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संत तुकाराम की जीवनी | Sant Tukaram Biography In Hindi

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महान संत तुकाराम का जीवन परिचय | Sant Tukaram , Sant Tukaram Full Information In Hindi
- नाम - संत तुकाराम
- जन्म दिनांक - 1608, देहू
- पिता का नाम - बोल्होबा मोरे
- माता का नाम - कनकाई
- पत्नी का नाम - रखुबाई , जीजाई
- संतान के नाम - विठोबा, नारायण, महादेव
- प्रमुख किताबे - तुकाराम की एक सौ कविताओं (2015) The Songs of Tukoba
महाराष्ट्र की भूमि को संतो की भूमि कहा जाता है। महाराष्ट्र कई महान संतो की जन्म भूमि भी है। इस भूमि पर संत ज्ञानेश्वर एवं संत नामदेव और संत जनाबाई की जन्म भूमि यही है। दोस्तों संत तुकाराम भी इन संतो में एक थे। संत तुकाराम ने अपने जीवन में कई अत्याचार हंसकर सहन किये ईर्ष्या, द्वेष, से दूर संत तुकाराम एक महान संत थे।
ईश्वर भक्ति को कठिन बताने वाले कुछ उच्चवर्गीय लोगो ने संत तुकाराम के अस्तित्व को बिगाड़ने के कई प्रयास किये लेकिन संत तुकाराम पर भगवान की कृपा होने के कारण लोग उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाये.
संत तुकाराम का जन्म एवं परिवार | Sant Tukaram Family
महान संत तुकाराम का जन्म सन् 1608 में पूना में इन्द्रायणी नदी के तट पर बसे देहु ग्राम में एक सूद्र परिवार में हुआ था। "शूद्रवंशी जन्मलों" संत तुकाराम हमेशा कहते थे की मैने शूद्र वेश में जन्म लिया है लेकिन ऐसा माना जाता है की संत तुकाराम का जन्म वैश्य, अर्थात् बनिये के परिवार में हुआ था। तुकाराम के पिता का नाम बोल्होबा और माता का नाम कनकाई था।
संत तुकाराम की दो शादिया हुई थी उनकी एक पत्नी का नाम रखुबाई था। रखुबाई को दमे की बीमारी थी इस कारण इनका निधन हो गया बाद में संत तुकाराम ने जिजाई से शादी कर ली इस शादी के बाद संत तुकाराम के घर में संतान पैदा इनके तीन लड़कियां और तीन लड़के हुए
तुकाराम साधु प्रवृत्ति के होने के कारण उनकी पत्नी और बच्चो को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा एक वर्ष तुकाराम के खेत में गन्ने की अच्छी फसल हुई तुकाराम ने इस फसल को बैलगाड़ी में लादकर गांव में बेचने के लिए निकल पड़े लेकिन तुकाराम को रास्ते में कई भीख मांगने वाले बच्चे और बुड्ढे मिले तुकाराम ने गन्ने की फसल उन्हें दे दी
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घर पहुंचते-पहुंचते तुकाराम के पास महज एक ही गन्ना बचा तब उनकी पत्नी जिजाई काफी दुखी हुई और सोचने लगी की ऐसे वो कैसे अपना परिवार चला पाएंगे । ये सोच कर जिजाई काफी क्रोधित हो गई और उन्होंने वो बचा हुआ गन्ना उठाकर तुकारामजी की पीठ पर मार दिया जिजाई ने जैसे ही तुकारामजी के पीठ पर गन्ना मारा उसके दो टुकड़े हो गए और तभी तुकराम जी बोले " ये लो, ईश्वर ने तुम्हारे और मेरे लिए गन्ने के दो बराबर टुकड़े कर दिये हैं"
संत तुकाराम की सहनशीलता का एक और उदारण मिलता है तुकाराम जी का एक भक्त हमेशा उनके भजन एवं कीर्तन सुनने आया करता था, एक बार संत तुकाराम की भेस उनके भक्त के खेत में घुस कर पूरा खेत चर गई.
