×

जानिए बंगाल बिभाजन आदोलन के बारे में

 जानिए बंगाल बिभाजन आदोलन के बारे में

In : Politics By storytimes About :-2 years ago
+

गाल बिभाजन           

 ब्रिटिश भारत का सबसे महत्वपूर्ण प्रांत था और यही से  अंग्रेजों को सबसे अधिक राजस्व भी यही से प्राप्त होता है | सबसे अधिक शोषण भी बगाल का हुआ है |

बगाल बिभाजन   का कारण-  | लॉर्ड कर्जन के ओपचारिक कारण –बिहार असाम बगालेश उड़ीसा थे वस्तविककारण- बगाल उस समय  भारत में राष्टवाद का केंद्र माना जाता था | और अंग्रेज इस बड़ते राष्टवाद को रोकना चाहते थे पूर्वी बंगाल में मुस्लिमों की बहुत बहुसख्य में थे जबकि पश्चिम भाग में हिन्दू बहुत बहुसख्यमें थे  | बिभाजन का आधार भाषिये भी था |  बगाल लोगो को  दो भागो में बाट दिया गया |

इन राजनीतिक विरोधों के कारण, बंगाल के दोनों भाग 1911 बिभाजन हुआ जिसने प्रान्त को धार्मिक के स्थान पर भाषाई आधार पर बाँटा जा सका, जिससे हिंदी, उड़िया और असमिया भाषी क्षेत्रों को नयी प्रशासनिक इकाइयों बनाने के लिए अलग किया गया। इस आदोलन की शुरावत 7 aug 1905 में कलकत्ता के टाउन हाल में हुआ | रविरन्दर नाथ टेगौर का song अमार सोनर बागल लोकपिर्ये गीत था | इसे समय अरविन्द गोष का वन्दे मातरम् पर्सीद हुआ |

बगाल बिभाजन के दोष् – इससे ब्रिटिश सरकार कोई विरोध प्रभाव् नी पड़ा |भारत में राष्टवादी भावना प्रबल होगी थी |

बगाल बिभाजन           

 ब्रिटिश भारत का सबसे महत्वपूर्ण प्रांत था और यही से  अंग्रेजों को सबसे अधिक राजस्व भी यही से प्राप्त होता है | सबसे अधिक शोषण भी बगाल का हुआ है |

बगाल बिभाजन   का कारण-  | लॉर्ड कर्जन के ओपचारिक कारण –बिहार असाम बगालेश उड़ीसा थे वस्तविककारण- बगाल उस समय  भारत में राष्टवाद का केंद्र माना जाता था | और अंग्रेज इस बड़ते राष्टवाद को रोकना चाहते थे बिभाजन का आधार भाषिये भी था |  बगाल लोगो को  दो भागो में बाट दिया गया |

इन राजनीतिक विरोधों के कारण, बंगाल के दोनों भाग 1911 बिभाजन हुआ जिसने प्रान्त को धार्मिक के स्थान पर भाषाई आधार पर बाँटा जा सका, जिससे हिंदी, उड़िया और असमिया भाषी क्षेत्रों को नयी प्रशासनिक इकाइयों बनाने के लिए अलग किया गया। इसके साथ ही साथ ब्रिटिश भारत की प्रशासनिक राजधानी को कलकत्ता से नई दिल्ली ले जाया गया।

बगाल बिभाजन लगो हुआइसे भग भग आदोलन भी कहा जाता है |इस आदोलन की शुरावत 7 aug 1905 में कलकत्ता के टाउन हाल में हुआ | रविरन्दर नाथ टेगौर का song अमार सोनर बागल लोकपिर्ये गीत था | इसे समय अरविन्द गोष का वन्दे मातरम् पर्सीद हुआ |

बगाल बिभाजन के दोष् – इससे ब्रिटिश सरकार कोई विरोध प्रभाव् नी पड़ा |भारत में राष्टवादी भावना प्रबल होगी थी |