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क्या जानते है फ्लिपकार्ट का पहला आर्डर क्या था और कैसे पूरा हुआ? |First Order of Flipkart In Hindi

By N.j / About :-2 years ago

ऑनलाइन शॉपिंग जो समय के साथ लोगो की एक जरुरत बन गई है। लोगो की ऑनलाइन शॉपिंग की बढ़ती लोकप्रियता के चलते आज कई ऑनलाइन वेबसाइट्स आ चुकी है। जहां से हर रोज करोड़ो रुपयो की शॉपिंग की जाती है। लेकिन दोस्तो हमारी आज की कहानी 12 साल पहले यानी साल 2007 की है। अक्टूबर महीना चल रहा था। तब देश में ऑनलाइन शॉपिंग के बारे में कम ही जानते थे उस समय हैदराबाद महबूबनगर के रहने वाले वीवीके चंद्रा को एक किताब की तलाश थी। दोस्तो वीवीके चंद्रा को किताब की तलाश थी और आज मार्केट में सबसे बड़ी ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट बन चुकी फ्लिपकार्ट को अपने पहले ग्राहक की. अब फ्लिपकार्ट व वीवीके का क्या रिश्ता है तो चलिए इस कहानी को भी जान लेते है।

काफी प्रयास के बाद हैदराबाद में नही मिली किताब

हैदराबाद के महबूब नगर के रहने वाले चंद्रा बाबू को पढ़ने-लिखने का काफी शौक था। अपने इसी शौक के चलते वो फ्रीलांस वेब कंस्लटेंट के रुप में कार्य करते थे। एक दिन वीवीके चंद्रा को जॉन वुड की किताब लीविंग माइक्रोसाफट टू चेंज " उसे पढ़ने की इच्छा हुई। अपनी इसी इच्छा को पुरा करने के लिए वो इस किताब को खरीदने के लिए हैदराबाद के मार्केट में चले गए लेकिन काफी कोशिश के बावजूद उन्हें वो किताब नही मिली। वीवीके ब्लॉग लिखते थे। वीवीके ने इस पुस्तक को पाने की ऑनलाइन लोगो के सामने इच्छा जाहिर की तब एक यूजर ने उन्हें फ्लिपकार्ट का लिंक उनके कॉमेंट्स सेक्शन में शेयर किया।

ऐसे हुई शुरुआत

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यूजर के द्वारा भेजे गए लिंक पर वीवीके ने क्लिक किया। तब उन्होंने पाया की वो किताब उस वेबसाइट पर बिक्री के लिए उपलब्ध थी। वीवीके को इस बात का पहली बार ज्ञान हुआ था की यह वेबसाइट किताबे भी बेचती है साथ ही देश के सभी शहरों में होम डिलीवरी भी उपलब्ध करवाती है। ऑनलाइन माध्यम से खरीदारी के बारे में पहले कभी नही सुना था। वीवीके को पुरे मार्केट में घुमने के बाद भी किताब मिल नही रही थी। तब उन्होंने इस लिंक के माध्यम से किताब को लेने के बारे में विचार किया। वेबसाइट पर इस पुस्तक की कीमत थी 500 रुपये.

मन में थे ऑनलाइन शॉपिंग को लेकर सवाल

वीवीके चंद्रा इस किताब को किसी भी तरह खरीदना चाहते थे। लेकिन पहले कभी ऑनलाइन शॉपिंग का अनुभव व ज्ञान न होने के कारण ऑनलाइन शॉपिंग के प्रति उनके मन में सवाल खड़े हो रहे थे। लेकिन सभी सवालो की उलझन में न फसते हुए उन्होंने 500 रुपए पेय कर किताब का ऑर्डर कर दिया। ऑर्डर के बाद उन्हें इसे पाने के लिए काफी इंतजार करना पड़ा। क्योंकि असल बात यह थी की उस समय  वो किताब फिल्पकार्ट के पास मौजूद नही थी। लेकिन दोस्तो फ्लिपकार्ट के फाउंडर सचिन बंसल व बिन्नी बंसल अपनी साइट का पहला आर्डर व ग्राहक को निराश नही करना चाहते थे।

बेंगलुरु के बुकस्टोर से उपलब्ध हुई किताब

सचिन बंसल व बिन्नी बंसल इस आर्डर को किसी तरह पुरा करना चाहते थे। तब कई जगह तलाश करने के बाद उन्हें वो किताब मिली। तब फ्लिपकार्ट की और से वीवीके चंद्रा को एक मेल भी आया उसमे लिखा हुआ था की "आपके ऑर्डर को पुरा करने में थोड़ा समय लग रहा है इसके लिए कंपनी आप से माफी चाहती है। इस पुस्तक की तलाश में सचिन बंसल व बिन्नी बंसल बेंगलुरु गए तब वहां भंयकर बारिश हो रही थी। जहां तक नजर जाए बस पानी ही पानी हो रखा था किसी तरह दुकान पर पहुचने के बाद बिन्नी बंसल को होश आया की वो पर्स तो भूल आए हैं। इस स्थिति में उन्होंने अपने एक दोस्त की मदद ली और उससे पैसे उधार ले कर उस किताब को खरीदा।

और इस तरह वीवीके चंद्रा बन गए फ्लिपकार्ट के पहले ग्राहक

ऑर्डर से लेकर किताब की तलाश के इस पुरे सफर के बाद आखिरकार 31 अक्टूबर 2007 को बिन्नी बंसल ने वीवीके चंद्रा के दिए गए पते पर इस किताब को डिलीवरी करवा दिया। वीवीके को यह किताब पुरे दो दिनो के इंतजार के बाद मिली। बस इस किताब के डिलीवर होते ही वीवीके चंद्रा का नाम फ्लिपकार्ट के प्रथम ग्राहक के रुप में जुड़ गया। आज पुरी दुनिया फ्लिपकार्ट की ऊंचाइयों से अवगत है।

क्या जानते है फ्लिपकार्ट का पहला आर्डर क्या था और कैसे पूरा हुआ? |First Order of Flipkart In Hindi