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देश का ये गांव जहां हर घर में है आईएएस, आईपीएस ऑफिसर | IAS Village India

देश का ये गांव जहां हर घर में है आईएएस, आईपीएस ऑफिसर | IAS Village India

In : Meri kalam se By storytimes About :-5 months ago
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सरकारी नौकरी हो और वो भी आईपीस और आईएएस की फिर तो बात ही कुछ और है जब पेपर में आईएएस और आईपीस के रिजल्ट आते है तब पेपर में बड़े अक्षरों में लिखा जाता है इस जिले के बेटे या बेटी ने किया अपने परिवार और जिले का नाम रोशन तब उस शहर या जिले की काफी चर्चा होने लग जाती है शहरों में जब  आईएस या आईपीएस में सिलेक्शन होने पर इतना ख़ुशी का माहौल होता है दूसरी और दोस्तों उस गांव के बारे में सोचिये जहां घर में कोई ना कोई सदस्य आईएस और आईपीएस है


जी हा दोस्तों ऐसा गांव जहां हर घर में कोई ना कोई आईएस या आईपीएस अधिकारी है ये गांव उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ से करीब 250 किलोमीटर दूर माधोपट्टी गाँव है माधोपट्टी गाँव में कुल 75 घर है पुरे गांव में अब तक 47 लोग आईएस और आईपीएस की पोस्ट पर कार्यरत है

इस गांव में आप जिस भी घर के बारे में जानोगे उस घर में आपको एक ना एक आईएएस या आईपीएस ऑफिसर जरूर मिल जायेगा साथ ही इस गांव लोग आर्मी, डॉक्टर, और बैंकिंग सेक्टर में भी बड़े पद पर कार्यरत है ये गांव और अन्य आस पास के गांवो के लिए एक प्रेरणा बन गया है युवा एक छोटे से गांव में जन्म ले कर कर देश के सबसे बड़े पद पर रहकर देश की सेवा करने के लिए मेहनत करते है इस गांव की पहली बार सफलता की शुरुआत साल 1914 में हुई थी


माधोपट्टी गाँव में पहली बार मुस्तफा हुसैन  सरकारी नौकरी में चयनित हुए थे मुस्तफा हुसैन का चयन पीसीएस में हुआ इस नौकरी के बाद गांव में जैसे सरकारी नौकरी लगने का सिलसिला शुरू हो गया मुस्तफा हुसैन की नौकरी के बाद आज भी गांव में सरकारी नौकरी पाने का रीति गांव में चल रही है  सभी युवा मुस्तफा हुसैन की प्रेरणा लेकर चलते है

मुस्तफा हुसैन की सरकारी नौकरी लगने के बाद तो पूरा गांव ही बदल गया अभी सभी लोग अपने बच्चो को आईएएस और आईपीएस नौकरी की तैयारी करवाने लग गए साल 1952 में इस गांव दूसरा चयन इंदु प्रकाश सिंह का हुआ इंदु प्रकाश सिंह ने इस रिजल्ट में 13 वी रैंक हासिल की इंद्र प्रकाश सिंह की ये सफलता देख गांव के युवाओं में नौकरी के प्रति और जोश बढ़ गया तब से सभी लोगो ने इस गांव को एक अलग दिशा में ले जाने का मन बना लिया था


माधोपट्टी जैसे छोटे से गांव में रहने वाले इंदु ने दुनिया के कई देशो के भारत देश के राजदूत रहे साथ ही दोस्तों इंदु के परिवार में उनके चार छोटे भाइयों ने भी भी आईएस में चयनित हो कर अपने गांव का नाम रोशन कर दिया और विनय सिंह इस दौरान बिहार के मुख्य सचिव के रूप में नियुक्त हुए

इंदु सिंह के सरकारी पद पर नियुक्त होने के बाद शशिकांत साल 1964 में आईएएस ऑफिसर बनें बाद में शशिकांत का पुत्र साल 2002 में आल ओवर इंडिया में 31 वी रैंक हासिल की और साल 2013 में इसी गांव की बेटी शिवानी सिंह पीसीएस के एग्जाम फाइट कर गांव का नाम रोशन कर दिया

दोस्तों इस गांव की खास बात ये है की यहां के लोग आईएएस और आईपीएस के ऑफिसर के साथ अन्य बड़े सरकरी पदों पर भी कार्यरत है गांव के अमित पांडेय ने अब तक 5 किताबें लिख चुकें है और उनसे आज गांव के कई युवा प्रेरित होते है गांव में कई लोग बड़े पद पर कार्य का रहे उनके गांव के अन्मजेय सिंह जो विश्व बैंक मनिला , और निरु जो डॉक्टर और लोलेन्द्र सिंह वैज्ञानिक के रूप में भाभा इंस्टीट्यूट, इसरो में ज्ञानू मिश्रा  के पदों पर देश की सेवा में कार्यरत है 


आज इस गांव का हर व्यक्ति अपने इस गांव की सफलता पर गर्व करता है और हमेशा युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है