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अपराजित पहलवान दारा सिंह की जीवनी | Dara Singh Biography In Hindi

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500 मुकाबलों में लगातार विजय रहे दारा सिंह का जीवन परिचय | Dara Singh Wrestler In Hindi
- पूरा नाम - दारा सिंह रन्धावा
- जन्म दिनांक - 19 नवंबर 1928
- जन्म स्थान - अमृतसर
- पिता का नाम - सूरज सिंह रन्धावा
- माता का नाम - श्रीमती बलवंत कौर
- जीवनसाथी का नाम - सुरजीत कौर रन्धावा (1961-2012) बचनों कौर (1942-1952)
- संतान के नाम - विन्दु दारा सिंह - प्रधुमन दारा सिंह -अमरिक सिंह रंधवा
- मृत्यु दिनांक - 12 जुलाई 2012, मुंबई
दोस्तों आज कोई व्यक्ति ऐसा नहीं है जो बॉलीवुड और खेल जगत के बारे में नहीं जानता हो.आज हम बात करने वाले है खेल और बॉलीवुड से जुड़े एक महान शख्सियत धारा सिंह के बारे में खेल जगत में दमदार प्रदर्शन और बॉलीवुड में अपनी एक अलग छवि बनाई इस महान शख्सियत के बारे में आज हर खेल और बॉलीवुड से जुड़े लोग जानते है ये वो इंसान है जिन्होंने अपनी प्रतिभा से देश का नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा है।
दारा सिंह का बचपन और परिवार | Dara Singh History in Hindi
धारा सिंह का जन्म 19 नवम्बर 1928 अमृतसर के एक गांव धरमुचक में हुआ धारा सिंह का पूरा नाम दारा सिंह रन्धावा था दारा सिंह के पिता का नाम सूरज सिंह रन्धावा और माता का नाम श्रीमती बलवंत कोर है। दारा सिंह को बचपन से ही कुश्ती से काफी लगाव था । दारा सिंह की छोटी उम्र में उनकी मर्जी के बिना उनसे उम्र में बड़ी लड़की से शादी कर दी गई । इनसे इनको एक पुत्र हुआ जिसका नाम प्रधुमन रन्धावा था।
उस समय दारा सिंह कुश्ती में काफी उपलब्धियां हासिल कर ली थी. उनका पहली शादी से ज्यादा लगाव नहीं रहा बाद में दारा सिंह ने दूसरी शादी कर ली उनकी दूसरी पत्नी का नाम सुरजीत कौर था। सुरजीत कौर शिक्षित लड़की थी। दूसरी शादी से दारा सिंह को 3 बेटियां और 2 बेटे हुए ।
अपराजित पहलवान दारा सिंह | Dara Singh Ki Kusthi
दारा सिंह ने अपनी कुश्ती करियर की शुरुआत अपने छोटे भाई सरदार सिंह साथ की दोनों भाई कुश्ती का अभ्यास करते थे। कई सालो गांव में होने वाले दंगल में भाग लेने के बाद शहर में आयोजित होने वाली कुश्तियों में भाग लेना शुरू कर दिया और उनमे जीत भी हासिल कर अपने गांव का नाम चारो तरफ रोशन कर दिया दारा सिंह अपने ज़माने के फ्री स्टाइल पहलवान रहे है।
साल 1960 में भारत के कोने-कोने में धारा सिंह की फ्री-स्टाइल कुश्ती का बोलबाला था। दारा सिंह ने साल 1959 में पूर्व वर्ल्ड जार्ज गारडीयांका को मात दे कर कामनवेल्थ गेम्स की "विश्व चैम्पियनशिप" अपने नाम की थी।
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दारा सिंह ने अपने कुश्ती करियर में 55 साल की उम्र तक 500 मुकाबलों में कभी हर का सामना नहीं किया दारा सिंह के अपने 36 साल के कुश्ती करियर देश में एक भी पहलवान ऐसा नहीं था जिसने दारा सिंह को धूल चटाई हो । साल 1968 अमेरिका विश्व चैम्पियन लो थेस को हरा कर विश्व चैम्पियन बन गए थे।
