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क्षत्राणी हाड़ी रानी की वीर गाथा | Hadi Rani In Hindi

क्षत्राणी हाड़ी रानी की वीर गाथा | Hadi Rani In Hindi

In : Meri kalam se By storytimes About :-9 months ago
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मातृभूमि की रक्षा के लिए हाड़ी रानी ने कर दिया था खुद का सिर कलम | Hadi Rani History In Hindi

दोस्तों जब भी हम मारवाड़ के इतिहास बारे में पढ़ते है तब हमें देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम के लिए किये गए बलिदानों की अनेक सच्ची कहानियों का उल्लेख मिल जाता है। लेकिन फिर भी दोस्तों राजस्थान की वीरांगना की एक अलग ही कहानी है। दोस्तों आज हम बात कर रहे है मेवाड़ की हाड़ी रानी - Hadi Rani In Hindi अपनी मातृभूमि के लिए और अपने राजा की रण में जीत के लिए जो बलिदान दिया. ये बलिदान आज भी याद किया जाता है तो चलिए दोस्तों मेवाड़ की हाड़ी रानी के इस बलिदान की पूरी कहानी जानते है.

हाड़ी रानी का जीवन | Hadi Rani Story

हाड़ी रानी का जन्म बूंदी हाड़ा शासक के परिवार में हुआ था। हाड़ी रानी की शादी रतन सिंह चूड़ावत जो उदयपुर मेवाड़ के सलुंबर ठिकाने के सरदार थे । 

महारानी हाड़ी रानी- Hadi Rani के शादी को अभी कुछ दिन ही  हुए थे और अभी तो हाड़ी रानी के हाथो की मेहँदी का रंग भी नहीं छूटा था की राज्य के किसी क्षेत्र में युद्ध शुरू हो गया  और उनके पति  रतन सिंह चूड़ावत को युद्ध में जाने का फरमान आ गया.

Hadi Rani In Hindi

Source mapio.net

इस फरमान में मुग़ल सेना के शासक औरंगजेब की सेना को रोकने का आदेश था। इस फरमान को पढ़ते ही सरदार चूड़ावत ने अपने सैनिक दल को औरंगजेब की सेना पर कूच  करने के लिए आदेश दे दिया। लेकिन उनका मन अपनी हाड़ी रानी को छोड़कर इस युद्ध में जाने का बिलकुल नहीं कर रहा था । और वो उन्हें छोड़कर नहीं जाना चाहते थे।

एक राजपूत योद्धा जब भी युद्ध भूमि में उतरता है वह अपने सभी मोह पीछे छोड़ देता है युद्ध में जरूरत पड़ने पर सिर  काटने से भी पीछे नहीं हटता। दूसरी और हाड़ी सरदार को उनकी पत्नी का मोह इस युद्ध में जाने से रोक रहा था। जो एक राजपूत योद्धा  के लिए शर्म की बात थी।

लेकिन दूसरी और औरंगजेब सेना लगातार आगे बढ़ रही थी। सरदार काफी समय के बाद अपने भारी मन के साथ हाड़ी रानी -Hadi Rani से विदा लेने उनके महल में गए। रतन सिंह का ये संदेश सुन हाड़ी रानी को काफी बुरा लगा लेकिन हाड़ी रानी ने पति रतन सिंह को युद्ध से पीछे ना हटने  के लिए प्रेरित किया.

लेकिन हाड़ी के सरदार को एक चिंता मन ही मन सताये जा रही थी की यदि मुझे इस युद्ध के दौरान कुछ हो गया तो उनकी रानी का क्या होगा और वो इस बात को लेकर काफी चिंतित हो गए थे। लेकिन एक राजपूत की बेटी होने के नाते हाड़ी रानी ने अपने पति सरदार रतन सिंह को हताश ना होकर एक वीर योद्धा की तरह युद्ध में लड़ने के लिए प्रेरित किया और कहा की आप मेरी चिंता ना करे और अपने राजा की युद्ध में विजय की कामना करते हुए उन्हें युद्ध के लिए विदा किया.