इस बात से क्रोधित हो कर उस भक्त ने संत तुकाराम को कई गालिया दी और एक काँटों से भरी छड़ी से उनकी पिटाई भी कर दी जब शाम हुई तब वह भक्त कीर्तन में भी नहीं गया तब संत तुकाराम उस भक्त को स्नेहपूर्वक उसके घर उसे लेने चले गए और उससे क्षमा याचना करने लगे.
संत तुकाराम का चमत्कारिक जीवन | Sant Tukaram In Hindi
शूद्र तुकाराम ने ईश्वर भक्ति के साथ-साथ जब मराठी में अभंगों की रचना की तुकाराम जी के इन अभंगों को देखकर सवर्ण ब्राह्मणों ने इनकी निंदा की और कहा की तुम निम्न जाति से हो अभंगों की रचना तुम्हारा अधिकार नहीं है.
एक बार तो रामेश्वर भट्ट नाम के एक ब्राहाण ने संत तुकाराम को उनकी रचनाओं की पोटली बना कर इन्द्रायणी नदी में बहा देने के लिए कह दिया । दयालु और साधु प्रवृत्ति के तुकाराम ने अपनी सभी पोथियां नदी में बहा दी। कुछ समय बाद जब संत तुकाराम को इस बात का दुख हुआ और वो भगवान विट्ठल मंदिर के पास जा कर रोने लगे.
और तेरह दिनों से लगातार भूखे प्यासे तुकाराम मंदिर के सामने पड़े रहे। संत तुकाराम की इस दशा को देखकर स्वयं विट्ठल भगवान प्रकट होकर कहा की " तुकाराम तुम्हारी पोथियां नदी के बाहर पड़ी थी, संभालो अपनी पोथियां " और हुआ भी ऐसा ही और तुकाराम को अपनी पोथियां वही मिली दूसरी और कुछ दुष्ट, ईर्ष्यालु ब्रहमणों ने एक दुश्चरित्र महिला को संत तुकाराम को अकेला देखकर उनके पास भेजा.
लेकिन संत तुकाराम की दयालुता और हृदय की पवित्रता को देखकर वो स्त्री अपने इस कर्म पर काफी पछताने लगी। एक बार छत्रपति शिवाजी महाराज तुकाराम जी के दर्शन करने के लिए उनकी कीर्तन सभा में गए। वहां पर कुछ मुसलमान सैनिक शिवाजी को पकड़ने के लिए तैनात थे।
लेकिन संत तुकाराम ने अपनी चमत्कारिक शक्ति से वहां पर बैठे सभी लोगो को शिवाजी का रूप दे दिया। और मुसलमान सैनिको को अब शिवाजी को पहचानना मुश्किल हो गया और वो परेशान होकर वहां से चले गये। संत तुकाराम ने 1630-31 में पड़े अकाल के समय भी अपने गांव की रक्षा की थी।
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जीवन का अंतिम समय | Saint Tukaram Death
संत तुकाराम के सम्पूर्ण जीवन के बारे जानने के बाद ये बात सामने आती है की संतो के साथ दुष्ट भी यहां बसते है। लेकिन संतो की भक्ति के आगे इनकी एक भी नहीं चलती । भगवन की साधना में लीन संत सांसारिक लोगो के जीवन के कल्याण के लिए इस धरती पर जन्म लेते है
सन् 1649 संत तुकाराम भगवान विट्ठल के मंदिर में कीर्तन करते समय अदृश्य हो गये थे। आषाढ़ी एकादशी के दिन देहु से पंढरपुर में संत तुकारामजी की पालकी ले जायी जाती है। यहां सालो से श्रद्धालुओं में पंढरपुर की पैदल यात्रा करने की परंपरा चल रही है।
संत तुकाराम की जीवनी | Sant Tukaram Biography In Hindi




