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पहली एमबीए महिला संरपच छवि राजावत | Chhavi Rajawat

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आखिर क्यों लाखो के पैकेज वाली नौकरी छोडकर छवि राजावत अपने गांव आ गई, छवि राजावत की पूर्ण जीवनी | Chhavi Rajawat Biography In Hindi
- नाम - छवि राजावत
- जन्म दिनांक - 1980 (आयु 37–38)
- जन्म स्थान - गांव सोड़ा तहसील-मालपुरा जिला- टोंक (राजस्थान)
- शिक्षा - ऋषि वैली स्कूल, मेयो कॉलेज गर्ल्स स्कूल-अजमेर, लेडी श्रीराम कॉलेज-दिल्ली, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ माडर्न मैनेजमेंट-पुणे,
- राष्ट्रीयता - भारतीय
- व्यवसाय - सरपंच
- धार्मिक मान्यता - हिन्दू धर्म
दोस्तों आज हम बात करने वाले है राजस्थान की ऐसी महिला की जिसने अपने काम से पुरे देश में ख्याति प्राप्त की और राजस्थान का गौरव बढ़ाया। आज सभी पढ़े लिखे नौजवान गांव छोड़कर शहर में जा कर या तो अपना खुद का बिजनेस या कोई प्राइवेट नौकरी करने लग जाते है। लेकिन इन सब से अलग- एक नाम है छवि राजावत जिन्होंने एक बड़ी कंपनी में लाखो का पैकेज मिलने के बावजूद अपनी ये नौकरी छोड़ अपने गांव के हित में काम करने के लिए गांव की सरपंच बन गई। दोस्तों आगे हम आपको बताएंगे की आखिर छवि राजावत की कहानी क्या है-
छवि राजावत जन्म | Chhavi Rajawat In Hindi
छवि राजावत का जन्म राजस्थान के टोंक जिले के एक छोटे से गांव सोडा में हुआ था। दोस्तों छवि राजावत देश की सबसे छोटी उम्र की एवं पहली एमबीए सरपंच है। छवि राजावत साल 2013 में भारतीय महिला बैंक की एक निदेशक भी रह चुकी है।
छवि राजावत का कैरियर | Chhavi Rajawat Education
छवि राजावत ने पुणे के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ माडर्न मैनेजमेंट से एमबीए की डिग्री हासिल की छवि राजावत ने कई बड़ी कॉर्पोरेट कम्पनियों में काम किया लेकिन वो शहर की भीड़-भाड़ से भरी जिंदगी से बाहर आना चाहती थी बाद में छवि राजावत ने अपने गांव की मिट्टी से जुड़ने का फैसला किया और वो शहर छोड़कर अपने गांव सोडा आ गई और वहा से सरपंच पद का चुनाव लड़ा। इस गांव में ये पहली बार ऐसा हो रहा था की कोई लड़की सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ रही थी। 4 फ़रवरी 2011 को छवि राजावत ने इस चुनाव में अपने विपक्षी को 1200 वोटो के भारी अंतराल से हराकर इस चुनाव में जीत हासिल की। जीत के बाद छवि ने कहा की में अपने गांव की सेवा करने के उदेश्य से शहर छोड़ कर आयी हु। आज छवि राजावत अपने गांव में वाटर हार्वेस्टिंग का कार्य चला रही है और केंद्र सरकार की सभी योजनाओ का विकास अपने गांव में करवा रही है।
छवि राजावत का सरपंच बनने का कारण | Story Chhavi Rajawat
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छवि राजावत का सरपंच बनने का प्रमुख उदेश्य व अपने गांव का विकास करना चाहती थी छवि राजावत बताती है की उनके दादाजी ब्रिगेडियर रघुबीर सिंह सोडा गांव से लगतार तीन बार सरपंच रहे है। उनके दादाजी की इच्छा थी की में उनके पद को आगे ले कर जाऊ और अपने गांव के भले के लिए काम करू। छवि ने बताया की जब शहर छोड़कर वो अपने गांव आयी थी तब उन्होंने देखा की गांव के हालात काफी खराब थे ना तो गांव में कोई पानी की व्यवस्था, ना लाइट और गांव में लोग कम उम्र में ही लड़कियों की शादी और कोई शिक्षा की भी व्यवस्था नहीं थी। और इन सब हालातो को देख कर छवि ने गांव से सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ा और वो इस चुनाव को जीत गई|
छवि राजावत ने किये गांव में ये बदलाव | Chhavi Rajawat Village In Hindi
गांव के हालात देख छवि ने प्रण लिया की अब वो अपने गांव को विकास की और ले जाएगी और उन्होंने सर्वप्रथम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को अपने पुरे गांव में लागु कर दिया | सोडा गांव की पंचायत में कुल 900 घर है जिसमे से 800 घरो में शौचालय बनाये जा चुके है । दोस्तों आपको इस बात को जानकर हैरानी होगी की इस गांव के लिए एक फेमस सॉफ्ट ड्रिंक कंपनी ने गांव की सफाई के लिए 20 लाख रूपये की मदद की थी| छवि राजावत के सरपंच बनने के बाद गांव में समय पर पानी की व्यवस्था हो गई और गांव से शहर जाने के लिए अच्छी सड़को का निर्माण हो गया । गांव में बैंक भी खुलवा दिया ताकि किसानो को बार- बार पैसे जमा करने के लिए शहर ना जाना पड़े दोस्तों छवि राजावत देश ही नहीं विदेशो में भी अपने कार्यो से विख्यात को गई ।
छवि राजावत की उपलब्धियां | Chhavi Rajavat Achievements
- साल 2011 में छवि राजावत ने सयुक्त राष्ट्र संघ में आयोजित 11 वे "Info Poverty" विश्व सम्मेलन में दुनिया के बड़े मंत्रियो को संबोधित किया।
- साल 2011 में भारत के पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम ने छवि राजावत को सम्मानित किया।
- छवि राजावत को युवा नेत्री का ख़िताब।
पहली एमबीए महिला संरपच छवि राजावत | Chhavi Rajawat




