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बाटा शूज की सफलता कहानी हिंदी में | Bata Shoes Success Story In Hindi

बाटा शूज की सफलता कहानी हिंदी में | Bata Shoes Success Story In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-8 months ago
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बाटा का सफर कैसे शुरू हुआ और सफल कैसे हुए | Bata Shoes Success Story In Hindi

दोस्तों हम सभी जानते है की जिसने लाइफ को खुलकर जिया उसे मुकाम भी मिले और खुशियां भी और जो सोचता रह गया वो तो बस सोचता ही रह गये हो सकता है की आप ने किसी मंजिल के लिए सफर तो शुरू किया हो लेकिन बीच रास्ते में ही आप का समाना बहुत सारी मुश्किलों से हो गया हो ऐसे में शायद आप वापस लौटने की सोच रहे होंगे है ना लेकिन मैं कहूँगा की आप बीच रास्ते से वापिस आने से पहले आप एक ऐसी सफलता की कहानी सुनिये जो आपको बतायेगी की जब मंजिल का सफर शुरू 

Bata Shoes Success Story In Hindi

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कर ही दिया है तो आपको पीछे मुड़ने की क्या जरूरत है।और ये सफलता की कहानी है। एक ऐसे ब्रांड की जो बिलकुल अपना सा लगता है। भले ही हम इसे पैर मैं पहनते है लेकीन हमारे दिलों पर राज करता हैं। तो आप तो समझ ही गये होंगे की मैं किसकी बात कर रहा हूं जी हाँ दोस्तो मैं बात कर रहा हूं दुनिया के जाने - माने फुट वेयर ब्रांड बाटा की जिसकी सफलता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं। की एक समय ऐसा भी था की जूते का मतलब ही बाटा हुआ करता था। लेकिन पैर से हमारे दिलो पर राज करने वाले बाटा का सफर इतना आसान नहीं रहा था। इसकी शुरुआत एक मोची के घर से हुई थी। और फिर मेहनत,लगन, और अच्छी सोच के दम पर टॉमस बाटा ने इसे पूरी दुनिया पर राज करने वाला फूटवियर ब्रांड बना दिया तो चलिए दोस्तों इस ब्रांड के सक्सेज कहानी को हम शुरू से विस्तार में जानते है। इस कहानी की शुरुआत होती है साल 1894 से, जब चेकोस्लोवाकिया के शहर ज़लीन में टॉमस बाटा ने, अपने भाई एंटोनिन और बहन एना के साथ मिलकर जूते बनाने की शुरुआत की और 

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इस कंपनी में उन्होंने दस एम्प्लॉईस भी रखे हालांकि टामस बाटा के लिये ये काम नया बिलकुल भी नहीं था, क्योंकि उनकी कई पीढ़ियां मोची का काम करती चली आ रही थी।लेकिन अपने इस कौशल को इतने बड़े स्तर पर आज़माने का जोखिम केवल टॉमस बाटा ने ही लिया था। लेकिन किसी भी काम की शुरुआत,अक्सर अपने साथ बहुत सारी मुश्किलें भी लेकर आती है और ऐसा ही बाटा परिवार के साथ भी हुआ,जब कंपनी स्थापना की गई तो उसके अगले ही साल,टॉमस को पैसों की कमी का सामना करना पड़ा और क़र्ज़ में डूबे टॉमस ने लेदर की बजाए कैनवास से जूते बनाने का फैसला किया था। दोस्तो लेकिन उनके इस फैसले ने एक नए विचार को जन्म दिया और कैनवास सस्ते होने की वजह से उनके बनाये गए जूते बहुत तेजी से लोकप्रिय होने लगे और उसके बाद कंपनी की वृद्धि भी बढ़ती चली गयी। और कुछ साल बाद,1904 में टॉमस अमेरिका गए और वहा से ये सीखकर आये कि वहां पर बहुत सारे जूतों को एक साथ बनाने का कौन सा तरीका अपनाया जाता है,और फिर उस टेक्निक को अपनाकर उन्होंने अपने उत्पादन को पहले से कही ज्यादा बढ़ा लिया दोस्तो फिर उन्होंने ऑफिसियल लोगों के लिए "batovky" नाम का जूता बनाया और इस जूते को इसकी सिम्पलिसिटी, स्टाइल, लाइट वेट और कीमत के लिए काफी पसंद किया गया और इसकी लोकप्रियता से बाटा कंपनी के विकास को काफी हद तक बढ़ा दिया लेकिन फिर आगे चलकर टॉमस के भाई अन्टोनी की मृत्यु हो गयी और उनकी बहन भी शादी करके चली गयी थी। दोस्तो जिससे वे अकेले पड़ गए लेकिन टॉमस अब भी बिना रुके चलते रहने का इरादा रखने वालों में से थे टॉमस ने अपने छोटे भाईयों को व्यापार में शामिल कर लिया और किसी 