साल 1947 में दारा सिंह सिंगापुर शहर गए वहां दारा सिंह ने फ्री-स्टाइल कुश्ती में मलेशियाए चैम्पियन को मात दी और कुआलालम्पुर मलेशिया चैम्पियनशिप जीती थी. इस जीत से उनका विजय रथ नहीं रुका और कई देशो में जीत हासिल की पेशेवर पहलवान दारा सिंह ने विदेशो में धाक जमाकर 1952 में भारत आ गए।
साल 1954 में दारा सिंह भारतीय कुश्ती के चैम्पियन बने बाद में उनका मैच कुश्ती में दानव कहे जाने वाले किंग-कोंग से हुआ. उस समय दारा सिंह का वजन काफी बढ़ा हुआ था मैच से पहले दारा सिंह का वजन 130 किलो और किंग-कोंग 200 किलो था.ये मुकाबला काफी रोमांचित हुआ क्योकि सभी दर्शक किंग-कोंग के भारी शरीर को देख कर सारे पैसे उसी पर लगा रहे थे।
सब दर्शको के दिमाग में एक ही बात थी की इस बार तो दारा सिंह को हार का सामना करना पड़ेगा लेकिन जैसे मुकाबला शुरू हुआ दारा सिंह ने अपने दांव में कस लिया और किंग-कोंग को मारते मारते रिंग से बाहर कर दिया इस तरह दारा सिंह फिर से विजय रहे। दारा सिंह ने अपने कुश्ती करियर का आखिरी मैच को जीत कर उस समय के भारत के राष्ट्रपति जैल सिंह से ख़िताब हासिल कर अपना जीत का रिकॉर्ड बरकार रखा।
दारा सिंह का फिल्मों की तरफ रुख
साल 1952 में दारा सिंह राज्य सभा का सदस्य नियुक्त किया गया। दोस्तों दारा सिंह ऐसे पहले इंसान थे जो राज्यसभा में खेल जगत से थे। बाद में दारा सिंह ने फिल्मों की तरफ रुख किया और फिल्म निर्माता, कलाकार ,का के अभिनय में अपना नाम रोशन किया।
दारा सिंह ने अपनी पहली फिल्म 1952 में संगदिल फिल्म में दिलीप कुमार और मधुबाला के साथ की साल 1954 में आयी फिल्म में झलक में अपना किरदार निभाया और 1962 में फिल्म ‘किंग- कोंग’ में ‘किंग- कोंग’ का किरदार में निभाया.
दारा सिंह की प्रमुख फिल्म | Dara Singh Moves List
- 1963
- फौलाद
- 1964
- वीर भीमसेन
- हर्कुलस
- आंधी और तूफान
- 1965
- हम सब उस्ताद है
- रुस्तम-ए-हिंद
- राका
- टार्ज़न एंड किंग कोंग
- सिकंदर-ए-आज़म
- 1966
- जवान मर्द
- डाकु मंगल सिंह
- 1967
- दो दुश्मन
- 1968
- जुंग और अमन
- 1969
- दा किलर्स
- 1970
- मेरा नाम जोकर
- 1971
- आनंद
- 1972
- ललकार
- हरी दर्शन
- 1973
- मेरा देश मेरा दुश्मन
- 1974
- किसान और भगवान
- 1975
- धर्म कर्म
- वारंट
- 1977
- वीरू उस्ताद
- राम भरोसे
- 1979
- नालायक
- चम्बल की रानी
- 1981
- खेल मुक़द्दर का
- 1982
- रुस्तम
- 1984
- आन और शान
- 1985
- मर्द
- 1986
- सजना साथ निभाना
- कर्मा
- 1988
- श्रवण कुमार
- मर्दानगी
- 1989
- शेह्जादे
- एलान-ए-जंग
- 1990
- नाका बंदी
- 1991
- धर्म संकट
- 1993
- अनमोल
- बेचैन
- 1994
- करण
- 1995
- राम शस्त्र
- 1997
- लव खुश
- 1999
- दिल्लगी
- जुल्मी
- 2001
- फर्ज
- 2004
- Mittar Pyare Nu Haal Mureedan Da Kehna
- 2007
- जब वि मीट
- 2012
- अता पता लापता
- 2013
- 6 दिसंबर ए लव स्टोरी
दारा सिंह का अंतिम समय | Dara Singh Diet
7 जुलाई 2012 में दिल का दौरा पड़ने के बाद दारा सिंह को कोकिलाबेन धीरुभाई अम्बानी अस्पताल में भर्ती कराया गया 5 दिन तक उनका इलाज चला लेकिन कोई भी दवा उन पर असर नहीं कर रही थी. बाद में उन्हें अपने निवास स्थान पर लाया गया वहां पर दारा सिंह ने सुबह 07:30 अंतिम सांस ली और दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गए ।
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