ईसाइयो का धार्मिक त्यौहार | Christmas Festival for Christians in Hindi

ईसाइयो का धार्मिक त्यौहार | Christmas Festival for Christians in Hindi

In : Viral Stories By storytimes About :-1 year ago
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क्रिसमस क्या है और इसकी शुरुआत कैसे हुयी?

क्रिसमस ऐसा त्यौहार हैं जो पूरी दुनिया में धूम-धाम से मनाया जाता है.इस दिन लोग क्रिसमस ट्री को लाइट्स, रिबन, गिफ़्ट, टॉफ़ी आदि से सजाते हैं. क्रिसमस(Christmas) के दिन लोग एक-दूसरे के साथ पार्टी करते हैं, घूमते हैं और चर्च में प्रार्थना करते हैं,और इसको ईसामसीह के जन्मदिन को याद करने के लिए मनाया जाता है। क्योंकि लोग ईसामसीह को ईसाई ईस्वर का पुत्र मानते था.

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क्रिसमस नाम मास ऑफ क्राइस्ट(जीसस) से लिया गया है। एक सामूहिक सेवा वह जगह है जहां ईसाईलोग ईसामसीह को याद करते है,और उनका मानना है कि ईसामसीह यहां पर मरने के बाद वापस जीवित हो गए।

क्रिसमस के दिन लोग आपस में बिना किसी मतभेद के और प्रेम भाव से आपस में मिलते हैं  और इसे बहुत अच्छे से सेलिब्रेट करते है।

क्रिसमस कि तारीख 25 ही क्यों और कैसे पड़ी ?

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 25 दिसंबर को क्रिसमस मनाए जाने कि सभी लोगो के पास अलग-अलग तर्क है.यीशु का असली जन्मदिन कोई नहीं जनता। इसकी बाईबिल में भी कोई सही तारीख नहीं बताई गयी है। आओ हम जानते है कि 25 दिसंबर ही क्यों पड़ी इनके जन्मदिन को मानाने को। शुरुआत में तो ईसाई लोगो के पास इसका कोई स्थायी तर्क नहीं था कि इसे कब मनाया जाना चाहिए।

25  तारीख को मनाया जाने वाले क्रिसमस कि पहली रिकॉर्ड कि गयी तारीख 336 में रोमन सम्राट कॉन्सटेंटाइन ( यह पहले ईसाई रोमन सम्राट थे ) के समय ली गयी थी। इसी दिन रोमन सम्राट Justinian ने औपचारिक रूप से 25 दिसंबर को जीज़स का जन्मदिन सेलिब्रेट करने के सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की थ। यीशु एक यहूदी था, इसलिए यह एक और कारण हो सकता है जिसने प्रारंभिक चर्च को क्रिसमस की तारीख के लिए 25 दिसंबर को चुनने में मदद की !

क्रिसमस कैसे मनाया जाता है और और इस दिन को लोग कैसे  सेलिब्रेट करते है और उनके लिए इसका महत्व क्या  है क्रिसमस डे(Christmas Day) ईशू को याद करने और उनकी पूजा करने का दिन होता है. क्रिसमस के दिन लोग ईसामसीह की प्रशंसा में करोल गाते है . वे प्यार और भाई चारे का सन्देश देने एक दूसरे के घर जाते है विदेशो में क्रिसमस से पहले ही स्कूल और कॉलेज की छुट्टिया पड़ जाती है और क्रिसमस के दिन बाजारों में लग ही रौनक देखने को मिलती है.  बाजरो को तरह तरह से सजाया जाता हैं और सड़के और घर रंग  बिरंगी लड़ियों से और क्रिसमस ट्री से जगमग रहते है। 24 दिसंबर को लोग ईस्टर ईव मनाते हैं और 25  दिसंबर को लोग पार्टी और बहार घूमने जाते है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला क्रिसमस 25 से शुरू होकर 5 जनवरी तक मनाया जाता है। यूरोप में 12 दिन तक मनाये जाने वाले इस त्यौहार को Twelfth नाईट के नाम से भी जाना जाता है। सभी इस दिन एक दूसरे को मेर्री क्रिसमस  बोल कर इस दिन को याद करते है। बच्चो के लिए इस दिन लोग सैंटा क्लॉज़ बनते है।

सैंटा क्लॉज़ क्या है और इसका  इतिहास क्या है ?

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क्रिसमस यानी ईसा मसीह के जन्मदिन और सैंटा का कोई कनेक्‍शन नहीं है।  सेंटा क्लोज की उत्पति का किसी को कुछ भी पता नहीं है.लोगो का मानना है कि संत निकोलस ही सेंटा का असली रूप है। सेंटा क्लोज का जन्म Quora  के अनुसार आखिरी बाइबल लिखे जाने के 100  साल बाद हुआ था। बाइबल में भी इसका कोई जिक्र नहीं है। सैंटा (संत निकोलस) का जन्म 270AD में हुआ था ।

सेंटा क्लोज नाम संत निकोलस से निकला है और डच भाषा में इसे  कहा जाता है जब डच अमेरिका पहुंचे तब वहा के लोगो ने Sinter Klass को सेंटा क्लोज नाम से पुकारना शुरू कर दिया इसी के साथ संत निकोलस  सेंटा क्लोज बन गए। संत निकोलस एक ग्रीक बिशप थे। वे लोगो के बिच अपनी दयालुता और उनसे किसी का दुःख देखा नहीं जाता था इसलिए वो रात को छुप छुप कर जरुरत  मंद लोगो और बच्चों को गिफ्ट देते थे जिससे उनके मन को शांति महसूस होती थी। उनसे जुडी कही कहानिया सुनने को मिलती है। इसी लिए लोग बोलते है कि सेंटा आयेंगे और गिफ्ट लाएंगे जिससे बच्चे खुश होते थे। इसी के साथ दुनिया में क्रिसमस के दिन मोजो में गिफ्ट रखने और बच्चो के सामने सीक्रेट सेंटा बनने कि शुरुआत हुयी।

क्रिसमस ट्री का इतिहास क्या है ?

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क्रिसमस ट्री कि शुरुआत उत्तरी यूरोप हजारो सालो पहले हुई थी. उस समय 'Fir' नाम के पेड़ को सजाकर इस त्यौहार को मनाया जाता है। क्रिसमस ट्री को सजाने का उल्लेख 16वीं सदी में जर्मनी में भी मिलता है। इसके आलावा बहुत लोग चेरी के पेड़ कि टहनियों को भी इस दिन सजाते है। और जो लोग इन पेड़ो को खरीद नहीं पाते वे लोग लकड़ी को  पिरामिड सेप में बनाकर और उसको सजाकर इस दिन को मानते है इसी के साथ क्रिसमस ट्री को सजाने कि परम्परा चल पड़ी। क्रिसमस का पेड़ सदाबाहर और इसकी  पत्तिया कभी मुरछाती नहीं हैं . इसी पेड़ को काटने के बाद लोग इसे सजाते है।

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