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भी समस्या को अपने ऊपर हावी ही नहीं होने दिया और साल 1912 आते-आते बाटा के एम्प्लॉईस की संख्या लगभग 600 से ज्यादा हो चुकी थी।और 1914 में जब पहला वर्ल्डवॉर शुरू हुआ तो क्वालिटी और कम्फर्ट के लिए पहचानी जाने वाली इस कंपनी को सेना के लिए जूते बनाने का बहुत ही बड़ा आर्डर मिला और 1918 तक चली इस वर्ल्ड वॉर के दौरान, ऑर्डर्स को टाइम पर पूरा करने के लिए बाटा कंपनी में एम्प्लॉएंस की संख्या 10 गुना बढ़ा दी गयी और इस कंपनी ने बहुत से शहरों में अपने स्टोर्स भी खोल लिए। टॉमस बाटा के साथ अब तक सब कुछ बहुत अच्छा ही चल रहा था।लेकिन वर्ल्ड वॉर खत्म होने के बाद जबरदस्त मंदी का दौर आया,जो की बाटा शू कंपनी के लिए भी बहुत बड़ी समस्या लेकर आया लेकिन इस बार भी टॉमस बाटा ने इन प्रोब्लम्स को बहुत अच्छे तरीके से हंडल किया,और कंपनी के लिए एक रिस्की फैसला लिया उन्होंने किया कुछ यूँ की बाटा शूज की कीमत को आधी कर दी और फिर कंपनी के वर्कर्स ने भी उनका बखूबी साथ दिया और अपनी तनख्वाह में से 40% की कटौती करने को तैयार हो गये। दोस्तो एक बात तो है बिज़नेस असल में टीमवर्क होता है,और अगर आपकी टीम 

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आपके साथ है तो आपके ऊपर आने वाली कोई भी समस्या को आप पर हावी नहीं होने देगी और बहुत जल्द ही आधी रेट के जोखिम और टीम वर्क ने ऐसा कमाल कर दिखाया कि मंदी के जिस समय में बाकी सारी कम्पनीज अपना बिज़नेस बंद करने की कगार पर थी, वही बाटा शू कंपनी को सस्ते और शांतिप्रद जूते बनाने के ढेरों ऑर्डर्स मिलने लगे दोस्तो बस यहाँ से टॉमस और उनकी कंपनी बाटा ने कभी भी पीछे मुड कर नहीं देखा और धीरे - धीरे वह दुनिया की सबसे बड़ी फुटवियर ब्रांड बन गयी और मौजूदा समय में बाटा 70 से भी ज्यादा देशो में अपनी पहचान बना चूका है और पूरी दुनिया में इसके 5200 रिटेल स्टोर्स है। और अगर इस शू कंपनी के हेडक्वाटर की बात करें तो वह स्विट्ज़रलैंड में मौजूद हैं। इस सफल ब्रांड को बनाने वाले टॉमस बाटा ने 1932 में इस दुनिया को अलविदा तो कह दिया लेकिन उनकी जिदगी ने हमें बहुत कुछ सिखा दिया है।