Advertisement :
सोमनाथ मंदिर का इतिहास | History of Somnath Temple in Hindi

Advertisement :
श्री सोमनाथ मंदिर की कथा, इतिहास और महत्व | All About Somnath Temple in Hindi
सोमनाथ मंदिर- यह मंदिर भारत के पंश्चिम तट पर गुजरात राज्य के वेरावल के पास प्रभास पाटन में स्थित है। भारत के 12 ज्योतिर्लिग में से सोमनाथ पहला ज्योतिर्लिग है। यह भारत के पौराणिक मंदिरों में से एक है। यह एक तीर्यस्थान और दर्शनीय स्थल है। बहुत सी प्राचीन ग्रर्थो तथा पौराणिक कथाओं के आधार पर इस स्थान को बहुत पवित्र माना जाता है।
राज्य - गुजरात
जिला - गीर सोमनाथ
अवस्थिति - वेरावल
सोमनाथ मंदिर की जानकारी
सोमनाथ मंदिर भारत के तीर्थस्थान के नाम से जाना जाता है। इस की मरम्मत का कार्य पहली बार 1947 में सरदार वल्लभाई पटेल के द्वारा कराया गया था। सरदार वल्लभाई उस समय उप - प्रधानमंत्रि व गृहमंत्री (Home Minister) थे उन्होंन जूनागढ दौरे के दौरान इस मंदिर (Temple) के दर्शन किये थे उस समय ही वल्लभभाई पटेल ने इसकी मरम्मत का फेसला लिया था। सरदार पटेल की मृत्यु के बाद इस मंदिर की मरम्मत (Repairs) का कार्य उस समय भारत के एक मंत्री कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी को सोप दिया गया।
Advertisement :
सोमनाथ मंदिर में दिन में तीन बार आरतियां की जाती है। सुबह 7 बजे , दोपहर 12 बजे और शाम 7 बजे। यह मंदिर रोज सबुह 6 बजे से रात्रि 9 बजे तक खुला रहता है। इस मंदिर में श्रद्धालुओं (Devotees) के अलावा यहॉ पर विदेशी टूरिस्ट भी आते है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता हैं कि इस मंदिर की धरती पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपने प्राण (Life) का देहत्याग (Sacrificing) किया था।
भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों (Jyotirlinges) में एक शिवलिंग सोमनाथ के मंदिर में पाया जाता है। यह शिवाजी का मुख्य स्थान भी है। यहॉ स्थापित शिवलिंग की बहुत सी पौराणिक कथाएँ (Stories) है। जिस स्थान पर भगवान शिव ने अपने दर्शन दिय थे। उसी स्थान पर इस पवित्र (holy) ज्योतिलिंग की स्थापना की गई है। वास्तविक तौर पर तो 64 ज्योतिर्लिग है लेकिन इनमें से 12 ज्योतिर्लिंग को पवित्र (holy) तथा सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
महापुरूष के अनुसार सोमनाथ मंदिर
प्राचीन हिन्दू ग्रंथों (Texts) में बताए कथानक (किंवदंतियॉ) के अनुसार सोम अर्थात् चंद्र ने , दक्ष प्रजापति राजा की 27 कन्याओं से विवाह किया था। लेकिन उनमें से रोहिणी नामक अपनी पत्नी (wife) को उन सब से अधिक प्यार व सम्मान दिया करते थे। इसके कारण शेष कन्याओं ने इसकी शिकायत अपने सम्राट (emperor) पिता दक्ष प्रजाति से की थी। जिससे उन्होंने अपनी कन्याओं पर होने वाले अन्ययों को देखकर क्रोंध (Anger) में आकर दक्ष ने चंद्रदेव (सोम) को श्राप दे दिया कि अब से हर दिन तुम्हारा तेज (कांति, चमक) क्षीण (Emaciated) होता रहेगा। इस दिये गये श्राप के कारण चंद्रदेव का हर दूसरे दिन चंद्र (moon) का तेज धटने लगा। और सोम ने श्राप से विचलित होकर भगवान शिव की आराधना (prayer) शुरू कर दी। जिसके बाद भगवान शिव सोम से प्रसन्न हुए और सोम के श्राप (Curse) का निवारण किया। तथा सोम के कष्ट को दूर करने वाले भगवान शिव की स्थापना (installation) करके उसका नाम दिया गया ‘‘सोमनाथ‘‘ ।
सोमनाथ मंदिर का इतिहास
जे. गॉर्डन मेल्टन के पारंपरिक (Traditional) दस्तावेजो (Documentary) के अनुसार सोमनाथ में बने पहले शिव मंदिर को बहुत पुराने समय में बनाया गया था। और दूसरे मंदिर को वल्लभी के राजा ने 649 CE (सामान्य युग) में बनाया था। यह माना जाता है की सिंध के अरब गवर्नर अल - जुनैद ने 725 CE (सामान्य युग) में इसका विनाश किया था। इसके बाद 815 CE (सामान्य युग) में गुर्जर - प्रतिहार राजा नागभटृ द्वितीय ने तीसरे मंदिर का निर्माण करवाया था, इसे लाल पत्थरो (Stone) से बनवाया गया था।
