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कार्ल मार्क्स की जीवनी | Karl Marx Biography In Hindi

कार्ल मार्क्स की जीवनी | Karl Marx Biography In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-11 months ago
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कार्ल मार्क्स की जीवनी | All About Karl Marx Biography In Hindi

  • जन्म - 5 मई 1818
  • जन्म स्थान -  ट्रायर, जर्मनी
  • पिता का नाम- हेनरिक मार्क्स
  • माता का नाम - हेनरीट प्रेसबर्ग
  • जीवनसाथी - जेनी वेस्टफेलन
  • धार्मिक मान्यता -  ईसाई; बाद में धर्म त्याग दिया (नास्तिक)
  • मृत्यु - 14 मार्च 1883 (उम्र 64) लंदन, ब्रिटेन
  • कहा दफनाया गया - 17 मार्च 1883, हाईगेट कब्रिस्तान, लंदन, यूनाइटेड किंगडम
  • राष्ट्रीयता - प्रशिया, जर्मन

मार्क्सवाद के प्रणेता "कार्ल मार्क्स" को उनके समाज अर्थशास्त्र और राजनीति के विषय के बारे में बताई गयी बातों के कारण ये उल्लेखनीय उपलब्धि मिली है|
कार्ल मार्क्स एक ऐसा व्यक्तित्व जिसके द्वारा दिए गए सिद्धांतों की गूंज आज भी पुरे विश्व में सुनाई देती है| कार्ल मार्क्स एक जर्मन दार्शनिक, अर्थशास्त्री, इतिहासकार, राजनितिक सिद्धांतकार, समाजशास्त्री, पत्रकार और वैज्ञानिक समाजवाद के प्रणेता थे|                

कार्ल मार्क्स का शुरुआ​ती जीवन

आजीवन गहरे आर्थिक संकट से जूझने वाले कार्ल मार्क्स का जन्म 5 मई 1818 को "ट्रेवेश (प्रशा)"  के एक यहूदी परिवार में हुआ था| 1824 में उनके परिवार ने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया| 'हीगेल   के दर्शन से प्रभावित रहने वाले मार्क्स ने 17 वर्ष की आयु में "बान विश्वविद्यालय" से कानून का अध्यन किया इसके पश्चात बर्लिन और जेना विश्वविद्यालयों में साहित्य, इतिहास और दर्शन का अध्यन किया| 1839 से 1841 के बीच उन्होंने "दिमा क्रिसस" और "ऐ पी क्यूरस" के प्राकृतिक दर्शन पर शोद प्रबंध लिखकर डॉक्टरी की उपाधि प्राप्त की| उच्च शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात 1842 में "मार्क्स कोलोन" से प्रकाशित "राइनिशे जीतुंग" पात्र के लेखक और संपादक के रूप में सम्मिलित हुए, किन्तु सर्व हरा क्रांति के विचारों के प्रतिपादन और प्रसार करने के कारण 15 महीने बाद ही 1843 में प्रकाशन बंद हो गया| 
                 
 

इसके बाद कार्ल पेरिस चले गए, इसके बाद " ह्यूस फ़्रैन्जोशीश जार बुषरपत्र" में इन्होने 'हीगेल  ' के नैतिक दर्शन के बारे में लिखा| 1845 में फ्रांस से निष्कासित होकर ब्रुसेल्स चले गए, वही उन्होंने जर्मनी के मजदूर संगठन और कम्युनिस्ट लीग के साथ निर्माण में सक्रिय योगदान दिया, 1847 में "एजेंल्स" के साथ अंतराष्ट्रीय समाजवाद का प्रथम घोषणा पत्र प्रकाशित किया, 1848 में पुनः "कोलोन" में "राइनिशे जीतुंग" का संपादन प्रारम्भ किया और उसके माध्यम से जर्मनी को समाजवादी क्रांति का सन्देश दिया, 1849 में इस अपराध में वो "प्रशा' से निष्कासित हुआ और पेरिस होते हुए लंदन चला गया| जीवन पर्यन्त वहीँ रहा, लंदन में सबसे पहले कम्युनिस्ट की स्थापना हुई किन्तु उसमे फूट पड़ गई, मार्क्स को उसे भंग करना पड़ा, "राइनिशे जीतुंग" भी छह अंक निकलकर बंद हो गया|
               

