायण" नाम कि एक विवादस्पद पुस्तक लिखी|

पेरियार की मृत्यु-

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दक्षिण भारतीय राजनीति के इस नायक ने 24 दिसंबर सन 1973 में हुई अपनी मृत्यु तक अपने आपको सत्ता कि राजनीति से अलग रखा और आजीवन दलितों तथा स्त्रियों कि दशा सुधारने के लिए अपने प्रयास जारी रखे|