एक राजा होने के नाते सरदार रतन सिंह चूंडावत अपने फर्ज और प्रजा की रक्षा करने के लिए इस युद्ध के लिए युद्धभूमि में निकल तो पड़े लेकिन फिर भी पत्नी का प्रेम उनका पीछा नहीं छोड़ रहा था। वो मन ही मन सोच रहे थे की वो अपनी रानी को कोई भी सुख नहीं दे पाए कहीं इस वजह से रानी मुझे भुला ना दे.

इसलिए राजा रतन सिंह ने अपनी रानी को एक पत्र भेजा और उसमे इस तरह अपनी भावना लिखी - प्रिय रानी ,मुझे भूलना मत , में युद्ध के बाद जरूर लौटकर आऊँगा और पत्र की अंतिम लाइन में राजा ने रानी को उनकी अनमोल चीज देने का भी प्रस्ताव रखा जिसे युद्ध के दौरान देख कर उनका मन हल्का हो सके और रानी की याद को कम कर सके.

मातृभूमि की रक्षा के लिए दे दी खुद की कुर्बानी | Hadi Rani Balidan

हाड़ी रानी- Hadi Rani उनका पत्र पढ़ कर काफी निराश हो गई और सोच में पड़ गई की यदि इस तरह उनके पति पत्नी के मोह  में पड़े रहेंगे तो वो इस युद्ध में दुश्मनो से कैसे लड़ेंगे । फिर क्या था दोस्तों हाड़ी रानी ने अपनी मातृभूमि के लिए कुर्बानी देने का फैसला कर लिया।

हाड़ी रानी ने सच्ची वीरांगना और राष्ट्र प्रेम के चलते रानी ने अपने राजा रतन सिंह का पत्नी मोह मिटाने के लिए और राजा को इस युद्ध में जीत दिलाने के हाड़ी रानी ने अपना सिर काटकर थाली में सजाकर राजा के पास भेज दिया।

Hadi Rani In Hindi

Source www.firkee.in

जब संदेशवाहक को राजा रतन सिंह ने हाड़ी रानी की  निशानी (उनकी अनमोल चीज) के बारे में पूछा तो संदेशवाहक ने रानी हाड़ी-Hadi Rani का कटा हुआ सिर राजा के सामने पेश किया । रानी का कटा हुआ सिर देखकर राजा घबरा गया और उनका सिर देखता ही रह गया साथ ही अब उनका पत्नी के प्रति मोह भी खत्म हो गया क्योंकि अब राजा की सबसे प्रिय चीज उनके पास नहीं रही थी।

ये नजारा खत्म होते ही राजा रतन सिंह  शत्रु सेना पर कहर बन कर टूट पड़ा और औरंगजेब की सेना को आगे बढ़ने से रोक दिया।  और इस युद्ध में विजयी हुए दोस्तों इस युद्ध में जीत का श्रेय राजा रतन सिंह को नहीं बल्कि वीरागंना हाड़ी रानी के उस बलिदान को जाता है.

हाड़ी रानी पर बानी कुछ पंक्तिया आज भी लोकप्रिय है 

"चुण्डावत मांगी सैनाणी,
 सिर काट दे दियो क्षत्राणी"

राजस्थान के मेवाड़ की रानी हाड़ी का ये बलिदान प्रेरणा देना वाला और अपने देश के प्रति इंसान में बलिदान की भावना जाग्रत करने वाली है। रानी हाड़ी अपने पति रतन सिंह को ना सिर्फ युद्ध में में जीत के लिए प्रेरित किया बल्कि ऐसा बलिदान दिया जो करने में कई बड़े योद्धा करने में कतरा जाये रानी हाड़ी का ये बलिदान आज भी इतिहास के पन्नों में याद किया जाता है।