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स्वतंत्रता सेनानी दुर्गाबाई देशमुख का जीवन परिचय | Durgabai Deshmukh Biography In Hindi

स्वतंत्रता सेनानी दुर्गाबाई देशमुख का जीवन परिचय | Durgabai Deshmukh Biography In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-10 months ago
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10 साल की दुर्गाबाई ने गाँधी जी के सामने जलाई थी विदेशी कपड़ो की होली | Durgabai Deshmukh Life Story In Hindi, Durgabai Deshmukh In Hindi, Durgabai Deshmukh Full Information In HIndi

  • नाम - दुर्गाबाई देशमुख
  • जन्म दिनांक - 15 जुलाई 1909 
  • जन्म स्थान -  काकीनाडा, आंध्रा प्रदेश
  • पिता-पिता का नाम - कृष्णा  वेनम्मा , BVN रामा राव
  • जीवनसाथी का नाम - सी डी देशमुख (जीवनसफर । 1953-1981)
  • शिक्षा -आंध्र विश्वविद्यालय, मद्रास विश्वविद्यालय
  • प्रमुख सम्मान -पद्म विभूषण
  • मृत्यु  दिनांक - 9 मई 1981

दोस्तों आज हम बात करेंगे स्वतंत्रता सेनानी दुर्गाबाई देशमुख के जीवन के बारे में दुर्गाबाई देशमुख का जन्म 1909 ई. काकीनाडा आंध्रप्रदेश में हुआ था। 10 वर्ष की छोटी सी आयु में दुर्गाबाई ने अपने गांव काकिनाद एक हिंदी विधालय की नींव रखी। दुर्गाबाई ने अपनी माँ सहित गांव में 500 से अधिक महिलाओं को हिंदी पढ़ाने के साथ खुद को सेविका के रूप में तैयार किया । उस समय गांव में फ्रॉग पहने इस छोटी सी मास्टरनी को देख जमनालाल बजाज आश्चर्यचकित हो गए थे। उस समय गाँधी जी ने कस्तूरबा गाँधी और सी.ऍफ़.एंड्रूज के साथ दुर्गाबाई के गांव जा कर उनकी पाठशाला का निरीक्षण किया था तब दुर्गाबाई महज 12 साल की थी।

Durgabai Deshmukh Biography

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यही वो समय था जब दुर्गाबाई पहली बार गाँधी जी के सम्पर्क में आयी थी। दुर्गाबाई ने गाँधी जी के सामने विदेशी कपड़ो की होली जलाई थी। और अपने कीमती वस्तुएं दान कर दी । और खुद को एक सेविका के रूप में समर्पित कर दिया। गाँधी जी इस छोटी उम्र में इस दुर्गाबाई का साहस देख कर दंग रह गए। कांग्रेस के अधिवेशन में दुर्गाबाई ने  जवाहरलाल नेहरू को बिना टिकट के प्रदर्शनी  में जाने से रोक दिया था। नेहरू इस छोटी सी लड़की की कर्तव्यनिष्ठा एव काम के प्रति जागरूकता से काफी प्रभावित हुए और बाद में टिकट ले कर ही अंदर प्रवेश किया । 

दुर्गाबाई जब 20 साल की थी तब उनके एक के बाद एक दौरे और भाषणों की लहर चारो तरफ फेल गई । दुर्गाबाई के अद्भुत संघठन एव भाषण देने के तरीके को देख सभी लोग चकित रह जाते थे। दुर्गाबाई के इस साहस के कारण लोग उन्हें “जॉन ऑफ़ ओर्क” नाम से भी पुकारने लगे थे। अपने इस साहस के कारण दुर्गाबाई पुरे भारतवर्ष में विख्यात हो गई थी। 

Durgabai Deshmukh Biography

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गाँधी जी के "नमक सत्याग्रह" के समय  दुर्गाबाई साल 1930 से 1933 के बिच 3 बार जेल की सजा हो गई थी। जेल में उन्होंने असहनीय यातनाएं जैसे कड़ी धुप में घंटो तक खड़े रहना , भूखा रहना, और कई  अन्य कार्य किये लेकिन दुर्गाबाई ने अपनी रिहाई के लिए कभी क्षमा नहीं मांगी। जेल से रिहाई के बाद दुर्गाबाई ने अपनी आगे की पड़े की। उन्होंने मेट्रिक से M.A की पढ़ाई की फिर दुर्गाबाई ने L.L.B  की और वकील बन गई इस दौरान वो कई सगठनों के सम्पर्क में रही ये निम्न है आंध्र महिला सभा ,अखिल भारतीय महिला परिषद, नारी रक्षा समिति ,विश्वविद्यालय महिला संघ ,नारी निकेतन । 


दुर्गाबाई देशमख का विवाह साल 1953 में भारत के भूतपूर्व वित् मंत्री चिंतामणि देशमुख के साथ हुआ था। जब दुर्गाबाई का विवाह हुआ था उस समय वो "योजना आयोग" की सदस्य थी। दुर्गाबाई "नारी शिक्षा की राष्ट्रीय कमेटी" की  पहली अध्यक्ष होने के कारण दुर्गाबाई नारी के के लिए विशेष प्रावधानों , उनकी याजनाओं की व्यवस्था का करना देश के पिछड़े वर्गों महिलाओ -बच्चो को प्राथमिकता का हक़ दिलाने में अपना पूरा जीवन लगा दिया था।

Durgabai Deshmukh Biography

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दुर्गाबाई को आंध्रप्रदेश के गांवो में लोगो के पास जा कर शिक्षा का प्रसार करने के करना उन्हें "नेहरु साक्षरता पुरुस्कार" से सम्मानित किया गया था। लंबी बीमारी के चलते 71 साल की उम्र में 9 मई 1981 को हैदराबाद में उनका निधन हो गया। देश के लिए दुर्गाबाई देशमुख देश के लिए एक क्षति मानी गई। जो देश अपने दृढ़ व्यक्तित्व के कारण देश की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बन गई। दुर्गाबाई का सविधान के निर्माण में भी बड़ा योगदान माना जाता है। देश की महिलाओं को समानाधिकार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।