लेकिन अल - जुनैद द्वारा सोमनाथ पर किये गए आक्रमण का कोई इतिहासिक गवाह (Witness) नहीं है। जबकि नागभटृ जरूर इस तीर्थस्थान के दर्शन करने सौराष्ट्र आये थे। माना जाता है की सोलंकी राजा मूलराज ने 997 CE (सामान्य युग) में पहले मंदिर का निर्माण करवाया होंगा। लेकिन कुछ इतिहासकारों (Historians) का कहना है की सोलंकी राज मूलराज ने कुछ पूराने मंदिरों का पुनर्निर्माण करवाया था। कहा जाता है। की कई बार शासको ने इसे क्षति (Damage) भी पहोचाई थी लेकिन फिर कुछ राजाओ ने मिलकर इस इतिहासिक पवित्र (Holy) स्थान की मरम्मत भी करवाई थी।
Advertisement :
सल्तनतों द्वारा आक्रमण
दिल्ली सल्तनत ने गुजरात पर सन् 1297 में कब्जा (Capture) किया तो इसे पॉचवीं बार गिराया गया। मुगल बादशाह औरंगजेब ने इसे पुनः 1706 में गिरा दिया। इस समय जो मंदिर खडा है उसे भारत के गृह मंत्री (Home Minister) सरदार बल्लभ भाई पटेल ने बनवाया और 1 दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्माने इसे राष्ट्र को समर्पित (Dedicated) किया। 1948 में प्रभासतीर्थ प्रभास पाटण के नाम से जाना जाता था। इसी नाम से इसकी तहसील और नगर पालिका (Municipality)थी।
उस समय यह जूनागढ रियासत का मुख्य नगर था। लेकिन 1948 में भारत की स्वतंत्रता के बाद रियासतों का विलय होने के कारण तहसील को नगर पालिका और तहसील कचहरी में बदल दिया गया। मंदिर के बार - बार खंडन और मरम्मत (Repairs) होती रही पर शिवलिंग वही का वही रहा। मंदिर के दक्षिण में समुद्र के तट पर एक स्तंभ की स्थापना की गई है। उसके ऊपर एक तीर रखकर संकेत किया गया है कि सोमनाथ मंदिर और दक्षिण धुव (South smoke) के बीच में पृथ्वी का कोई भूभाग नहीं है। मंदिर के पहले भाग में स्थित प्राचीन मंदिर के विषय में यह कहा जाता है कि यह पार्वती जी का मंदिर है। आज के मंदिर की मरम्मत और देख रेख व संचालन (Operations) का कार्य सोमनाथ ट्रस्ट के द्वारा किया जाता है।
भारत सरकार ने ट्रस्ट को जमीन , बाग - बगीचे देकर आय का प्रंबध (Management) किया है। यह तीर्थ पितृगणों के श्राद्ध , नारायण बलि आदि कर्मो के लिए भी प्रसिद्ध है। चैत्र, भाद्र , कार्तिक माह से यहां श्राद्ध करने का विशेष महत्व बताया गया है। इन तीन महीनों में यहां पर श्रद्धालुओं (Devotees) की बडी भीड लगती है। इसके अलावा यहां तीन नदियों हिरण, कपिला और सरस्वती का महासंगम होता है। इसे त्रिवेणी स्नान (Bath) का विशेष महत्व भी कहा जाता है।
सोमनाथ मंदिर की बेतह रोचक बाते
- इस मंदिर को तोडने के लिए सन् 1665 में मुगल शासक औरंगजेब ने आदेश दे दिया था। लेकिन बाद में इस मंदिर का पुन: निर्माण किया गया था। और बाद में पुणे के पेशवा, नागपुर के राजा भोसले, कोल्हापुर के छत्रपति भोंसले, अहिल्याबाई होलकर और ग्वालियर के श्रीमंत पाटिलबूआ शिदें के सामूहिक सहयोग से 1783 में इस मंदिर की मरम्मत करवाई गई।
- अलाउदीन खिलजी के द्वारा सन् 1296 में मंदिर को क्षतिग्रस्त कर गिरा दिया था। लेकिन बाद में गुजरात के राजा करण ने इसका बचाव किया था।
- अफगान शासक ने सन् 1024 में मंदिर को क्षति पहोचकार गिरा दिया था। लेकिन फिर परमार राजा भोज और सोलंकी राजा भीमदेव प्रथम ने 1026 से 1042 के बिच इसका पुनर्निर्माण किया था। माना जाता है कि लकडियों की सहायता से मंदिर का पुनर्निर्माण किया था। लेकिन बाद में कुमारपाल ने इसे बदलकर पत्थरों का बनवाया था।
सोमनाथ मंदिर का इतिहास | History of Somnath Temple in Hindi