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समाजवाद के क्षेत्र से बाहर निकलकर उन्होंने "जुरक्रिटिक दर पॉलिटेसन इकॉनमी" नामक पुष्तक प्रेषित की, जिसमे अपने अर्थ  व्यवस्था  अध्यन का विवेचन प्रस्तुत किया और अपनी अर्थशास्त्री योजनाओं को अन्य तरीके से प्रस्तुत किया, 1867 में "द कैपिटल" के नाम से प्रकाशित किया, इस पुस्तक का शेष भाग मार्क्स की मृत्यु के बाद एंजेल्स ने सम्पादित किया, वर्ग संघर्ष का सिद्धांत मार्क्स के वैज्ञानिक समाज का मेरुदंड कहा जाता है| 1864 में लंदन में अंतराष्ट्रीय मजदूर संघ की स्थापना में मार्क्स ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, एक वर्ष तक शांति से चले इस आंदोलन को "बाकुनिम" के अराजकतावादी आंदोलन, फ़्रांसिसी-जर्मन युद्ध और पेरिस कम्युनो के चलते भंग हो गया, किन्तु इसकी प्रवृत्ति और चेतना अनेकों देशों में समाजवादी और श्रमिक पार्टियों के अस्तित्व के कारण कायम रही|
             
 

इसके भंग होने के बाद मार्क्स ने पुनः अपनी लेखनी को ही शब्दों के ढांचे में ढ़ालने का कार्य प्रारम्भ किया, किन्तु निरंतर अस्वस्थता के कारण उनके शोध कार्य में बाधायें आती गयीं| संसार को समाजवादी विचारों के मायने समझने वाले मार्क्स की गाथा पर 14 मार्च 1883 को पूर्ण विराम लग गया, जब वे इस दुनिया से विदा हो गए और दुनिया के श्रमजीवियों के पास अपनी जंजीरों को खोने के सिवाय कुछ और खोने को नहीं है| हमारे पास जीतने के लिए पूरी दुनिया है, दुनिया के मजदूरों एक हो! जैसे नारों से गुंजायमान कर संसार के श्रमजीवियों की लड़ाई लड़ने वाले इस योद्धा को आज भी दुनिया का श्रमजीवी वर्ग अपना प्रेरक मानता है|
                   

कार्ल मार्क्स के अनमोल विचार

  • दुनिया के मजदूरों के पास अपनी जंजीर के अलावा खोने के लिए कुछ भी नहीं है, दुनिया के मजदूरों एक हो.
  • समाज व्यक्तियों से मिलकर नहीं बनता है बल्कि उनके अंतर्संबंधों का योग होता है, इन्हीं संबंधों के भीतर ये व्यक्ति खड़े होते हैं.
  • औद्योगिक रूप से अधिक विकसित देश, कम विकसित की तुलना में, अपने स्वयं के भविष्य की छवि दिखाते हैं.
  • पूंजीवादी उत्पादन इसलिए प्रौद्योगिकी विकसित करता है, और विभिन्न प्रक्रियाओं को एक पूर्ण समाज के रूप में संयोजित करता है, केवल संपत्ति के मूल स्रातों जमीन और मजदूर की जमीन खोदकर.
  • जमींदार, सभी अन्य लोगों की तरह, वैसी फसल काटना पसंद करते हैं जिसे कभी बोया ही नहीं.
  • इतिहास खुद को दोहराता है पहली त्रासदी के रूप में, दूसरा प्रहसन के रूप में.
  • लोकतंत्र समाजवाद का मार्ग होता है .
  • कई उपयोगी चीजों का उत्पादन कई बेकार लोगों को भी उत्पन्न करता है.
  • संयोग से निपटने के लिए धर्म मानव मन की नपुंसकता है जिसे वह नहीं समझ सकता.
  • पूंजी मृत श्रम है जो पिशाच की तरह है , जो केवल श्रम चूसकर ही जिन्दा रहता है और जितना अधिक जीता है उतना श्रम चूसता है.