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वीर योद्धा बर्बरीक जो एक बाण में खत्म कर सकता था महाभारत युद्ध | Barbaric Story In Hindi

By N.j / About :-7 years ago

दोस्तों हम महाभारत युद्ध की कहानियां कई बार सुन चुकें है इस युद्ध के दौरान 100 कौरवों पर 5 पांडवो ने विजय हासिल की थी लेकिन दोस्तों महाभारत से जुड़े कुछ ऐसे पहलु है जो कम लोगो को ही पता है महाभारत के युद्ध में कई योधाओं ने अपने बल दिखाए और युद्ध में वीरता को प्राप्त हुए लेकिन महाभारत में गदाधारी भीमसेन के पोते और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक की कहानी थोड़ी अलग है बर्बरीक को उनकी माता ने बाल्यकाल से ये शिक्षा दी जब भी तुम्हें युद्ध में कोई कमजोर पक्ष दिखे तुम उसका साथ दोगे हम बचपन से सुनते आये है की बर्बरीक में ऐसी सिद्ध शक्तियां थी जिनसे वो महाभारत का युद्ध पलक झपकतें ही खत्म कर सकते थे

बर्बरीक बचपन से एक महान योद्धा थे बर्बरीकने युद्ध की कलाओं का ज्ञान अपनी माँ से लिया माना जाता है की एक बार बर्बरीक ने माता दुर्गा की कड़ी तपस्या की उनकी तपस्या को देख माँ दुर्गा प्रसन्न हुई उन्हें तीन बाण भेंट किये और साथ में उन्हें तीन बाण धारी की उपाधि दी साथ ही उनकी इस तपस्या से प्रसन्न होकर अग्नि देवता ने भी बर्बरीक को धनुष प्रदान किया जो उन्हें तीनो लोको में महान बनाने के लिए काफी था

जब महाभारत के युद्ध की शुरुआत हुई तब बर्बरीक भी इस महान युद्ध में शामिल होना चाहते थे अपनी इसी इच्छा के साथ बर्बरीक अपनी माता से युद्ध में जाने के लिए आज्ञा लेने गए तब उनकी माता ने बर्बरीक को युद्ध में हारने वाले पक्ष का साथ देने का वचन लिया बर्बरीक ने अपनी माता को वचन दिया की वो इस युद्ध में हारने वाले पक्ष की और से युद्ध में लड़ेंगे अपनी माँ से आज्ञा ले बर्बरीक युद्ध स्थल की और निकल पड़े

अपनी माँ से आज्ञा के बाद बर्बरीक युद्ध स्थल की और जा रहे थे तब भगवान श्री कृष्ण ने एक ब्राह्मण का भेष धारण कर उनका रास्ता रोक लिया श्री कृष्ण ने बर्बरीक का मजाक उड़ाते हुए कहा की तुम सिर्फ तीन बाण के साथ महाभारत जैसे बड़े युद्ध में लड़ने जा रहे हो तब बर्बरीक ने श्री कृष्ण की बात सुन उन्हें जबाब दिया की मेरा एक बाण इस पुरे युद्ध को खत्म कर सकता है मेरे तीन बाण तीनो लोको को परास्त करने के लिए काफी है

तब श्री कृष्ण ने बर्बरीक की परीक्षा लेने के लिए उन्हें पीपल के पेड़ पर लगे सभी पत्तों  को एक बाण में भेदने के लिए बोले श्री कृष्ण की बात सुन बर्बरीक ने अपने कमान से एक तीर निकाल दिया पीपल के सभी पत्तों को भेदने के बाद वो तीर श्री कृष्ण के पैर के पास घूमने लगा क्योंकि श्री कृष्ण ने उसी पीपल के पेड़ एक पत्ते को अपने पैर के निचे दबा लिया था ये नजारा देख बर्बरीक ने भगवान श्री कृष्ण को कहा हे ब्राह्मण अपने पैर को हटा लीजिये नहीं तो ये आपके पैर में भी घुस सकता है

इस पूरी घटना के बाद श्री कृष्ण ने बर्बरीक से पूछा की तुम युद्ध में किस तरह से लड़ रहे हो तब उन्होंने बताया की वो अपनी माँ को वचन दे कर आये है की जो भी पक्ष युद्ध के दौरान कमजोर हो तुम उनका साथ देना श्री कृष्ण इस बात को भली भांति जानते थे की इस युद्ध में पांडव विजयी होंगे और कौरव हारेंगे यदि इस स्थित में बर्बरीक ने कौरवों का साथ दे दिया तो युद्ध का परिणाम ही बदल जायेगा इस बात को सोच श्री कृष्ण ने ब्राह्मण के भेष में छल करते हुए उनसे दान की इच्छा मांग की

बर्बरीक ने उन्हें दान का वचन दे दिया कृष्ण ने इस बात को सुन बर्बरीक से उनका शीश दान में मांग लिया शीश दान में मांगने के कारण बर्बरीक  को श्री कृष्ण पर संदेह हुआ और बर्बरीक ने ब्राह्मण के भेष के पीछे छुपे श्री कृष्ण से अपना असली रूप दिखाने की मांग कर दी बर्बरीक की ये बात सुन  श्री कृष्ण ने अपना विराट रूप के दर्शन बर्बरीक को दिए हम सब जानते है की महाभारत में श्री कृष्ण ने कितने छल किये थे और वो कितने बड़े छलिए थे और बर्बरीक से कहा की हमें इस युद्ध की शुरुआत करने के लिए रणभुमि पूजन के लिए एक वीर के शीश की जरुरत है अपने वचन के अनुसार बर्बरीक भगवान कृष्ण को अपना शीश देने के  लिए तैयार हो गए

लेकिन उन्होंने कृष्ण से एक विनती की उनकी इच्छा है की वो महाभारत के इस महान युद्ध को अपनी आखों से देखना चाहते है श्री कृष्ण ने उनकी ये इच्छा पूरी करने का वचन दिया बर्बरीक ने फाल्गुन माह की द्वादशी के दिन अपना शीश श्री कर्षण को दान दिया भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक की इच्छा के अनुसार उनका सिर युद्धभूमि के पास एक पहाड़ी पर रख दिया जहां से वो इस युद्ध को देख सकें

श्री कृष्ण बर्बरीक के इस बलिदान से काफी प्रभावित हुए और बर्बरीक को खाटू श्याम स्थान पर स्थापित किया और साथ में बर्बरीक  को श्याम  नाम की उपाधि प्रदान की आज सभी भक्त इन्हें खाटू श्याम बाबा के नाम से भी जानते है लाखों के संख्या में भक्त शयाम बाबा की दर पर मन्नत मांगने आते है

वीर योद्धा बर्बरीक जो एक बाण में खत्म कर सकता था महाभारत युद्ध | Barbaric Story In Hindi